कृषि मेले व प्रशिक्षण कार्यक्रम में मिलती है नई तकनीकों (New Technologies) की जानकारी

चिड़ावा (झुंझुनूं) : 1 मार्च, 2023. रामकृष्ण जयदयाल डालमिया सेवा संस्थान द्वारा आज संस्थान के खेलकूद परिसर में विशाल कृषि मेले का आयोजन हुआ, जिस में क्षेत्र के किसान, किसान महिलाएं, कृषि विषय का अध्ययन करने वाले छात्रछात्राएं, पशुपालकों सहित प्रगतिशील किसानों ने भाग लिया. मेले में विभिन्न कंपनियों एंव सरकारी विभागों द्वारा लगाई गई कृषि आदानों, उपकरणों, नवीन कृषि यंत्रों, जैविक उत्पादों, जल संरक्षण सहित अन्य उपयोगी जानकारीपरक 35 स्टाल लगाए.

मेले में कृषि विशेषज्ञों द्वारा कृषि उत्पादन को बढ़ाने, परंपरागत खेती के स्थान पर अधिक आय देने वाली फसलों की बोआई करने, भोजन में मिलेट्स का उपयोग बढ़ाने जैसी जानकारी दी गई.

कृषि मेले के उद्घाटन सत्र में मुख्य अतिथि के रूप में बोलते हुए कृषि विश्वविद्यालय, जोबनेर (जयपुर) के पूर्व कुलपति डा. प्रवीण सिंह राठौड़ ने कहा कि किसानों को अब जमीन के घटते क्षेत्रफल और गिरते भूजल स्तर पर विशेष ध्यान देना होगा. उन्होंने बताया कि निरंतर उवर्रकों के उपयोग से भूमि की गुणवत्ता एवं पोषक तत्वों की उपलब्धता में निरंतर गिरावट आ रही है. इसी प्रकार अधिक सिंचाई वाली फसलों की बोआई के कारण भूजल स्तर भी गिरता जा रहा है. राजस्थान के 216 ब्लौक ओवर एक्सप्लौटेड हो गए हैं.

यदि यही स्थिति रही तो सिंचाई के लिए दूर पेयजल के लिए हमें पानी की तलाश करनी होगी. उन्होंने सुझाव दिया कि किसानों को संतुलित उर्वरा प्रबंधन पर ध्यान देना होगा.

कायर्क्रम की अध्यक्षता करते हुए प्रवासी उद्योगपति एंव ट्रस्टी रघुहरि डालमिया ने कहा कि देश को ऐसे किसानों की आवश्यकता है, जो देश की प्रगति में सहभागी बनें. किसानों ने जमीन को आबाद कर हम सब को भोजन के लिए अन्न उपलब्ध करवा कर अपनी महत्वपूर्ण भूमिका प्रस्तुत की है.

उन्होंने मेले में आए किसानों से आग्रह किया कि वे मेेले में प्रदर्शित की गई नवीन तकनीकों के उपकरणों, जानकारी व अनुसंधानों के ज्ञान को कृषि उपज बढ़ाने में साझा करें.

उन्होंने यह भी कहा कि कृषि विद्यालय अथवा महाविद्यालय से आने वाले छात्रछात्राएं संस्थान द्वारा वर्षा जल संरक्षण, वृक्षारोपण व कृषि उत्पादन बढ़ाने के लिए अपनाई जा रही पद्धतियों का किसी भी दिन आ कर अवलोकन कर सकते हैं.

कृषि मेले में उद्यान विभाग झुंझुनूं के उपनिदेशक डा. शीशराम जाखड़ ने परंपरागत खेती के स्थान पर अधिक आय देने वाली नकदी फसलों की बोआई करने, बागान लगाने, परंपरागत सिंचाई पद्धति के स्थान पर फव्वारा, मिनी फव्वारा आदि पद्धतियों का उपयोग करने का सुझाव दिया.

पयार्वरण विकास एंव अध्ययन केंद्र के निदेशक डा. मनोहर सिंह राठौड़ ने किसानों को एकजुट होने व जागरूक हो कर खेती करने का सुझाव दिया.

स्वामी केशवानंद विश्वविद्यालय, बीकानेर के पूर्व निदेशक डा. हनुमान प्रसाद ने रामकृष्ण जयदयाल डालमिया सेवा संस्थान द्वारा वर्षा जल संरक्षण सहित किसानों की आर्थिक समृद्धि के लिए चलाई जा रही कायर्क्रमों की सराहना की और कहा कि वर्षा जल की उपलब्धि को देखते हुए हमें कम पानी के उपयोग वाली फसलों की बोआई करनी होगी.

किसान आयोग के सदस्य ओपी खेदड़ ने कहा कि मिलेट्स की पौष्टिकता को देखते हुए हमें इस का उपयोग बढ़ाना होगा. प्रगतिशील किसान मुकेश मांजू ने भी अपने विचार रखे.

मेले में प्रगतिशील किसानों के रूप में विद्याधर, सवाई सिंह, सुरेश, लालचंद, कुंजबिहारी को, ग्राम विकास समिति के लिए मालुपुरा की ग्राम जलग्रहण समिति को, पयार्वरण मित्र के रूप में राकेश बराला को और जलयोद्धा के रूप में रोहिताश बराला को प्रमाणपत्र व प्रतीक चिन्ह दे कर सम्मानित किया.

प्रारंभ में संस्थान के परियोजना प्रबंधक भूपेंद्र पालीवाल ने अतिथियों का स्वागत किया और संस्थान की प्रगति पर प्रकाश डाला. कार्यक्रम का संचालन मोनिका स्वामी द्वारा किया गया.

