लुवास को मिला पेटेंट, अब थनैला (Mastitis) रोग से जल्द मिलेगी मुक्ति

Mastitis : लाला लाजपत राय पशु चिकित्सा एवं पशु विज्ञान विश्वविद्यालय (लुवास) को पशुओं में थनैला (मैस्टाइटिस) की जांच के लिए एक नवीन जैव रासायनिक तकनीक के लिए भारत सरकार से पेटेंट मिला  है. “दूध में अल्फा-1 एसिड ग्लाइकोप्रोटीन की सांद्रता का अनुमान लगाने के लिए जैव रासायनिक परख” शीर्षक इस तकनीक को पेटेंट संख्या 566866 प्रदान की गई है.

लुवास के कुलपति एवं अनुसंधान निदेशक डा. नरेश जिंदल ने बताया कि यह तकनीक गाय और भैंसों में थनैला की पहचान के लिए उपयोगी सिद्ध होगी. थनैला एक आर्थिक दृष्टि से बेहद गंभीर बीमारी है, और इस नई विधि से उस का सटीक निदान आसान हो सकेगा. परीक्षण में दूध के नमूने को एक विशिष्ट रसायन के साथ मिला कर स्पेक्ट्रोफोटोमीटर के माध्यम से अल्फा-1 एसिड ग्लाइकोप्रोटीन की मात्रा मापी जाती है, जो बीमारी की उपस्थिति में बढ़ जाती है.

यह शोध कार्य स्नातकोत्तर छात्र डा. अनिरबन गुहा द्वारा विश्वविद्यालय के पूर्व प्रोफैसर डा. संदीप गेरा के मार्गदर्शन में पशु चिकित्सा फिजियोलौजी एवं जैव रसायन विभाग में पूर्ण हुआ. डा. नरेश जिंदल ने दोनों वैज्ञानिकों को इस उल्लेखनीय नवाचार के लिए बधाई दी और कहा कि यह उपलब्धि लुवास की अनुसंधान गुणवत्ता को राष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान दिलाती है. डा. नरेश जिंदल ने आशा जताई कि भविष्य में लुवास के वैज्ञानिकों एवं स्नातकोत्तर छात्र अपने अनुसंधान कार्य को नवाचार की दृष्टि से योजनाबद्ध कर और अधिक आईपीआर  पंजीकरण में योगदान देंगे.

अब तक लुवास को एक अंतरराष्ट्रीय पेटेंट (तीन देशों में), 12 राष्ट्रीय पेटेंट और 2 कौपीराइट प्राप्त हो चुके हैं. विश्वविद्यालय ने कई अन्य अनुसंधानों के लिए भी बौद्धिक संपदा अधिकार (आईपीआर) के तहत आवेदन प्रस्तुत किए हैं.

डा. संदीप गेरा ने इस उपलब्धि पर खुशी व्यक्त करते हुए कहा, “यह परीक्षण तकनीक थनैला के तुरंत निबटान को आसान और सुलभ बनाएगी. हमारा उद्देश्य पशुपालकों को कम लागत पर वैज्ञानिक समाधान उपलब्ध कराना है, और यह नवाचार उसी दिशा में एक सार्थक कदम है. मुझे गर्व है कि यह शोध कार्य अब पेटेंट के रूप में मान्यता प्राप्त कर चुका है.”

इस अवसर पर विश्वविद्यालय के कुलसचिव डा. एसएस ढाका, पशु चिकित्सा महाविद्यालय के अधिष्ठाता, डा. गुलशन नारंग, मानव संसाधन एवं प्रबंधन निदेशक, डा. राजेश खुराना, स्नातकोत्तर अधिष्ठाता, डा. मनोज रोज और डा. नरेश कक्कड़ भी उपस्थित रहे.

Animal Health : पशु स्वास्थ्य शिविरों का आयोजन

Animal Health : भारत सरकार के कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय द्वारा संचालित विकसित कृषि संकल्प अभियान के अंतर्गत भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (भा.कृ.अनु.प.)-केंद्रीय भेड़ एवं ऊन अनुसंधान संस्थान, अविकानगर द्वारा 05 जून, 2025 को टोंक जिले की मालपुरा तहसील के गरजेड़ा, पिपल्या एवं चांदसेन गांवों में किसान संगोष्ठी एवं पशु स्वास्थ्य शिविरों का सफल आयोजन किया गया.

