उत्तर प्रदेश कृषि विभाग में कस्टम हायरिंग सेंटर

लखनऊ. उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि पिछले कुछ साल में देश की तसवीर बदलने और देश के हर नागरिक के मन में एक नया विश्वास पैदा करने का काम हुआ है. यह हमारे लिए गौरव की बात है. वैश्विक मंच पर भारत की प्रतिष्ठा बढ़ी है. भारत की भीतरी व बाहरी सुरक्षा मजबूत हुई है. देश में हाईवे, रेलवे, एयरपोर्ट और वाटरवे के बनने से इंफ्रास्ट्रक्चर डवलपमैंट की नई परियोजनाओं को आगे बढ़ाने का काम हुआ है. हर गरीब के जीवन में बदलाव के लिए बिना भेदभाव के ईमानदारी के साथ उन्हें कल्याणकारी योजनाओं का लाभ दिया गया है.

योगी आदित्यनाथ ने कृषि विभाग के अंतर्गत कस्टम हायरिंग सैंटर की स्थापना हेतु ट्रैक्टर व कृषि यंत्र को हरी झंडी दिखा कर रवाना किया और कार्यक्रम स्थल पर विभिन्न विभागों द्वारा लगाए गए स्टौलों को भी देखा.

योगी आदित्यनाथ ने कहा कि आज जिन परियोजनाओं का लोकार्पण और शिलान्यास हुआ है, इन में सड़क, पंचायती राज से जुड़े हुए ग्राम सचिवालय के निर्माण, हर घर नल आदि से जुड़ी परियोजनाएं शामिल हैं. केंद्रीय कृषि मंत्री के हाथों से यहां के किसानों को ट्रैक्टर भी उपलब्ध कराए गए हैं. हर घर नल की योजना के माध्यम से शुद्ध पेयजल का लाभ नागरिकों को प्रदान किया जा रहा है. अगले एक साल में जनपद अंबेडकरनगर में भी हर घर नल की योजना हकीकत बन जाएगी. हर घर तक शुद्ध आरओ का पानी पहुंचाया जाएगा. अंबेडकरनगर में भी उद्योग लग रहे हैं.

इस कार्यक्रम को केंद्रीय कृषि और किसान कल्याण मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने भी संबोधित किया.

इस अवसर पर खेल एवं युवा कल्याण राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) गिरीश चंद्र यादव सहित अन्य जनप्रतिनिधिगण तथा शासनप्रशासन के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे.

श्रीअन्न को देशदुनिया में बढ़ावा देने का नेतृत्व कर रहा है भारत – नरेंद्र सिंह तोमर, कृषि मंत्री

हैदराबाद/नई दिल्ली : 15 जून, 2023. केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर की हैदराबाद में जी-20 की मीटिंग के दौरान वियतनाम, ओमान व कनाडा के मंत्रियों और खाद्य व कृषि संगठन यानी एफएओ एवं इंटरनेशनल फंड फार एग्रीकल्चर डेवलपमेंट यानी आईएफएडी से द्विपक्षीय बैठकें हुईं.

इस दौरान कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने कहा कि जी-20 की अध्यक्षता के साथ भारत अंतर्राष्ट्रीय मिलेट्स वर्ष-2023 के हिस्से के रूप में देशदुनिया में श्रीअन्न को बढ़ावा देने का नेतृत्व भी कर रहा है.

उन्होंने जी-20 की अध्यक्षता के तहत “अंतर्राष्ट्रीय मिलेट्स व अन्य प्राचीन अनाज अनुसंधान पहल (महर्षि)” का समर्थन करने के लिए धन्यवाद देते हुए कहा कि यह पहल अंतर्राष्ट्रीय मिलेट्स वर्ष के तहत किए संयुक्त राष्ट्र के प्रयासों की गति तेज करेगी. महर्षि, श्रीअन्न व जलवायु-सह्य एवं पौष्टिक अनाज पर अनुसंधान में सहयोग प्रदान करेगा.

वियतनाम के कृषि मंत्री ले मिन्ह होन के साथ बैठक में कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने कहा कि भारत के पास कृषि पर संयुक्त कार्य समूह के रूप में कृषि व संबद्ध क्षेत्रों में सहयोग के लिए सुस्थापित संस्थागत व्यवस्था है. दोनों देशों के बीच सुचारु संबंध चले आ रहे हैं और वर्ष 2016 में, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की वियतनाम यात्रा के दौरान द्विपक्षीय संबंधों को ‘व्यापक कार्यनीतिक साझेदारी’ के रूप में आगे बढ़ाया गया था.