इस अवसर पर संस्थान के जल संसाधन समन्वयक संजय शर्मा, कृषि समन्वयक शुबेंद्र भट्ट, प्रशासनिक अधिकारी कुलदीप कुल्हार, अजय बलवदा, राकेश महला, सूरजभान रायला, नरेश, बलवान सिंह, अनिल सैनी, मान सिंह, जितेंद्र एवं सुनील उपस्थित रहे.

लुवास में पशु चिकित्सा कार्यशाला (Veterinary Workshop)

हिसार: लाला लाजपत राय पशु चिकित्सा एवं पशु विज्ञान विश्वविद्यालय के पशु चिकित्सा नैदानिक परिसर में आयोजित पशुओं की बीमारियों के डायग्नोस्टिक चिकित्सा में इमेजिंग तकनीकों के विषय में तीनदिवसीय राष्ट्रीय कार्यशाला एवं प्रशिक्षण के समापन समारोह के अवसर पर विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. (डा.) विनोद कुमार वर्मा बतौर मुख्य अतिथि शामिल हुए.

इस अवसर पर कुलपति डा. विनोद कुमार वर्मा ने अपने संबोधन में कहा कि इस प्रशिक्षण कार्यक्रम के दौरान प्रतिभागियों द्वारा दिया गया समय भविष्य में उन के लिए अत्यंत लाभदायक रहेगा.

उन्होंने प्रतिभागियों को सिखाई गई तकनीकों व विधियों का इस्तेमाल अपने कार्यक्षेत्र में करने के लिए प्रेरित किया.

कुलपति डा. विनोद कुमार वर्मा ने बताया कि लुवास विश्वविद्यालय द्वारा भविष्य में इसी तरह की और भी राष्ट्रीय स्तरीय कार्यशालाएं करवाई जाएंगी, जिस से पशु चिकित्सकों, स्नातकोत्तर छात्रों इत्यादि को उन के विषय में हुए आधुनिक विकास से संबंधित जानकारी व व्यक्तिगत प्रशिक्षण दिया जाएगा.

इस अवसर पर मुख्य अतिथि द्वारा प्रतिभागियों को प्रमाणपत्र भी वितरित किए गए. उन्होंने पशु चिकित्सा विभाग के प्रशिक्षकों एवं कर्मचारियों को कार्यशाला के सफलतापूर्वक समापन पर बधाई दी.

अनुसंधान निदेशक डा. नरेश जिंदल, कुलसचिव डा. सुरेंद्र सिंह ढाका, स्नातकोत्तर अधिष्ठाता डा. मनोज रोज, छात्र कल्याण निदेशक डा. पवन कुमार और विभिन्न विभागों के विभागाध्यक्ष भी इस अवसर पर मौजूद थे.

प्रशिक्षण के बारे में जानकारी देते हुए पशु चिकित्सा विभाग के विभागाध्यक्ष और इस प्रशिक्षण कार्यशाला के निदेशक डा. ज्ञान सिंह ने बताया कि इस तीनदिवसीय राष्ट्रीय प्रशिक्षण कार्यशाला में देशभर के विभिन्न संस्थानों से 12 प्रतिभागियों ने भाग लिया. इन दौरान उन्हें पशु इमेजिंग तकनीकों में व्यावहारिक प्रशिक्षण के अलावा प्रतिदिन प्रैक्टिकल ट्रेनिंग भी दी गई.

पशुधन ( Livestock) को मिलेंगी शीघ्र उत्कृष्ट चिकित्सकीय सेवाएं

जयपुर: मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने कहा कि स्वस्थ पशुधन के लिए राज्य सरकार संकल्पबद्ध है. इसी क्रम में सरकार ने हेल्पलाइन नंबर 1962 की शुरुआत की है. इस के माध्यम से पशुओं को शीघ्र चिकित्सकीय सेवाएं उपलब्ध हांेगी और प्रदेश के पशुपालक समृद्ध होंगे.

मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ओटीएस स्थित मुख्यमंत्री निवास पर मोबाइल वेटरनरी इकाइयों के लोकार्पण पर आयोजित समारोह में भाग ले रहे थे. उन्होंने 21 मोबाइल वेटरनरी इकाइयों को हरी झंडी दिखा कर रवाना किया. इस के अतिरिक्त प्रदेश में जिला स्तर पर आयोजित समारोहों में 159 इकाइयों का लोकार्पण भी किया गया.

इस मौके पर मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने कहा कि प्रत्येक एक लाख पशुओं पर एक मोबाइल वेटरनरी यूनिट काम करेगी. उन्होंने यह भी कहा कि इस योजना के अंतर्गत राज्य स्तरीय काल सैंटर की स्थापना भी की जाएगी, जो पशुओं के सामान्य रोगों के उपचार के लिए टैलीमैडिसन व्यवस्था एवं पशु प्रबंधन, पोषण आदि के लिए सलाह भी देगा. काल सैंटर के माध्यम से पशुओं का आपात स्थिति में प्राथमिकता से उपचार सुनिश्चित हो सकेगा.

मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने कहा कि हमारी सरकार किसान कल्याण एवं पशुपालकों के हित में दूरगामी निर्णय कर रही है. सरकार ने अपने पहले बजट में ही गौवंश संरक्षण के लिए शैड, खेली का निर्माण और दुग्ध, चारा, बांटा संबंधी उपकरण खरीदने के लिए गोपाल क्रेडिट कार्ड योजना के अंतर्गत एक लाख रुपए तक ब्याजमुक्त ऋण उपलब्ध कराने की महत्वपूर्ण घोषणा की है.

