Rice and Wheat: आज भारत चावल और गेहूं दोनों का निर्यात कर रहा है और चावल के उत्पादन में 15 करोड़ टन के साथ चीन को पीछे छोड़कर विश्व में नंबर एक हो चुका है. अब तैयारी है कम पानी में खेती कैसे की जाए?
विश्व में नंबर एक बना भारत
किसी समय देश में खाद्यान की भारी कमी थी और हमें विदेशों से अनाज मंगवाना पड़ता था. लेकिन अब हमारे गोदाम खाद्यान से भरे पड़े हैं, विदेशों को भी हम गेंहू चावल निर्यात कर रहे हैं. इसके पीछे सरकार का पहला लक्ष्य गेहूं और चावल में आत्मनिर्भर बनना था, जिसे हासिल कर आज भारत चावल और गेहूं दोनों का निर्यात कर रहा है और चावल के उत्पादन में 15 करोड़ टन के साथ चीन को पीछे छोड़कर विश्व में नंबर एक हो चुका है.
लेकिन धान की खेती में पानी की खपत बहुत अधिक है, इसलिए अब कम समय और कम पानी में होने वाली खेती जरुरी है, ताकि भारत आने वाले समय में भी हमेशा आगे रहे.
डीएसआर को बढ़ावा
धान की खेती में डीएसआर तकनीक को बढ़ावा दिया जा रहा है. इस तकनीक में धान की कुछ खास किस्मों के जरिए डायरेक्ट सीडेड राइस (DSR) तकनीक से खेती की जाती है. इस तरीके से खेती करने से खेत में स्थायी रूप से पानी भरने की जरूरत नहीं रहती और कम पानी में भी धान की खेती से अच्छी पैदावार मिलती है.
कम पानी वाली अन्य फसलों को प्रोत्साहन राशि
फसल विविधीकरण कार्यक्रम के तहत देश के अनेक राज्यों में दलहन, तिलहन, मोटे की खेती और कृषिवानिकी जैसी वैकल्पिक फसलों को प्रोत्साहित किया जा रहा है. सरकारी योजनाओं राज्य सरकारों के माध्यम से दलहन के लिए 9,000 रुपए प्रति हेक्टेयर, मक्का व जौ के लिए 7,500 रुपए, हाईब्रिड मक्का के लिए 11,500 रुपए और मोटे अनाजों की खेती के लिए 7,500 रुपए प्रति हेक्टेयर तक प्रोत्साहन राशि दी जा रही है.
एमएसपी पर दलहन खरीद
सरकार द्वारा दलहन की एमएसपी पर खरीद की जा रही है, जिससे किसानों को अच्छे दाम मिल रहे हैं.
सिंचाई तकनीक के लिए अनुदान
खेती में कम पानी में अच्छी खेती की जा सके, इसके लिए भी सरकार द्वारा ड्रिप सिंचाई तकनीक, फव्वारा सिचाई तकनीक अपनाने के लिए कुसुम योजना चलाई जा रही है. सोलर इनर्जी से बिजली बचत के साथ भी सिंचाई तकनीक का लाभ किसानों को दिया जा रहा है.
जलवायु परिवर्तन के समय पानी खास मुद्दा है, ऐसे में काम पानी में अच्छी पैदावार लेने के लिए नई तकनीक अपनाना जरूरी है, जिससे देश के साथ-साथ किसान का भी विकास होगा.





