फसल के उत्पादन पर कीटों व बीमारियों का सब से अधिक असर पड़ता है. इस से न केवल फसल का उत्पादन प्रभावित होता है, बल्कि कभीकभी पूरी की पूरी फसल ही इन कीट व बीमारियों की वजह से चौपट हो जाती है. फसल में कीट व बीमारियों के नियंत्रण के लिए जिन रासायनिक या जैविक कीटनाशकों का प्रयोग किया जाता है, उन के छिड़काव के लिए आवश्यकता पड़ती है स्प्रेयर यानी छिड़काव
यंत्र की. ये छिड़काव यंत्र कई तरह के होते हैं. अगर छिड़काव करने का दायरा ज्यादा बड़ा नहीं है, तो हाथ या पैर से चलाए जा सकने वाले छिड़काव यंत्रों का प्रयोग किया जाता है.नेपसेक स्प्रेयर : इस तरह का छिड़काव यंत्र आमतौर पर प्लास्टिक का बना होता है, जो छिड़काव करने वाले व्यक्ति द्वारा कंधे पर लाद कर छिड़काव करने में प्रयोग में लाया जाता है. Modern Kheti

यह छिड़काव यंत्र 5 मीटर तक की ऊंचाई वाले पेड़पौधों पर आसानी से कीटनाशक घोल को पहुंचा सकता है. इस यंत्र को एक व्यक्ति आसानी से चला सकता है. इसे चलाने के लिए एक हैंडल बना होता है, जो 3-5 किलो वर्ग सेमी की हवा का दबाव बनाता है, जिस से कीटनाशक घोल नोजल द्वारा पौधों पर आसानी से पहुंच पाता है. इस यंत्र द्वारा धान, गेहूं, सरसों, चना, मटर, उड़द, अरहर, सब्जियों व छोटे फलदार पौधों पर छिड़काव किया जा सकता है. इसे बाजार में 800 रुपए में खरीदा जा सकता है.फुटपंप स्प्रेयर : यह छिड़काव यंत्र पीतल का बना होता है. Modern Kheti

इस में पैर से चलाने के लिए एक पैडल लगा होता है, जिस पर दबाव देने के बाद यंत्र के पंप में 17 किलो वर्ग सेमी हवा का दबाव बनता है. इस में प्लास्टिक की लंबी नली नोजल से जुड़ी होती है, जिस से इसे किसी बड़े डंडे में बांध कर ऊंचे पेड़ों पर भी छिड़काव करने में सहूलियत होती है. इस यंत्र की बाजार में कीमत 5 हजार रुपए है. हेड स्प्रेयर : यह छोटे पेड़पौधों पर कम क्षेत्रफल में छिड़काव के लिए प्रयोग किया जाता है. इस में 500 मिली की मात्रा का छोटा टैंक होता है, जो वायुदाब के बाद नोजल द्वारा कीटनाशी घोल को पौधों पर छोड़ता है.

स्प्रेयर के रखरखाव में सावधानियां जब भी आप स्प्रेयर का प्रयोग छिड़काव के लिए करें, तो पहले उस के वाशर, नोजल व अन्य खुलने वाले भागों की सफाई कर लें. अगर कोई पार्ट खराब हो तो उसे बदलना जरूरी होता है. कीटनाशक घोल को मशीन में डालने से पहले छान लेना चाहिए, इस से मशीन के नोजल में रुकावट नहीं पैदा होगी. समयसमय पर छिड़काव यंत्रों के गियर बाक्स व वाशर में
ग्रीस व तेल लगाते रहना चाहिए. Modern Kheti

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