1,600 तकनीकी व्यक्तियों को मिलेगा रोजगार

मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने कहा कि प्रत्येक ब्लौक में मोबाइल वेटरनरी इकाइयों द्वारा पशु चिकित्सा शिविरों का आयोजन कर पशुपालकों को लाभान्वित किया जाएगा. प्रत्येक ब्लौक में एक मोबाइल वेटरनरी यूनिट के लिए एक पशु डाक्टर, एक तकनीकी पशु चिकित्सा कर्मचारी एवं एक ड्राइवर कम पशु परिचारक होंगे. इस से तकरीबन 1600 तकनीकी व्यक्तियों को रोजगार मिलेगा.

आईसीएआर (ICAR) सोसायटी की 95वीं वार्षिक आम बैठक

नई दिल्ली: 28 फरवरी 2024, भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) सोसायटी की 95वीं वार्षिक आम बैठक केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण और जनजातीय कार्य मंत्री अर्जुन मुंडा की अध्यक्षता में हुई. केंद्रीय मंत्री डा. जितेंद्र सिंह व श्री कैलाश चैधरी, उत्तर प्रदेश के पशुपालन एवं डेयरी मंत्री धर्मपाल सिंह, नागालैंड के कृषि मंत्री माथुंग यंथन एवं आईसीएआर के महानिदेशक डा. हिमांशु पाठक भी मौजूद थे.

बैठक में केंद्रीय मंत्री अर्जुन मुंडा ने कहा कि आईसीएआर ने देश को भूख व कुपोषण से निकाल कर स्वस्थ कृषि उत्पादन की ओर ले जाने की दिशा में कृषि क्षेत्र में नवाचार का नेतृत्व किया है. पिछली बैठक में 46 से अधिक सुझाव आए थे, जिन सभी पर आईसीएआर ने काम पूरा किया है.

उन्होंने आगे कहा कि यह प्रधानमंत्री मोदी के कुशल नेतृत्व में केंद्र सरकार की उपलब्धि का ही नतीजा है कि विश्व में सर्वाधिक आबादी होने के बावजूद भारत में 80 करोड़ से ज्यादा लोगों को केंद्र द्वारा मुफ्त अनाज दिया जा रहा है. कई उपलब्धियों के बावजूद भी कुछ चुनौतियां हैं, जिन का समाधान तलाशते हुए हमें अपने लक्ष्य की ओर निरंतर बढना है. प्रधानमंत्री मोदी के मार्गदर्शन में कृषि, किसान को समृद्ध बनाते हुए देश को आगे बढ़ाने का काम सुनिश्चित किया जा रहा है. साथ ही, कृषि संबद्ध क्षेत्रों, पशुपालन, मत्स्यपालन, मुधमक्खीपालन आदि को भी प्रोत्साहित किया जा रहा है.

आईसीएआर (ICAR)

हमें जलवायु परिवर्तन, मृदा क्षरण जैसी चुनौतियों के समाधान की दिशा में तेजी से काम करते हुए किसानों की उन्नति का रास्ता साफ करना है. खुशी की बात है कि इस में आईसीएआर महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है. आईसीएआर ने साल 2005 से 2014 के दौरान जहां अधिक पैदावार देने वाली 1,225 फसल किस्में जारी की गई थीं, वहीं 2014 से 2023 के दौरान 2,279 ऐसी किस्में जारी की गई हैं, जो लगभग दोगुना है.

अब ध्यान पौषणिक सुरक्षा पर है, इस के लिए जैव प्रबलित किस्मों के विकास पर ध्यान केंद्रित किया जा रहा है. इस दिशा में प्रभावी ढंग से आगे बढ़ने के लिए बैठक में आने वाले सुझाव काफी मददगार होंगे.
मंत्री अर्जुन मुंडा ने यह भी कहा कि मानव समाज के लिए, कृषि क्षेत्र की प्रगति के बिना किसी और क्षेत्र की प्रगति नहीं हो सकती है.

इस का संतुलन बना कर व तमाम चुनौतियों का सही आंकलन कर उस का निराकरण करते हुए बेहतर परिणाम देने का प्रयास होना चाहिए. सुदूर क्षेत्र में रहने वाले छोटे से छोटे किसान में आत्मस्वावलंबन हो, उन की प्रगति हो, कृषि उत्पादन बढ़े और हर दृष्टि से आत्मनिर्भरता हो, इस की कोशिश होनी चाहिए. इस दिशा में हम सब को मिल कर विचार करते हुए काम करने की जरूरत है, ताकि आने वाले दिनों में लक्ष्य हासिल करें और जो संकल्प लिया है, उसे पूरा कर सकें.

उन्होंने ने आईसीएआर के प्रकाशन व 22 फसलों की 24 किस्में जारी कीं, जिन में धान, गेहूं, मक्का, सावां, रागी, सरसों, सोयाबीन, सूरजमुखी, चना, अरहर, मसूर, मोठ, जूट, टमाटर, भिंडी, चैलाई, सेम, खीरा, मटर, आलू, मशरूम, अमरूद हैं. डीजी डा. हिमांशु पाठक ने आईसीएआर की उपलब्धियों पर रिपोर्ट पेश की.

कौशल विकास (Skill Development) हेतु किसानों को ट्रेनिंग

अविकानगर : केंद्रीय भेड़ एवं ऊन अनुसंधान संस्थान अविकानगर में मानव संसाधन विकास विभाग (एचआरडी) द्वारा 4 राज्यों (राजस्थान, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र) के 40 से ज्यादा पशुपालक किसानो के बैच को भेड़बकरी एवं खरगोशपालन पर 8 दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम अविकानगर में आयोजित किया गया.