उन्होंने आगे कहा कि दोनों देश राजनयिक संबंधों की स्थापना की 50वीं वर्षगांठ मना रहे हैं, जो भारत की स्वतंत्रता की 75वीं वर्षगांठ “आजादी का अमृत महोत्सव” के साथ मेल खाता है.

ओमान के कृषि मंत्री डा. सऊद हामूद अल-हब्सी के साथ बैठक में कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने कहा कि भारत व ओमान के बीच काफी पुराने व ऐतिहासिक संबंध हैं, जो समय के साथ सुदृढ़ हुए हैं. भारत सभी क्षेत्रों में द्विपक्षीय संबंधों को और मजबूत करने के लिए प्रतिबद्ध है और कृषि एक ऐसा क्षेत्र है, जहां हमारे दोनों देशों के बीच सहयोग की अपार संभावनाएं हैं. दोनों देशों में कृषि उत्पादकता व स्थिरता को बढ़ावा देने के लिए संयुक्त पहल, अनुसंधान परियोजनाओं, प्रौद्योगिकी हस्तांतरण के अवसरों का पता लगाना चाहिए और उन्नत सिंचाई तकनीकों, जल संरक्षण विधियों और नवीन तकनीकों सहित सटीक जल उपयोग के लिए सफल रणनीति तैयार करने में सहयोग करना चाहिए. ओमान व भारत दोनों को लाभान्वित करते हुए पशुधन, फलसब्जियों, प्रसंस्कृत खाद्य उत्पादों जैसी कृषि वस्तुओं के लिए बाजार पहुंच बढ़ाने के अवसरों का पता लगाने सहित कृषि अवसंरचना में निवेश के अवसरों पर ध्यान केंद्रित करने की बात भी उन्होंने कही.

कनाडा की मंत्री मैरी क्लाउड बिब्यू के साथ बैठक में केंद्रीय मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने कहा कि दीर्घकालिक व मैत्रीपूर्ण संबंधों को हम महत्व देते हैं, जो लोकतंत्र, विस्तारित आर्थिक जुड़ाव, नियमित उच्चस्तरीय चर्चा व लोगों के बीच दीर्घकालिक संबंधों के साझा मूल्यों द्वारा चिन्हित हैं. आर्थिक संबंध भी लगातार बढ़ रहे हैं. कनाडा में विशाल कृषि उत्पादन व कृषि प्रौद्योगिकी उन्नति है, जो भारत के साथ सहयोग की संभावना प्रदान करते हैं. दोनों पक्ष समयसमय पर कृषि व कृषि-प्रौद्योगिकी साझेदारी पर और तकनीकी बैठकों के माध्यम से बाजार पहुंच के मुद्दों को हल करने के लिए विचारविमर्श कर रहे हैं.

कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने भारत से बेबीकौर्न, मक्का व केले के लिए बाजार पहुंच प्रदान करने के लिए कनाडा को धन्यवाद दिया, साथ ही कहा कि भारत घरेलू के साथ ही वैश्विक स्तर पर भी खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है.

खाद्य व कृषि संगठन यानी एफएओ के महानिदेशक क्यू डोंग्यू के साथ बैठक में कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने कहा कि देश में वर्ष 1948 में अपना काम शुरू करने के बाद से भारत की एफएओ के साथ लंबी व मूल्यवान साझेदारी रही है. जलवायु परिवर्तन के उभरते प्रभाव व कीटों के नए प्रकारों के प्रकोप के साथ एफएओ का काम और भी जटिल हो गया है, जिस से यह पूर्व सूचित निर्णय लेने में देश की सहायता करने वाला एक महत्वपूर्ण ज्ञान भागीदार बन गया है. भारत एफएओ के काम को और अधिक मूल्‍यवान बनाता है, अन्य देशों को तकनीकी विशेषज्ञता प्रदान करता है, साथ ही विकास अनुभवों के महत्वपूर्ण स्रोत के रूप में भी काम करता है. भारत अभीष्‍ट परिणाम प्राप्त करने के लिए एफएओ के साथ मिल कर काम करना जारी रखेगा और खाद्य सुरक्षा व सतत कृषि को प्राप्त करने के साझा लक्ष्य की दिशा में काम करेगा.
इंटरनेशनल फंड फार एग्रीकल्चर डेवलपमेंट यानी आईएफएडी के अध्यक्ष अल्वारो लारियो के साथ चर्चा में नरेंद्र सिंह तोमर ने कहा कि भारत, आईएफएडी के साथ सहयोग करने के लिए अपने केंद्रित कार्यनीतिक उद्देश्य के लिए प्रतिबद्ध है, जो सुनिश्चित करता है कि छोटे किसानों की उपज, कृषि उत्पादन प्रणालियां लाभकारी, सतत व अनुकूल हों.