जिन में कुल 364 किसानों में से 241 पुरूष एवं 123 महिला किसानों ने सक्रिय रूप से भाग लिया और वैज्ञानिकों से सीधी बातचीत की. इस अवसर पर संस्थान के निदेशक डा. अरुण कुमार तोमर, अभियान के नोडल अधिकारी डा. एलआर गुर्जर सहित संस्थान के वैज्ञानिकों ने विभिन्न विषयों पर किसानों का मार्गदर्शन किया.

इन शिविरों में प्राकृतिक खेती के साथ जीवामृत बना कर भूमि को कैसे सुधार सकते हैं, जैविक कीटनाशक, मृदा स्वास्थ्य, बीजोपचार, जल प्रबंधन व सुक्ष्म सिंचाई, डिजिटल कृषि, पशुओं में होने वाली प्रजनन समस्याएं, पशु आहार और सरकारी योजनाओं की जानकारी जैसे विषयों पर चर्चा की गई. साथ ही, बीमार पशुओं की जांच व उपचार भी किया गया.

इस कार्यक्रम के दौरान किसानों ने अपने अनुभव साझा करते हुए कई अहम समस्याओं की ओर ध्यान आकर्षित किया. जिन में प्रमुख रूप से शामिल हैं टोंक जिले में घटती दलहनी फसलें, ऊसर भूमि एवं खारे पानी की समस्या, न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर फसल की खरीद में देरी, नकली एवं महंगे उर्वरक, प्रमाणित बीजों की कमी, पशु चिकित्सा सेवाओं का अभाव, प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना में मुआवजे की अनुचित कटौती, मुआवजा प्राप्ति की समय सीमा तय किए जाने की आवश्यकता समेत किसानों ने सरकार से इन समस्याओं के शीघ्र समाधान के लिए जरूरी कदम उठाने की मांग की. इसी कड़ी में ग्राम गरजेड़ा में रात्रि चौपाल का आयोजन किया गया, जिस में संस्थान के वैज्ञानिकों ने ग्रामीणों से सीधे बातचीत कर उन की समस्याएं सुनीं और समाधान के लिए आगे की रणनीति पर विचारविमर्श किया.

इस अभियान के अंतर्गत नागौर जिले की मेड़ता सिटी तहसील के ग्राम मोकलपुर में 5 जून, 2025 को किसान संवाद कार्यक्रम का आयोजन किया गया. इस कार्यक्रम में मुख्य अतिथि कैबिनेट मंत्री, जनस्वास्थ्य अभियांत्रिकी एवं भूजल विभाग राजस्थान सरकार, कन्हैया लाल चौधरी, किसान आयोग अध्यक्ष, सीआर चौधरी, समन्वयक विकसित कृषि संकल्प अभियान, राजस्थान, डा. अरुण कुमार तोमर, स्थानीय विधायक, जिला प्रमुख एवं उपजिला प्रमुख सहित अन्य जनप्रतिनिधि उपस्थित रहे.

इस कार्यक्रम में बड़ी संख्या में किसानों ने भाग लिया. साथ ही, अभियान के अंतर्गत डूंगरपुर  एवं दौसा जिलों में भी कृषि विज्ञान केंद्र की टीमों के साथ मिल कर केंद्रीय भेड़ एवं ऊन अनुसंधान संस्थान अविकानगर द्वारा डूंगरपुर जिले के 6 गांव (आंतरी, पाड़ला मोरु, डोजा, गोड़ा फला, आरा व सूखा पादर) से कुल 949 प्रतिभागी शामिल हुए. दौसा जिले के 3 गांव (ठिकरिया, हापावास व थूमड़ी) से 694 प्रतिभागी उपस्थित रहे. दोनों जिलों से कुल 1,550 किसान (615 महिलाएं, 935 पुरुष) व 93 अन्य मिला कर कुल 1,643 प्रतिभागियों ने भाग लिया.

Animal Health : क्या आप का पशु बीमार है ?