प्रशिक्षण कार्यक्रम की अध्यक्षता डा. अरुण कुमार तोमर, निदेशक द्वारा की गई. इस मौके पर उन्होंने सभी प्रशिक्षणार्थियों को संबोधित करते हुए बताया कि इस प्रशिक्षण का उद्देश्य आप के पशुपालन जैसे भेड़, बकरी, खरगोश आदि के ज्ञान में वैज्ञानिक तरीके से पालन को बढ़ावा देना है. इसलिए सभी वैज्ञानिकों द्वारा बताई गई बातों को सुन कर अंत में अपने सवालजवाब करने हैं, जिस से सारी शंकाओं का समाधान किया जा सके.

उन्होंने कहा कि संस्थान के वैज्ञानिक आप को पशुपालन के विभिन्न पहलुओं को कवर करेंगे, फिर भी कोई सवाल रहे तो समापन कार्यक्रम में विस्तार से चर्चा कर के दूर करने की कोशिश टीम द्वारा की जाएगी.

अविकानगर में प्रशिक्षण कार्यक्रम के समन्वय डा. सुरेश चंद शर्मा, प्रभारी, एचआरडी, प्रभारी तकनीकी स्थानांतरण विभाग डा. लीलाराम गुर्जर व प्रभारी पीआरओ सेल डा. अमर सिंह मीना द्वारा किया जा रहा है. इस दौरान पशु पोषण विभाग के अध्यक्ष डा. रणधीर सिंह भट्ट, पशु स्वास्थ्य विभाग के अध्यक्ष डा. गणेश सोनावाणे, प्रभारी ऊन विभाग डा. अजय कुमार, मुख्य प्रशासनिक अधिकारी इंद्रभूषण कुमार उपस्थित रहे.

इस मौके पर निदेशक के मार्गदर्शन में सभी किसानों का परिचय करते हुए उन की खेती और पशुपालन के बारे में जानकारी लेते हुए उन की समस्या पर चर्चा अपनी टीम के साथ की गई. निदेशक द्वारा सभी किसानों को छोटे स्तर से पशुपालन की शुरुआत करने का सुझाव दिया गया.

नस्ल सुधार के लिए वैज्ञानिक तरीके से भेड़पालन (Sheep Rearing)

अविकानगर : केंद्रीय भेड़ एवं ऊन अनुसंधान संस्थान, अविकानगर में मालपुरा भेड़ के सैक्टर मालपुरा परियोजना के एनडब्बूपीएसआई की एससीएसपी उपयोजना के अंतर्गत मालपुरा तहसील के 11 गांवों (सदरपुरा, चौरूपुरा, धोली, खेड़ा, भीपुर, कैरवालिया, लावा, डिग्गी नुक्कड़, लक्ष्मीपूरा, अजमेरी एवं चांदसेन) एवं पीपलू तहसील के ज्वाली गांव आदि के 20 अनुसूचित जाति के किसानों को मालपुरा भेड़ों में नस्ल सुधार हेतु वैज्ञानिक भेड़पालन पर पांचदिवसीय (19 से 23 फरवरी, 2024) प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया गया.

प्रशिक्षण कार्यक्रम का समापन मुख्य अथिति डा. जीके गौड़, सहायक महानिदेशक, पशु उत्पादन एवं प्रजनन, भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद, नई दिल्ली, कार्यक्रम के अध्यक्ष व निदेशक डा. अरुण कुमार तोमर,प्रधान वैज्ञानिक डा. आरसी शर्मा, विभाग अध्यक्ष डा. एसएस मिश्रा, मुख्य प्रशासनिक अधिकारी इंद्रभूषण कुमार, मुख्य वित्त एवं लेखा अधिकारी राजकुमार एवं मालपुरा परियोजना के पीआई डा. पीके मलिक की मौजूदगी में किया गया.

मुख्य अथिति डा. जीके गौड़ द्वारा अपने संबोधन में सभी किसानों को वैज्ञानिक तरीके से भेड़पालन करने के लिए विभिन्न उदाहरणों से संबोधित किया.

उन्होंने आगे बताया कि भारत सरकार गांवों के किसानों को आधुनिक खेती और पशुपालन के माध्यम से ही विकसित भारत के सपने को पूरा करने के लिए हर रोज नई स्कीमें लागू कर रही है, जिस से गांवों में भी सभी तरह के संसाधनों का विकास हो.

उन्होंने यह भी बताया कि स्वच्छ वातावरण में पाला जाने वाला पशु ही सब से अच्छा मांस और उत्पाद देता है. यह वैज्ञानिक तरीके से पशुपालन करने से ही संभव है.

भेड़पालन (Sheep Rearing)

अंत मे उन्होंने कहा कि आप के उत्थान के लिए ही हम लोग काम कर रहे हैं, इसलिए आप की आर्थिक उन्नति होने पर ही हमारे कामों की सार्थकता है.

निदेशक डा. अरुण कुमार द्वारा किसानों को भेड़पालन पर उन की समस्या को सुनते हुए अपनी टीम के साथ उपयुक्त सुझाव दिया और निवेदन किया कि भेड़पालन के लिए वैज्ञानिक तरीका और मालपुरा भेड़, सिरोही नस्ल के अच्छे पशु ही पालना चाहिए, जिस से आप को अच्छा मुनाफा मिले, क्योंकि इस वातावरण मे ये पशु सर्वोत्तम है. आने वाले समय में आप का क्षेत्र मालपुरा भेड़ के उत्तम पशुओं का अन्य क्षेत्र के किसानों के लिए अच्छा पशु मिलने का केंद्र बनेगा .