डीएपी एवं यूरिया के दाम नहीं बढ़ेंगे

खेती में विभिन्न फसलों के उत्पादन में उर्वरकों का उपयोग तब होता है, जब भूमि में पोषक तत्वों की कमी हो और उस की पूर्ति की आवश्यकता होती हो. उर्वरकों के महंगे होने से फसल उत्पादन की लागत बढ़ जाती है, जिस से किसानों को काफी नुकसान भी होता है. इसलिए सरकार द्वारा उर्वरकों पर भारी सब्सिडी दी जाती है, जिस से किसानों की जेब पर अतिरिक्त बोझ न पड़े.

इस वर्ष भी केंद्र सरकार ने किसानों को उचित दामों पर यूरिया और अन्य खादों की पोषक तत्व आधारित सब्सिडी प्रदान करने की मंजूरी दी है.

उर्वरक विभाग के प्रस्ताव को मंजूरी

जानकारी के अनुसार, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने रबी मौसम 2022-23 (01.01.2023 से 31.03.2023 तक) के लिए उर्वरक विभाग के प्रस्ताव को मंजूरी दी है. इस प्रस्ताव में विभिन्न पोषक तत्वों जैसे नाइट्रोजन, फास्फोरस, पोटाश और सल्फर के लिए सब्सिडी (एनबीएस) दरों में संशोधन शामिल है.

इस के अलावा खरीफ मौसम (1 अप्रैल, 2023 से 30 सितंबर, 2023 तक) के लिए फास्फेट और पोटाश उर्वरकों के लिए भी अनुमोदित एनबीएस दरें मंजूर की गई हैं.

किसानों के लिए यह नया फैसला खेती सेक्टर को बढ़ावा देने और किसानों को सहायता प्रदान करने का एक खास कदम है.

38,000 करोड़ रुपए की सब्सिडी

खरीफ सीजन 2023 के दौरान, केंद्र सरकार ने किसानों के लिए 38,000 करोड़ रुपए की सब्सिडी देने का फैसला लिया है. इस फैसले के माध्यम से खरीफ सीजन में किसानों को डीएपी और अन्य उर्वरकों की सही मूल्य पर उपलब्धता सुनिश्चित की जाएगी और उर्वरकों पर सब्सिडी का युक्तीकरण भी होगा. सरकार के इस कदम से किसानों को आर्थिक रूप से बल मिलेगा. इस से किसानों को आर्थिक रूप से सही कीमतों पर फास्फेटिक और पोटाश उर्वरकों के 25 ग्रेड का उपयोग करने की सुविधा मिलेगी.

यह एक महत्वपूर्ण कदम है, जो किसानों को ज्यादा से ज्यादा लाभ प्रदान करेगा और उन की खेती को सुरक्षित बनाए रखेगा.

डीएपी खाद की कीमत में परिवर्तन नहीं

आने वाले खरीफ सीजन में यूरिया और डीएपी खाद की कीमत में कोई परिवर्तन नहीं होगा, क्योंकि सरकार द्वारा पोषक तत्व आधारित सब्सिडी को मंजूरी दी जा चुकी है.

वर्तमान में देश में नीम लेपित यूरिया की एक बोरी कीमत 266.50 रुपए है, जबकि डीएपी की एक बोरी की कीमत 1,350 रुपए है.

इसलिए, किसानों को आगामी खरीफ सीजन (1 अप्रैल से 30 सितंबर, 2023) के दौरान यूरिया और डीएपी खाद इसी कीमत पर ही मिलेगा. इस से किसानों को आर्थिक रूप से सुविधा मिलेगी.