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खेती की जमीन पर फसल भी लहलहाए और उसी खेत में सौर ऊर्जा से बिजली भी बने, तो किसान की कमाई बढ़ाने का रास्ता खुल सकता है. इसी सोच को आगे बढ़ाने के लिए नई दिल्ली के भारत मंडपम में 7वें एग्रीवोल्टाइक वर्ल्ड कांफ्रेंस का आयोजन किया गया. विगत दिनों आयोजित हुए इस 3 दिवसीय सम्मेलन का उद्घाटन केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने किया.
बोले शिवराज, एक खेत, 2 फायदे
एग्रीवोल्टाइक ऐसी तकनीक है, जिस में खेत के ऊपर सोलर पैनल लगाए जाते हैं और उन के नीचे फसल उगाई जाती है यानी किसान को खेती से उपज मिलती है और सौर पैनलों से बिजली भी बनती है. इस बिजली का इस्तेमाल सिंचाई और दूसरे कामों में किया जा सकता है. व्यवस्था के अनुसार बिजली बेच कर अतिरिक्त आमदनी भी हो सकती है.
केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि, किसान सिर्फ अन्नदाता ही नहीं, बल्कि ऊर्जादाता भी बन सकता है. इस से किसानों की आमदनी बढ़ाने के साथ स्वच्छ ऊर्जा का उत्पादन भी बढ़ेगा.
छोटे किसानों का रखा जाए खास ध्यान
भारत में ज्यादातर किसान छोटे और सीमांत हैं. उन के पास औसतन एक हेक्टेयर से भी कम जमीन है. ऐसे में वे खेती छोड़ कर सोलर प्लांट नहीं लगा सकते, इसलिए एग्रीवोल्टाइक का ऐसा मौडल तैयार करना जरूरी है, जिस में किसान की खेती प्रभावित न हो.
मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि सोलर पैनलों की ऊंचाई और उन के बीच की दूरी ऐसी होनी चाहिए कि ट्रैक्टर, जुताई के यंत्र और खेती के दूसरे उपकरण आसानी से चल सकें. किसान अपनी जरूरत के मुताबिक फसल भी बदल सके. केवल पैनलों के नीचे कुछ पौधे लगा देने से काम नहीं चलेगा, बल्कि खेती और बिजली उत्पादन दोनों को ध्यान में रख कर व्यवस्था बनानी होगी.
उन्होंने यह भी कहा कि बारिश का पानी खेत में सही तरीके से निकले और उस का संचयन किया जा सके. इस से मिट्टी का कटाव रोकने और पानी बचाने में मदद मिलेगी.
बिजली से कमाई कैसे होगी?
सोलर पैनल लगने के बाद बिजली का उत्पादन तो होगा, लेकिन किसान को इस का पूरा फायदा तभी मिलेगा, जब बिजली खरीदने और उसे बिजली ग्रिड तक पहुंचाने की व्यवस्था ठीक हो. बिजली का भुगतान भी समय पर होना चाहिए.
केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि कंपनियों के साथ होने वाले समझौतों में किसान के हित सुरक्षित रखे जाएं. यदि कोई कंपनी बीच में परियोजना छोड़ देती है या समझौता खत्म होने पर सोलर पैनल हटाने पड़ते हैं, तो इस का खर्च किसान पर नहीं पड़ना चाहिए.
जुड़ेंगे एफपीओ
किसान उत्पादक संगठनों (एफपीओ) को भी इस काम से जोड़ने का सुझाव दिया गया. इस से किसान मिल कर परियोजनाएं चला सकते हैं और उन्हें तकनीकी मदद मिलने की संभावना बढ़ेगी.
गांव में ही मिलेगा रोजगार
एग्रीवोल्टाइक से केवल किसानों को ही नहीं, बल्कि ग्रामीण युवाओं और महिलाओं को भी काम मिल सकता है. सोलर पैनलों की देखरेख, मरम्मत, सफाई और संचालन के लिए प्रशिक्षित लोगों की जरूरत होगी. इससे गांवों में ही रोजगार के नए अवसर बन सकते हैं.
कृषि और ऊर्जा मंत्रालय मिलकर इस दिशा में काम करेंगे, ताकि खेती के साथ बिजली उत्पादन को बढ़ावा दिया जा सके.
2050 तक बिजली की जरूरत पूरी करने की संभावना
केंद्रीय नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्री प्रह्लाद जोशी ने कहा कि यदि खेती की जमीन के केवल 10 फीसदी हिस्से में भी यह तकनीक अपनाई जाए, तो वर्ष 2050 तक देश की अनुमानित बिजली जरूरत पूरी करने में बड़ा योगदान मिल सकता है.
पीएम कुसुम योजना से जुड़ेगा अगला कदम
जानकारी के अनुसार पीएम कुसुम योजना के तहत अब तक 30 लाख कृषि पंपों को सौर ऊर्जा से जोड़ा जा चुका है. सरकार इस योजना के अगले चरण में एग्रीवोल्टाइक को बड़े स्तर पर बढ़ावा देने की तैयारी कर रही है. इससे किसानों को सिंचाई के लिए सौर बिजली उपलब्ध कराने के साथ खेतों में बिजली उत्पादन की संभावनाएं भी बढ़ सकती हैं. अध्ययन के आधार पर इस क्षेत्र में करीब 3.32 लाख पूर्णकालिक स्थानीय रोजगार पैदा होने का अनुमान भी जताया गया है.
किसान के लिए क्या है जरूरी?
फिलहाल इस तकनीक को बड़े स्तर पर अपनाने के लिए व्यावहारिक नीति और स्पष्ट नियम जरूरी हैं. छोटे किसानों को ध्यान में रख कर योजना बनाई जाती है, तो खेत से अनाज के साथ बिजली पैदा करने का यह तरीका ग्रामीण आमदनी बढ़ाने में मददगार हो सकता है.