उन्होंने बताया कि अभी संस्थान के पास किसानों की बहुत मांग है और आप के सहयोग के बिना मेरा संस्थान पूर्ति नहीं कर सकता.

पशु आनुवांशिकी एवं प्रजनन विभाग के अध्यक्ष डा. एसएस मिश्रा एवं मालपुरा परियोजना एनडब्लूपीएसआई के प्रधान अन्वेषक डा. पीके मलिक द्वारा समापन कार्यक्रम में पधारे अथितियों का स्वागत करते हुए परियोजना और विभाग द्वारा किए जा रहे प्रयास पर प्रकाश डालते हुए किसानों को संस्थान की बातों का प्रसार अन्य को करने का भी निवेदन किया.

कार्यक्रम के अथितियों द्वारा सभी किसानों को प्रशिक्षण प्रमाणपत्र के साथ चारा ट्राफ, लोहे की जाली, पशुपालन से जुड़े आवश्यक सामान का वितरण किया गया.

कार्यक्रम में एजीबी विभाग के वैज्ञानिक डा. नागराजन, डा. राजीव कुमार, डा. एसएमके थिरूमरान, डा. सरवणे, अमर सिंह मीना, योगीराज के साथ परियोजना की फील्ड में काम कर रहे कर्मचारी भी उपस्थित रहे.

पशुधन विभाग में मिलेगा सवा लाख लोगों को रोजगार

लखनऊ: उत्तर प्रदेश के पशुधन एवं दुग्ध विकास मंत्री धर्मपाल सिंह ने कहा कि राजधानी लखनऊ में आयोजित ग्राउंड ब्रेकिंग सेरेमनी के तहत पशुधन विभाग में 2,131.65 करोड़ रुपए की 532 निवेश परियोजनाओं की आधारशिला रखी गई. इन परियोजनाओं के मूर्तरूप लेने से 1,23,167 लोगों को रोजगार प्राप्त होगा.

उन्होंने जानकारी देते हुए कहा कि सेरेमनी में 1250 करोड़ रुपए की परियोजनाओं के आधारशिला का लक्ष्य था, जिस के सापेक्ष 180 फीसदी ज्यादा सफलता प्राप्त हुई है.

मंत्री धर्मपाल सिंह विधानसभा भवन स्थित अपने कार्यालय कक्ष में ग्राउंड ब्रेकिंग सेरेमनी के अंतर्गत पशुधन एवं दुग्ध विकास विभाग की निवेश परियोजनाओं की समीक्षा कर रहे थे. उन्होंने कहा कि 532 निवेशक परियोजनाओं में से अयोध्या मंडल में सर्वाधिक 111 परियोजनाओं की आधारशिला रखी गई है. क्षेत्रवार इन्वेस्ट उत्तर प्रदेश के अंतर्गत जेबीसी में पूर्वांचल में 229, मध्यांचल में 145, पश्चिमांचल में 114 और बुंदेलखंड में 44 निवेशकों द्वारा विशेष रुचि दिखाई गई है.

उन्होंने आगे बताया कि एनीमल हसबेंडरी इन्फ्रास्ट्रक्चर डवलपमैंट फंड, पोल्ट्री सैक्टर और नेशनल लाइव स्टाक मिशन के क्षेत्र में निवेश किया गया है. साथ ही, उत्तर प्रदेश में ब्रीडिंग फाम्र्स के प्रति निवेशकों द्वारा विशेष आकर्षण दिखाया गया है, जिस से प्रदेश में उन्नत नस्ल व प्रजाति के दुधारू पशु प्राप्त होंगे, इस से दुग्ध उत्पादन के क्षेत्र में तीव्र वृद्धि होगी और किसानों एवं पशुपालकों की आय बढ़ेगी.

प्रदेश के पशुधन एवं दुग्ध विकास मंत्री धर्मपाल सिंह ने कहा कि डेयरी क्षेत्र में 10,021.66 करोड़ रुपए की 253 परियोजनाओं की आधारशिला रखी गई. परियोजनाओं के पूरे होने पर 25,338 लोगों को रोजगार मिलेगा. उन्होंने कहा कि बरेली में सर्वाधिक 1,002 करोड़ रुपए का निवेश हुआ है, जो ऐतिहासिक है.

इसी तरह बागपत जिले में 800 करोड़ रुपए का निवेश उल्लेखनीय उपलब्धि है. इन के अलावा जनपद में बाराबंकी में 600 करोड़ रुपए, हापुड़ में 502 करोड़ रुपए, मेरठ में 450 करोड़ रुपए, बुलंदशहर में 422.70 करोड़ रुपए, कानपुर देहात में 410 करोड़ रुपए और शाहजहांपुर में 300 करोड़ रुपए का निवेश किया जा रहा है.

मंत्री धर्मपाल सिंह ने यह भी कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के कुशल नेतृत्व में प्रदेश की कानून व्यवस्था सुदृढ़ हुई है, जिस से निवेशकों का विश्वास बढ़ा है. इसी का परिणाम है कि आज उत्तर प्रदेश में बड़ी तादाद में निवेश हो रहा है. प्रदेश को 01 ट्रिलियन डालर इकोनौमी बनाए जाने एवं आत्मनिर्भर भारत की परिकल्पना को साकार करने में जीबीसी का महत्वपूर्ण योगदान है. उन्होंने लक्ष्य से अधिक निवेश प्राप्त करने के लिए विभाग के अधिकारियों की प्रसंशा की और उन्हें प्रोत्साहित किया.