Animal Health : आज के समय पशुपालन बड़े पैमाने पर किया जाता है और अनेक लोग डेयरी फार्मिंग के जरीए अपना रोजगार कर रहे हैं, बल्कि अन्य लोगों को भी रोजगार मुहैया करा रहे हैं. बड़े पैमाने पर पशुपालन करने वाले या डेयरी फार्मिंग से जुड़े लोग ज्यादातर पशु विशेषज्ञ के संपर्क में रह कर ये काम करते हैं परंतु, जो कम दुधारू पशुओं को ले कर अपना काम कर रहे हैं या कुछ नए लोग हैं, जिन्होंने पशुपालन का काम शुरू किया है, उन को कई बार पशुओं के बीमार होने का पता नहीं चलता और जब तक उन को अपने पशु की बीमारी का पता चलता है, तब तक देरी हो चुकी होती है और कई बार उसे अपने पशु से भी हाथ धोना पड़ता है. ऐसे में  पशुपालकों के लिए यह जानना बेहद जरूरी हो जाता है कि उन के पशु सुरक्षित और स्वस्थ है या नहीं? कई बार पशुपालकों को पशुओं की बीमारी के बारे में बहुत देर से पता चलता है, जिस से पशुओं में बीमारी इतनी ज्यादा फैल जाती है कि पशुपालकों को नुकसान झेलना पड़ता है. ऐसे में पशुपालकों को अपने पशुओं के स्वास्थ्य के बारे में जानकारी होनी चाहिए.

कैसे पहचाने कि पशु बीमार है?

आप अपने पशुओं पर नजर रखे अगर आप के पशु की दिनचर्या में उस के रहनसहन में कुछ बदलाव दिखे, आप का पशु ठीक से नहीं चल पा रहा है या चलते वक्त पूरे पैरों का इस्तेमाल नहीं कर रहा है, तो समझ जाइए कि वो स्वस्थ नहीं है. क्योंकि, स्वस्थ पशु पैरों से अच्छी तरह चलते हैं. स्वस्थ पशु की पहचान है कि अकसर वो अपनी जीभ से अपनी नाक को चाटा करते हैं, यह भी ध्यान देने वाली बात है.

इस के साथ ही, यदि आप पशु के पास से गुजरते हैं, जो बैठा हुआ है, लेकिन इस के बाद भी पशु में कोई हलचल नहीं होती वह सुस्त हो, तो समझ जाइए कि पशु को कोई स्वास्थ्य समस्या हो सकती है. पशु सुस्त दिखे तो पशुपालक को अपने पशु के तापमान की जांच करनी चाहिए. कहीं उसे बुखार तो नहीं है.

अगर आप के पशु का स्वास्थ बेहतर होगा, तो उस का खानपान सही रहेगा, और वो चारा भी खाएगा. स्वस्थ पशु को अच्छी भूख लगती है. अगर आप के पशु ने अचानक से कम खाना शुरु कर दिया है तो, ये उस के बीमार होने के लक्षण हैं. इस के साथ ही, पशुओं में इन बातों का भी ख्याल रखें कि पशु की नाक साफ होनी चाहिए. पशुओं का थूथन यानी मुंह सूखा नहीं होना चाहिए.

अगर पशु अच्छे से खाना चबा नहीं रहा या धीरे चबा रहा है, तो भी दिक्कत हो सकती है. इसलिए पशु बीमारी के ये कुछ सामान्य लक्षण हैं. इन्हें नजर अंदाज न करें.

अगर पशुपालक ऊपर दिए गए किसी भी लक्षण को अपने पशुओं में देखता है, तो उसे जल्द ही किसी पशु चिकित्सक से संपर्क करना चाहिए. समय पर बीमारी का पता चलने पर पशु का इलाज आसान है. जिस से आप अपने पशुधन को बचा सकते हैं.

“विकसित क़ृषि संकल्प अभियान” की शुरुआत

अविकानगर : केंद्रीय भेड़ एवं ऊन अनुसंधान संस्थान अविकानगर के द्वारा “विकसित क़ृषि संकल्प अभियान” की शुरुआत दिनांक 29 मई, 2025 को सुबह 9 से 11 बजे मालपुरा तहसील की लावा पंचायत में स्थानीय विधायक कन्हैयालाल चौधरी कैबिनेट मंत्री जलदाय विभाग, मुख्य अथिति एवं विशिष्ट अथिति के रूप मे जिला प्रमुख टोंक और मालपुरा तहसील के प्रधान सकराम चोपड़ा एवं अन्य जनप्रतिनिधि गणों की उपस्थिति मे कार्यक्रम की शुरुआत करेंगे.

