“ मेहनती किसान, मेरे देश की है शान,
मान जिनका है ऊँचा आसमान से,
मिलिएं आज देश के किसान से…”Padma Award 2026

चुपचाप खेतों, प्रयोगशालाओं, गांवों और जंगलों में देश की नींव मजबूत करते रहें किसान, न कोई मंच, न सुर्खियां, न प्रचार—सिर्फ मेहनत, नवाचार और समाज के लिए समर्पण. किसे पता था कि एक दिन इन चेहरों को मिलेगा राष्ट्रीय सम्मान. किसानों के लिए एक सपने के पूरे होने का दिन था इस बार का गणतंत्र दिवस…

गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर घोषित की गई पद्म पुरस्कारों की सूची और खेतों को अपनी मेहनत से सजाते किसान बन गए राष्ट्रीय चेहरा. पद्म पुरस्कार 2026 ने किसानों और कृषि वैज्ञानिकों को ऐतिहासिक पहचान दी है.

कुल 131 पद्म पुरस्कारों में से कृषि, पशुपालन और पर्यावरण से जुड़े 9 व्यक्तित्वों को सम्मानित किया गया है, जिनमें 4 प्रगतिशील किसान और 5 प्रख्यात कृषि वैज्ञानिक शामिल हैं. यह सम्मान केवल व्यक्तियों का नहीं, बल्कि भारत की खेती-किसानी, ग्रामीण अर्थव्यवस्था और आत्मनिर्भरता की सोच का सम्मान है. खेत- खलिहान से राष्ट्रपति भवन तक खेती के नवाचारों ने कैसे तय किया सफ़र, पढ़ें इस लेख में –

पद्म पुरस्कार: मौन साधकों को राष्ट्रीय नमन

पद्म पुरस्कार भारत के सर्वोच्च नागरिक सम्मानों में गिने जाते हैं. ये उन लोगों को दिए जाते हैं जिन्होंने कृषि, विज्ञान, समाज सेवा, पर्यावरण, शिक्षा और चिकित्सा जैसे क्षेत्रों में असाधारण योगदान दिया हो. Padma Award 2026

2026 में घोषित पुरस्कारों में शामिल हैं-
• 5 पद्म विभूषण
• 13 पद्म भूषण
• 113 पद्म श्री
इस सूची में 19 महिलाएं और 16 मरणोपरांत सम्मान भी शामिल हैं, जो इस बात का संकेत है कि समाज के हर वर्ग और हर योगदान को पहचान देने की कोशिश की गई है.

अन्नदाता : फसलों-सी लहरा रही हैं जिनकी प्रेरक कहानियां

रघुपत सिंह : बीजों के सच्चे संरक्षक

उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद के प्रगतिशील किसान रघुपत सिंह को मरणोपरांत पद्म श्री सम्मान दिया गया. उन्होंने 50 वर्षों में 55 से अधिक विलुप्त सब्जी किस्मों को संरक्षित किया और बिना किसी सरकारी सहायता के करीब 100 नई किस्में विकसित कीं. उनका जीवन इस बात का प्रमाण है कि ज्ञान और जिज्ञासा सीमाओं की मोहताज नहीं होती.

जोगेश देउरी : रेशम से रोज़गार तक Padam Award 2026 

असम के रहने वाले जोगेश देउरी ने असम के मूंगा और एरी रेशम को नई पहचान दी.
उन्होंने पारंपरिक रेशम कीट पालन को आधुनिक तकनीक से जोड़ा, जिससे हजारों ग्रामीण और आदिवासी परिवारों की आय बढ़ी. खास बात यह है कि उनके मॉडल में महिलाओं की भागीदारी 70% से अधिक है.

श्रीरंग देवाबा लाड : कपास की खेती में क्रांति

महाराष्ट्र के किसान श्रीरंग देवाबा लाड ने “दादा लाड कॉटन टेक्नोलॉजी” विकसित की, जिससे कपास की पैदावार 300% तक बढ़ी. 78 वर्ष की उम्र में भी वे गांव-गांव जाकर किसानों को सिखा रहे हैं कि कम लागत में ज्यादा उत्पादन कैसे संभव है.

रामा रेड्डी मामिडी : सहकारिता के स्तंभ

मरणोपरांत सम्मानित रामा रेड्डी मामिडी, तेलंगाना ने डेयरी और पशुपालन में सहकारी मॉडल को मजबूत किया. उन्होंने महिला डेयरी सहकारी समितियों को बढ़ावा देकर ग्रामीण महिलाओं को आर्थिक आत्मनिर्भरता दी और किसानों को कानूनी अधिकारों से जोड़ा.

पर्यावरण की मूक साधिका: देवकी अम्मा

केरल की देवकी अम्मा ने चलने-फिरने में असमर्थ होने के बावजूद 5 एकड़ में निजी जंगल विकसित किया. उनका जीवन संदेश देता है कि पर्यावरण संरक्षण किसी पद या संसाधन का मोहताज नहीं, सिर्फ संकल्प चाहिए.

यह सम्मान क्या संदेश देता है?

पद्म पुरस्कार 2026 ने यह साफ कर दिया है कि भारत का भविष्य सिर्फ शहरों और स्टार्टअप्स में नहीं, बल्कि खेतों, गांवों और प्रयोगशालाओं में भी लिखा जा रहा है. यह सम्मान उन लाखों किसानों और वैज्ञानिकों के लिए प्रेरणा है जो आज भी बिना सुर्खियों के देश को आगे बढ़ा रहे हैं. Padma Award 2026

भारत की असली ताकत

खेतों में नया इतिहास लिखने वाले धरती पुत्रों और वैज्ञानिकों की कहानियां बताती हैं कि खेती घाटे का सौदा नहीं, बल्कि ज्ञान, नवाचार और समर्पण से भरा अवसर है. पद्म पुरस्कार 2026 सिर्फ सम्मान नहीं, बल्कि एक संदेश है कि – “भारत अपने अन्नदाता को पहचान रहा है.”

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