इस अवसर पर पशुधन एवं दुग्ध विकास विभाग के अपर मुख्य सचिव डा. रजनीश दुबे ने कहा कि पशुधन मंत्री के मार्गदर्शन में दुग्ध उत्पादन के साथसाथ पशुपालन के क्षेत्र में विभिन्न कल्याणकारी कार्यक्रम क्रियान्वित किए जा रहे हैं, जिस से किसानों एवं पशुपालकों की आय बढ़ रही है. प्रदेश में पशुधन एवं डेयरी क्षेत्र में अपार नई संभावनाएं हैं, जिस से निवेशक आकर्षित हो रहे हैं.

उन्होंने आगे यह भी कहा कि उत्तर प्रदेश दुग्ध नीति-2022 के तहत निवेशकों के लिए महत्वपूर्ण प्रावधान किए गए हैं, जिस से डेयरी सैक्टर में अधिकाधिक लाभ सुनिश्चित किया जाना संभव हो रहा है और उस में निहित व्यावसायिक लाभों की जानकारी किसानों और पशुपालकों को भी मिल रही है.

बैठक में पशुधन विभाग के विशेष सचिव देवेंद्र पांडेय, अमर नाथ उपाध्याय, रिाम सहाय यादव, दुग्ध आयुक्त शशिभूषण लाल सुशील, पीसीडीएफ के प्रबंध निदेशक आनंद कुमार, निदेशक पशुपालन सहित शासन के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे.

मिल्किंग मशीन (Milking Machine) : दुधारू पशुओं से दूध दुहने का खास यंत्र

मिल्किंग मशीन (Milking Machine) किसानों के लिए एक ऐसी खास मशीन है, जो घरेलू पशुपालन और डेयरी फार्मिंग के लिए बहुत ही उपयुक्त है. इस के इस्तेमाल से पशुओं से साफसुथरा दूध निकाला जाता है. इस में समय भी कम लगता है और पशु को भी सुविधा रहती है.

आज भी दूरदराज के इलाकों में बहुत से पशुपालक ऐसे हैं, जो मिल्किंग मशीन के बारे में ज्यादा कुछ नहीं जानते हैं. ये मशीनें बिजली, बैटरी आदि की मदद से चलती हैं. इन में इलैक्ट्रिक मीटर लगा होता है.

दूध दुहने वाली मशीनों में चिकनाई वाले वैक्यूम पंप होते हैं, जो वैक्यूम पैदा करते हैं और दूध निकलने की प्रक्रिया को आगे बढ़ाते हैं. और फिर दूध निकलता हुआ स्टील की बालटियों में इकट्ठा होता जाता है.

यहां ऐसी ही एक कंपनी की मशीन के बारे में जानकारी दी गई है, जो पशुपालकों के लिए काफी लाभदायक साबित हो सकती है.

वैनसन मिल्किंग मशीन

Milking Machine

वैनसन पशुओं का दूध दुहने की मशीन बनाने वाली कंपनी है, जो कि देश के अलगअलग राज्यों में और अनेक पशुपालन के क्षेत्र में काम कर रही है. हजारों पशुपालकों तक पहुंच बनाने वाली इस मिल्किंग मशीन में मौडर्न तकनीक इस्तेमाल की गई है.

मशीन से दूध दुहना प्राकृतिक दूध दुहने जैसा

मिल्किंग मशीन की खूबी है कि दूध दुहते समय दुधारू पशु को ऐसा ही महसूस होता है जैसे कि उस का बछड़ा दूध पी रहा हो. इस से पशु को कोई परेशानी नहीं होती और वह आराम से दूध दुहने देती है.

मशीन से दूध दुहने के फायदे

सब से पहला फायदा तो यही है कि दूध पूरी तरह से साफ व सुरक्षित निकलता है. दूध दुहने में समय भी कम लगता है. अगर हम यही काम पुराने तरीके से करें, तो दूध में पशु के बाल, कचरा, गोबर आदि के कण गिर जाते हैं.

कई दफा पशुपालक दूध निकालते समय खांसताछींकता भी है या हाथ साफ नहीं है आदि अनेक बातें हैं. इस से दूध खराब हो सकता है, जबकि मिल्किंग मशीन से दूध दुहने पर ऐसा नहीं होता.

दूध उत्पादन भी बढ़ता है और पशु के थन भी पूरी तरह से स्वस्थ रहते हैं. दूध पशु के थनों से पाइपों के जरीए सीधा स्टील के बंद डब्बों में पहुंचता है.

भैसों का दूध दुहने के लिए खास

Milking Machine

 

ज्यादातर पशुपालक मिल्किंग मशीन का इस्तेमाल गाय का दूध निकालने में करते हैं, क्योंकि इस मशीन की प्राथमिकता गाय के दूध को निकालने की होती है.

अगर भैंस का दूध निकालने के लिए इस मशीन का इस्तेमाल करना है, तो इस में मामूली बदलाव की जरूरत होती है. भैंस का दूध निकालने के लिए मिल्किंग मशीन में खास तरह के ‘बबुलस लाइनर’ का उपयोग किया जाता है, इसलिए इस की जानकारी बेहद जरूरी है.

बकेट मिल्किंग मशीन

* दूध निकालने में कम समय और उत्तम क्वालिटी का दूध.

* उपयोग करने में आसान और कम रखरखाव.

* 5 से 50 पशुओं के फार्म के लिए उपयोगी.

उपलब्ध मौडल : इस में अनेक प्रकार के मौडल आते हैं. पशुपालक अपनी मांग के अनुसार मौडल का चुनाव कर सकते हैं. इस तरह के मौडल के लिए यह मशीन कैरोसिन, पैट्रोल इंजन के साथ भी उपलब्ध है.

