Animal Treatment: गांव-देहात में पशुपालकों के सामने पशु के बीमार होने पर उसकी सबसे बड़ी समस्या पशु चिकित्सक तक ले जाने की होती है. ऐसी समस्या के समाधान के लिए केंद्र सरकार ने ग्रामीण इलाकों में रहने वाले पशुपालकों के लिए एक ऐसी योजना चला रखी है जिसके तहत मात्र 2 रुपए में आप अपने बीमार पशु का इलाज घर बैठे करा सकते हैं. क्या है यह योजना और कैसे होता है केवल 2 रुपए में इलाज, आइए जानते हैं.

टोल-फ्री नंबर पर करें फोन

पशु के बीमार होने पर आपको टोल-फ्री नंबर 1962 पर फोन करना है. इसके बाद पशु का इलाज करने वाली मोबाइल वेटरनरी यूनिट की पूरी टीम दवाओं सहित आपके घर तक पहुंच जाएगी. यह सेवा उत्तर प्रदेश से लेकर राजस्थान, बिहार, छत्तीसगढ़ राज्यों तक फैल चुकी है, जो पशुपालन के रूप में इस्तेमाल होने वाले पशुओं का इलाज घर बैठे करने की सुविधा दे रही है.

क्या है यह योजना

‘पशुधन स्वास्थ्य एवं रोग नियंत्रण कार्यक्रम’ के तहत लागू हुई यह योजना दूरदराज के गांवों में पशुओं को तुरंत इलाज मिल सके, इसकी सुविधा मोबाइल वैन के साथ शुरू की गई थी. इन वैनों में पशु चिकित्सक, पैरामेडिकल स्टाफ, दवाएं और बेसिक उपकरण मौजूद रहते हैं. इलाज का शुल्क नाममात्र 2 से 10 रुपए तक है, जो गरीब किसानों के लिए अत्यंत लाभकारी है.

योजना का लाभ कैसे उठाएं

अगर आपका पशु बीमार है तो आप टोल-फ्री 1962 नंबर पर फोन करें. उत्तर प्रदेश में यह सेवा सुबह 10 बजे से शाम 8 बजे तक उपलब्ध है, जबकि कुछ राज्यों में 24 घंटे सातों दिन यह योजना लागू है.

फोन करने पर पशु की समस्या बताएं और अपना पूरा पता भी नोट करा दें. यह फोन आपका कंट्रोल रूम जाएगा जहां से आपके बताए गए पते के नजदीक मोबाइल यूनिट को जानकारी देगा. उसके बाद आधा से 1 घंटे के अंदर इलाज करने वाली टीम वैन के साथ आपके दिए पते पर आ जाएगी. पशु डॉक्टर आपके बीमार पशु की जांच करेंगे, उसे दवा देंगे. इसके लिए आपको केवल न्यूनतम शुल्क जो 2 रुपए से 10 रुपए तक है, वह देना है.

1962 नंबर पर पशु एंबुलेंस जैसी सुविधा उपलब्ध है. कुल मिलाकर, यह योजना पूरे देश में पशुपालन क्रांति ला रही है.

पशुपालकों को लाभकारी है यह योजना

इस पहल से पशुओं को समय पर इलाज मिल जाता है, जिससे पशु मृत्यु दर घटी है और पशुपालकों को फायदा मिल रहा है, इसलिए पशुपालकों के फोन में 1962 नंबर सेव होना चाहिए. पशु के बीमार होने पर तुरंत कॉल करें. ज्यादा जानकारी के लिए स्थानीय पशु विभाग से संपर्क कर सकते हैं.

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