Aloe Vera Barfi. क्या आपने कभी सोचा है कि एलोवेरा, जिसे अब तक सौंदर्य प्रसाधन और स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद माना जाता था, उससे बर्फी भी बनाई जा सकती है ? हाल ही में हरियाणा के लाला लाजपत राय पशु चिकित्सा एवं पशु विज्ञान विश्वविद्यालय (LUVAS) की एक नई रिसर्च ने इस कल्पना को हकीकत में बदलने का काम किया है.

किसने किया यह कारनामा?

हरियाणा के हिसार में स्थित लाला लाजपत राय कॉलेज ऑफ डेयरी साइंस एंड टेक्नोलॉजी की सहायक प्राध्यापिका डॉ. वंदना चौधरी ने एलोवेरा जूस से ऐसी पौष्टिक बर्फी तैयार की शुरुआत की है, जो स्वाद में पारंपरिक खोया बर्फी जैसी है, लेकिन पोषण के मामले में उससे कई कदम आगे है. जो लोग सेहत के प्रति सजग रहते हैं उनके लिए यह एक हेल्दी मिठाइ साबित होगी.

15 प्रतिशत एलोवेरा जूस वाला फॉर्मूला निकला सबसे सफल

इस नए प्रयोग के दौरान एलोवेरा की अलग मात्रा को इसमें शामिल किया गया, लेकिन 15 प्रतिशत एलोवेरा जूस वाली बर्फी सभी मानकों पर सबसे बेहतर साबित हुई. इसका स्वाद लगभग सामान्य बर्फी जैसा रहा और इसकी गुणवत्ता भी उपभोक्ताओं की पसंद के अनुरूप पाई गई, जबकि 20 प्रतिशत एलोवेरा मिलाने पर स्वाद और टेक्सचर में हल्का बदलाव महसूस हुआ.

इस काम को अंजाम दिया डॉ. वंदना चौधरी ने. उनका कहना है कि इस रिसर्च को पूरा करने में करीब 4 से 5 महीने का समय लगा. पहले देश-विदेश के शोध पत्रों का अध्ययन किया गया, फिर अलग-अलग संयोजनों पर प्रयोग किए गए. हर चरण में वैज्ञानिक परीक्षणों के बाद ही अंतिम फॉर्मूला तैयार किया गया, ताकि उत्पाद स्वादिष्ट होने के साथ पूरी तरह सुरक्षित भी रहे.

कैसे बनाई बर्फी, जो रहे सेहत से भरपूर

इसे बनाने के दौरान विश्वविद्यालय के उद्यान से एलोवेरा लिया गया और उस को काटकर लगभग आधे घंटे तक रखा गया, ताकि पीले रंग का लिसलिसा पदार्थ बाहर निकल जाए. इसमें मौजूद एलोइन (Aloin) नामक तत्व अधिक मात्रा में स्वास्थ्य के लिए उपयुक्त नहीं माना जाता. इसके बाद इससे एलोवेरा का जूस तैयार कर बर्फी में मिलाया गया.

डेयरी उद्योग और स्टार्टअप के लिए नई राह

डॉ. वंदना चौधरी का मानना है कि यदि इस तकनीक को व्यावसायिक स्तर पर अपनाया जाता है, तो उपभोक्ताओं को स्वाद और स्वास्थ्य का बेहतर विकल्प मिलेगा. साथ ही डेयरी उद्योग में सेहत के उत्पादों की नई श्रृंखला विकसित हो सकती है, जिससे किसानों, डेयरी उद्यमियों और फूड स्टार्टअप्स को भी लाभ मिलेगा.

एलोवेरा किसानों की बढ़ेगी कमाई

इस शोध का सबसे बड़ा फायदा केवल डेयरी उद्योग तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि एलोवेरा की खेती करने वाले किसानों को भी इसका लाभ मिल सकता है. अभी तक एलोवेरा का उपयोग मुख्य रूप से कॉस्मेटिक, आयुर्वेदिक और स्वास्थ्य उत्पादों तक सीमित रहा है, लेकिन यदि एलोवेरा युक्त बर्फी जैसी वैल्यू एडेड मिठाइयों का व्यावसायिक उत्पादन शुरू होता है, तो इसकी मांग में भी बढ़ोतरी हो सकती है.

विशेषज्ञों का मानना है कि इससे एलोवेरा की खेती को नया बाजार मिलेगा और किसानों के लिए आय के अतिरिक्त स्रोत खुलेंगे. साथ ही डेयरी उद्योग, फूड प्रोसेसिंग कंपनियों और कृषि आधारित स्टार्टअप के बीच नए व्यावसायिक अवसर विकसित हो सकते हैं यानी यह शोध केवल एक नई हेल्दी मिठाई तक सीमित नहीं है, बल्कि खेती से लेकर प्रसंस्करण और बाजार तक पूरी वैल्यू चेन को मजबूत करने की क्षमता रखता है.

इनकी रहा खास योगदान

इस शोध को सफल बनाने में विभागाध्यक्ष डॉ. दिवाकर शर्मा के मार्गदर्शन और कुलपति डॉ. विनोद कुमार वर्मा का खास सहयोग रहा.

अगर आने वाले समय में एलोवेरा का इस्तेमाल बर्फी जैसी मिठाइयों में इस्तेमाल होने लगेगा तो यह तकनीक बड़े स्तर पर अपनाई जा सकती है, जिससे बाजार में हेल्दी मिठाइयां देखने को मिल सकती हैं, जो स्वाद के साथ-साथ सेहतमंद भी होंगी.

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