एक बकेट : यह 10-15 पशुओं से दूध निकालने के लिए पर्याप्त है.

दो बकेट : दो बकेट वाला मौडल 15-30 पशुओं के लिए पर्याप्त है.

चार बकेट : यह मौडल 30-50 पशुओं के लिए पर्याप्त है.

छ: बकेट : यह 50 से अधिक पशुओं के लिए ठीक है.

डेयरी फार्मिंग करने वालों के लिए अधिक बकेट वाले मौडल ही उपयोग करते हैं, क्योंकि उन के पास दुधारू पशु भी अधिक होते हैं.

मोबाइल मिल्किंग मशीन

जैसा कि नाम से ही पता चल रहा है. इस यंत्र को एक जगह से दूसरी जगह ले जाना आसान है. इस के अलावा इस मिल्किंग मशीन से एकसाथ 8-10 पशुओं का दूध भी निकाला जा सकता है. एक मशीन 20 से 30 पशुओं के लिए पर्याप्त है.

उपलब्ध मौडल : एक बकेट वाला मौडल 10-15 पशुओं के लिए पर्याप्त है और दो बकेट वाला मौडल 15-30 पशुओं के लिए पर्याप्त है.

वैनसन का ‘लाइन मिल्कर’

* ‘लाइन मिल्कर’ बकेट सिस्टम और पार्लर सिस्टम के बीच का दूध दुहने का सैटअप है. इस की कई खासियतें हैं जैसे :

* पुरजों की कम घिसावट और रखरखाव में आसान है.

* पिट या पार्लर बनाने की आवश्यकता नहीं है.

* यह किसी भी प्रकार के शेड में लगाया जा सकता है.

* सफाई करने में कम समय लगता है.

* दूध एक ही जगह पर इकट्ठा किया जा सकता है.

* 40 से 60 पशुओं के फार्म के लिए उपयोगी है.

वैनसन मिल्किंग पार्लर की बड़ी रैंज

बड़े पैमाने पर डेयरी फार्मिंग करने वालों के लिए यह कंपनी अलगअलग प्रकार के मिल्किंग पार्लर बनाती है. जैसे : हैरिंग बोन पार्लर, स्विंग ओवर पार्लर, रैपिड ऐक्जिट पार्लर और रोटरी पार्लर.

वैनसन आटोमैटिक पार्लर में आफिमिल्क, इजराइल की टैक्नोलौजी इस्तेमाल की गई है. आफिमिल्क विश्व की सब से बड़ी आटोमेशन कंपनी है. मिल्किंग पार्लर में हर गाय की सूचना नोट की जाती है. यह सूचना अपनेआप सौफ्टवेयर में चली जाती है.

आखिर में हम बताना चाहेंगे कि पशुपालक अपनी जरूरत के मुताबिक ही मिल्किंग मशीन के चुनिंदा मौडल का चुनाव कर सकता है. अधिक जानकारी के लिए इस मिल्किंग मशीन बनाने वाली कंपनी में फोन नंबर 9811104804, 8510088892 पर बात कर के ले सकते हैं या इन की वैबसाइट www.vansunmilking.com पर भी देख कर अधिक कुछ जान सकते हैं.

सेहतमंद गायभैंस पालन (Dairy Farming) के लिए सलाह

गरमी का मौसम शुरू होने के चलते लगातार तापमान बढ़ रहा है. इस हालत में पशुओं को गरमी से बचाने के लिए पर्याप्त मात्रा में संतुलित भोजन की जरूरत होती है. गरमी से बचाव के लिए गायभैंस का खास ध्यान रखने की जरूरत है.

गरमियों में पशुओं का आवास प्रबंधन

भीतरी व बाहरी परजीवियों से बचाव के लिए कृमिनाशक दवा का प्रयोग करें. पशुओं को खुरपका, मुंहपका, गलघोंटू और लंगड़ी ज्वर से बचाव के लिए टीका लगवाएं. पशुओं में रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के लिए विटामिन बी और सैलेनियम सप्लीमैंट दें.

पशु बीमार हो तो सेहतमंद पशु से तुरंत अलग कर देखरेख करें. जरूरत पड़ने पर नजदीकी पशु डाक्टर से संपर्क करें. पशुओं का बीमा जरूर करवा लें. गाय व भैंस को प्रतिदिन नहलाएं, पशुओं को बाहर न निकालें और न पशुओं के साथ यातायात करें. साफ और ताजा पानी भरपूर मात्रा में दें, जिस से पशुओं की सारी शारीरिक प्रक्रिया अच्छी तरह से चले और दुग्ध उत्पादन में किसी प्रकार की कमी न हो.

संतुलित आहार

Dairy Farming

पशुओं को हरा चारा के साथ सूखा चारा मिला कर खिलाएं. पौष्टिकता बढ़ाने के लिए गेहूं के भूसे को यूरिया से उपचारित करें (100 किलोग्राम भूसे को उपचारित करने के लिए 4 किलोग्राम यूरिया को 40 लिटर पानी में घोल बना कर छिड़काव करें.) पशुओं के संतुलित आहार में 50 ग्राम मिनरल पाउडर व 20 ग्राम नमक रोजाना दें.

पशु ब्याने के 2 घंटे के अंदर नवजात बछड़े व बछिया को खीस जरूर पिलाएं. इस से रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है. दुधारू पशुओं को ढाई लिटर दूध उत्पादन पर एक किलोग्राम मिश्रित दाना देना चाहिए.