लावा पंचायत में कार्यक्रम के बाद दोपहर 11 से 1 बजे तक अविकानगर संस्थान के सभागार में भी विकसित क़ृषि संकल्प अभियान के तहत आयोजित कार्यक्रम में भी मंत्री एवं अन्य अथिति भाग लेंगे. दिनांक 29 मई, 2025 के कार्यक्रम में अविकानगर संस्थान, कृषि विज्ञान केंद्र निवाई, मालपुरा तहसील के कृषि और पशुपालन विभाग के सारे कर्मचारी उपस्थित रह कर किसानों की खरीफ की फसल एवं पशुपालन से संबंधित सभी समस्याओं का निदान करेंगे और प्रगतिशील किसान के विचार भी सभा में साझा होंगे एवं किसान के फीडबैक का भी भविष्य के हिसाब से मूल्यांकन किया जाएगा.

राजस्थान राज्य के भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद द्वारा नामित स्टेट कोऔर्डिनेटर एवं निदेशक डा. अरुण कुमार तोमर ने बताया कि कल के दोनों कार्यक्रम में स्थानीय जनप्रतिनिधियों के साथ कृषि और पशुपालन विभाग के कर्मचारी उपस्थित रह कर किसान से विस्तार से बातचीत करेंगे. अविकानगर से शुरू हो रहे इस कार्यक्रम में निदेशक डा. अरुण कुमार तोमर ने अधिक से अधिक भाग लेने के लिये टोंक जिले के सभी किसान से अपील की.

Inspiring Personalities : पशुपालन ही नहीं रोजगार भी दे रही है संध्या सिंह

Inspiring Personalities : संध्या सिंह (Sandhya Singh) उत्तरप्रदेश के गांव सरौनी, जिला जौनपुर की रहने वाली हैं, जिन्होंने पोस्ट ग्रेजुएट तक शिक्षा हासिल की है और पशुपालन के क्षेत्र में बड़ा कारनामा हासिल किया है. खुद पशुपालन कर लाखों की कमाई कर रही है, इस के अलावा अपने एफपीओ कृषक प्रोडयूसर कंपनी के जरिए अनेक लोगों को रोजगार भी मुहैया करा रही हैं.

संध्या सिंह (Sandhya Singh) पशुपालन करने के साथसाथ खाद प्रसंस्करण पर निशुल्क ट्रेनिंग देने का भी काम कर रही हैं जहां से सैंकड़ों महिलाओं ने सीखकर आज खुद का काम कर रोजगार प्राप्त कर रही हैं.

फूड प्रोसैससिंग के जरिए वह दूसरी महिलाओं को बड़े पैमाने पर अचार, मुरब्बा, पेठा, जैम, जैली आदि बनाना भी सिखाती हैं. जिस की मदद से कई महिलाएं अच्छी कमाई कर रही हैं.

उन्होंने बताया कि उन के पास इस समय लगभग 200 से अधिक देशी, साहिवाल और गिर नस्ल की गायें है. साथ ही, जमुनापारी, सिरोही और बरबरी नस्ल की लगभग 25 बकरियां हैं. जिस से वह सैंकड़ों लिटर दूध उत्पादन ले कर अच्छी कमाई कर रही है. इस के अलावा वह मुरगीपालन भी करती हैं. जिस में वह कैरी और सोनाली नस्ल की मुरगियोंका पालन करती  हैं.

Sandhya Singh

संध्या सिंह (Sandhya Singh) ने बताया कि पशुपालन में वह पशुओं का रहनसहन और उन के टीकाकरण का खास ध्यान रखती हैं. सभी पशुओं के खानपान पर लगभग 9 हजार प्रतिदिन का खर्च आता है. इस के साथ ही, अलगअलग प्रकार से पशुओं के रहने की व्यवस्था भी अलगअलग तरह से की जाती है. जिस में नवजात पशुओं को अलग, सांडो को अलग, सालभर चारे का प्रबंधन, गरमी सर्दी और बरसात के अनुसार उन के रहने की व्यवस्था का भी खास ध्यान रखा जाता है.

इस के साथ ही, समयसमय पर पशुओं को टीकाकरण में खुरपका मुंहपका, तिल्ली ज्वर, लंगड़ा बुखार और गला घोटूं का टीका लगवाया जाता है. जिस से पशु स्वस्थ रहे और गुणवत्ता युक्त दूध उत्पादन लिया जा सके.

पशुओं द्वारा खाना छोड़ देने पर 100 किलोग्राम मिश्रित दाने के साथ 250 ग्राम सोडियम बाकार्बोनेट दिया जाता है. पशु में कृमि की समस्या होने पर खासतौर पर कृमि नाशक एल्बेंडाजोल और आइवरमेक्टिन का उपयोग किया जाता है. इस के साथ ही, पशुओं की आने वाली नस्ल बेहतर हो इस के लिए स्वस्थ और शुद्ध नस्ल के सांड द्वारा प्राकृतिक गर्भधान एवं कृत्रिम गर्भधान कराया जाता है.

