भेड़-बकरी से अच्छी नस्ल के बच्चे प्राप्त करने की दिशा में कृत्रिम गर्भाधान काफी मायने रखता है. कैसे और कहां कराएं कृत्रिम गर्भाधान इसी विषय पर एक प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित हुआ जिसमें अनेक जानकारियां दी गईं. Livestock Development
केंद्रीय भेड़ एवं ऊन अनुसंधान संस्थान अविकानगर की पहल
भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद-केंद्रीय भेड़ एवं ऊन अनुसंधान संस्थान अविकानगर मे विगत दिनों भेड़ एवं बकरी में कृत्रिम गर्भाधान विषय पर कार्यक्रम आयोजित हुआ जिसमें राजस्थान के विभिन्न जिलों के पशु चिकित्सकों के लिए 2 दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम हुआ.
वर्तमान वित्तीय वर्ष के दौरान इस कार्यक्रम का आयोजन विभिन्न चरणों में किया जा रहा है, जिसके अंतर्गत राजस्थान राज्य के विभिन्न जिलों के पशुपालन विभाग के 700 पशु चिकित्सकों एवं पैरावेटरनरी कार्मिकों को प्रशिक्षण प्रदान किया जाएगा.
डॉ. रणधीर सिंह भट्ट, पशु पोषण विभाग अध्यक्ष ने कहा कि राजस्थान में भेड़ एवं बकरियों के आनुवंशिक सुधार को मिलेगी तेजी. प्रजनन दक्षता बढ़ाने तथा उत्पादकता में वृद्धि हेतु कृत्रिम गर्भाधान (AI) की महत्वपूर्ण भूमिका हैं. भेड़-बकरी पालन में एआई तकनीक के प्रभावी करने और व्यापक प्रसार के लिए पशु चिकित्सकों को प्रशिक्षण अत्यंत आवश्यक है. Livestock Development
इन्होने भी रखे सुझाव
प्रशिक्षण कार्यक्रम के समन्वयक डॉ. अजीत सिंह महला ने बताया कि यह प्रशिक्षण कार्यक्रम भेड़ एवं बकरी में मदसमकालन, सीमेन प्रोसेसिंग तथा कृत्रिम गर्भाधान तकनीकों में पशु चिकित्सकों की तकनीकी दक्षता को सुदृढ़ करने के लिए तैयार किया गया है, जो राज्य में पशुपालकों की आजीविका सुदृढ़ करने हेतु अत्यंत महत्वपूर्ण है.
डॉ. सिद्धार्थ सारथी मिश्रा, एजीबी विभागाध्यक्ष ने प्रजनन तकनीकियों का नस्ल सुधार में महत्त्व बताते हुए कहा कि फील्ड में काम करने वाले पशुचिकित्सों को नस्ल संरक्षण को ध्यान में रखते हुए कृत्रिम गर्भाधान जैसी तकनीक का उपयोग करना चाहिए.
यह प्रशिक्षण कार्यक्रम पशु शरीर क्रिया एवं जैव रसायन विभाग के डॉ. एस. एस. डांगी, डॉ. मेघा पांडे, डॉ. अजीत सिंह महला एवं डॉ. वी. राल्ते द्वारा निदेशक डॉ. अरुण कुमार तोमर के मार्गदर्शन में संचालित किया गया. इस अवसर पर अनुभाग प्रभारी डॉ. अरविंद सोनी भी उपस्थित रहे.
इस तरह के प्रशिक्षण कार्यक्रम विभिन्न बैच में राजस्थान पशुधन विकास बोर्ड द्वारा केंद्रीय प्रवर्तित राष्ट्रीय पशुधन मिशन के अंतर्गत प्रायोजित हैं. Livestock Development
इस पहल का उद्देश्य राज्य में भेड़ एवं बकरी में कृत्रिम गर्भाधान के क्षेत्रीय स्तर पर प्रभावी क्रियान्वयन को सुदृढ़ करना है, जिससे भेड़ एवं बकरी क्षेत्र के विकास को बढ़ावा मिले तथा ग्रामीण आय में वृद्धि सुनिश्चित हो सके. Livestock Development