गायभैंसों के 7 माह के गर्भकाल के बाद उस की खुराक के अलावा 1 से सवा किलोग्राम दाना उस की रोज की जरूरत के अलावा देना चाहिए, क्योंकि इन आखिरी महीनों में भ्रूण का तेजी से विकास होता है.

किसान घर पर इस प्रकार पशुओं के लिए संतुलित आहार बना सकते हैं.

पशुपालन (Animal Husbandry) को प्रोत्साहन

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नई दिल्लीः केंद्रीय मंत्रिमंडल ने अवसंरचना विकास कोष (आईडीएफ) के तहत लागू किए जाने वाले पशुपालन अवसंरचना विकास कोष (एएचआईडीएफ) को 29,610.25 करोड़ रुपए के परिव्यय के साथ वर्ष 2025-26 तक अगले 3 सालों के लिए जारी रखने की मंजूरी दे दी.

यह योजना डेयरी प्रसंस्करण और उत्पाद विविधीकरण, मांस प्रसंस्करण यानी मीट प्रोसैसिंग और उत्पाद विविधीकरण, पशु चारा संयंत्र, नस्ल गुणन फार्म, पशु अपशिष्ट से धन प्रबंधन (कृषि-अपशिष्ट प्रबंधन) और पशु चिकित्सा वैक्सीन और दवा उत्पादन सुविधाओं के लिए निवेश को प्रोत्साहित करेगी.

भारत सरकार अनुसूचित बैंक और राष्ट्रीय सहकारी विकास निगम (एनसीडीसी), नाबार्ड और एनडीडीबी से 90 फीसदी तक ऋण के लिए 2 साल की मुहलत सहित 8 सालों के लिए 3 फीसदी ब्याज अनुदान प्रदान करेगी. पात्र संस्थान अलगअलग होंगे, निजी कंपनियां, एफपीओ, एमएसएमई, धारा 8 कंपनियां हैं. अब डेयरी सहकारी समितियां डेयरी संयंत्रों के आधुनिकीकरण, सुदृढ़ीकरण का भी लाभ उठाएंगी.

भारत सरकार एमएसएमई और डेयरी सहकारी समितियों को 750 करोड़ रुपए के ऋण गारंटी कोष से उधार लिए गए ऋण की 25 फीसदी तक ऋण गारंटी भी प्रदान करेगी.

एएचआईडीएफ ने योजना के अस्तित्व में आने के बाद से अब तक 141.04 एलएलपीडी (लाख लिटर प्रतिदिन) दूध प्रसंस्करण क्षमता, 79.24 लाख मीट्रिक टन फीड प्रसंस्करण क्षमता और 9.06 लाख मीट्रिक टन मांस प्रसंस्करण क्षमता को आपूर्ति श्रंखला में जोड़ कर गहरा असर डाला है. यह योजना डेयरी, मांस और पशु चारा क्षेत्र में प्रसंस्करण क्षमता को 2-4 फीसदी तक बढ़ाने में सक्षम है.

पशुपालन क्षेत्र के निवेशकों के लिए पशुधन क्षेत्र में निवेश करने का अवसर प्रस्तुत करता है, जिस से यह क्षेत्र मूल्यवर्धन, कोल्ड चेन और डेयरी, मांस, पशु चारा इकाइयों की एकीकृत इकाइयों से ले कर तकनीकी रूप से सहायता प्राप्त पशुधन और पोल्ट्री फार्म, पशु अपशिष्ट से ले कर धन प्रबंधन और पशु चिकित्सा औषधि व वैक्सीन इकाइयों की स्थापना तक एक आकर्षक क्षेत्र बन जाता है.

तकनीकी रूप से सहायता प्राप्त नस्ल गुणन फार्म, पशु चिकित्सा दवाओं और वैक्सीन इकाइयों को मजबूत करना, पशु अपशिष्ट से धन प्रबंधन जैसे नए कामों को शामिल करने के बाद, यह योजना पशुधन क्षेत्र में बुनियादी ढांचे के उन्नयन के लिए एक बड़ी क्षमता प्रदर्शित करेगी.

यह योजना उद्यमिता विकास के माध्यम से प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से 35 लाख लोगों के लिए रोजगार सृजन का एक माध्यम होगी. इस का उद्देश्य पशुधन क्षेत्र में धन सृजन करना है. अब तक एएचआईडीएफ ने तकरीबन 15 लाख किसानों को प्रत्यक्ष व अप्रत्यक्ष रूप से लाभान्वित किया है.

एएचआईडीएफ किसानों की आय को दोगुना करने, निजी क्षेत्र के निवेश के माध्यम से पशुधन क्षेत्र का दोहन करने, प्रोसैसिंग और मूल्य संवर्धन के लिए नवीनतम तकनीकों को लाने और पशुधन उत्पादों के निर्यात को बढ़ावा दे कर देश की अर्थव्यवस्था में योगदान देने के प्रधानमंत्री के लक्ष्य को प्राप्त करने की दिशा में एक मार्ग के रूप में उभर रहा है. पात्र लाभार्थियों द्वारा प्रसंस्करण और मूल्य संवर्धन बुनियादी ढांचे में इस तरह के निवेश से इन संसाधित और मूल्यवर्धित वस्तुओं के निर्यात को भी बढ़ावा मिलेगा.

इस प्रकार एएचआईडीएफ में प्रोत्साहन द्वारा निवेश न केवल निजी निवेश को 7 गुना बढ़ा देगा, बल्कि किसानों को जानकारी पर अधिक निवेश करने के लिए भी प्रेरित करेगा, जिस से उत्पादकता और किसानों की आय में वृद्धि होगी.