संध्या सिंह (Sandhya Singh) ने बताया कि वह पशुपालन का सब से बड़ा फायदा यह भी है कि हम उस साल वर्मी कंपोस्ट, चारा उत्पादन, गोबर से हवन के उपले का उत्पादन कर लगभग 80 लोगों को रोजगार भी दे रहे हैं और खुद भी 60 से 70 हजार हर महीने की अतिरिक्त कमाई भी कर रहे हैं.

इस काम के लिए संध्या सिंह (Sandhya Singh) को समयसमय पर कृषि विज्ञान केंद्र जौनपुर के कृषि वैज्ञानिकों और पशु वैज्ञानिकों का भी सहयोग मिलता रहा है.

Agriculture News : हमारे कृषि संस्थानों का लोहा पूरी दुनिया मानेगी

Agriculture News :   केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण और ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान की अगुवाई में ‘विकसित कृषि संकल्प अभियान’ की तैयारियां अब अपने अंतिम चरण में है. 29 मई, 2025 को ओडिशा से इस व्यापक अभियान का शुभारंभ होगा.

भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद और कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय का सारे अधिकारी राज्यों के सहयोग से इस की तैयारियों में जुटा हुआ है. इसी कड़ी में शिवराज सिंह चौहान ने पूसा कैंपस स्थित सुब्रहमण्यम हौल में देशभर के कृषि वैज्ञानिकों से संवाद किया. इस अवसर पर कृषि सचिव देवेश चतुर्वेदी, आईसीएआर के महानिदेशक डा. एमएल जाट, भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के सभी 113 संस्थानों, भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान के साथ ही देशभर के 731 कृषि विज्ञान केंद्रों व केंद्रराज्यों के कृषि विश्वविद्यालयों के वैज्ञानिकों और प्राध्यापकों ने बड़ी संख्या में सभागार में उपस्थित रह कर और वर्चुअल जुड़ कर इस संवाद कार्यक्रम में बढ़चढ़कर हिस्सा लिया.

यहां केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि मैं सत्ता के सुख के लिए कृषि मंत्री नहीं बना हूं, बल्कि किसानों की सेवा के लिए, उत्पादन बढ़ाने, उत्पादन की लागत घटाने, खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करने, देश में अन्न के भंडार भरने और भावी पीढ़ी के कृषि संबंधित हितों की रक्षा के लिए ही मेरा जीवन समर्पित है. उन्होंने कहा कि उर्वरक का संतुलित प्रयोग, स्थानीय परिस्थिति, सही शोध जानकारी होने और अच्छे बीजों से किसान को उत्पादकता बढ़ाने में निश्चित तौर पर मदद मिल सकती है.

केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कृषि वैज्ञानिकों, विभाग के अधिकारीयों और किसान को जोड़ने पर जोर देते हुए कहा कि इस अभियान के जरिए इसे पूरा करते हुए किसानों से जुड़ने की एक बड़ी कोशिश होने जा रही है.

उन्होंने कहा कि खेती हृदय और लगाव का विषय है. खेती को जिया जाता है. मेरी हर सांस में खेती और रोमरोम में किसान बसे हैं. फसल के अच्छे व खराब होने पर भावनाएं जुड़ जाती हैं.

इसलिए सरकार की पूरी कोशिश कृषि अनुसंधान को आगे बढ़ाने की है. शोध और अनुसंधान के लिए हमारी सरकार फंड की कमी नहीं होने देगी.

केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने यह भी कहा कि यह अभियान परिणाम उन्मूलक कार्यक्रम है, जिस का परिणाम इसी खरीफ सीजन में उत्पादन वृद्धि और उत्पादन लागत में कमी के रूप में जल्द ही हमारे सामने होगा. इस के साथ ही, उन्होंने देश के वैज्ञानिकों से अपनी शोध क्षमता को वैश्विक स्तर पर सिद्ध करने की भी अपील की. उन्होंने कहा कि हमारे कृषि संस्थानों में वो ताकत है, जिस का लोहा पूरी दुनिया मानेगी.

केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने वैज्ञानिकों के प्रयासों की प्रशंसा की और कहा कि इस अभियान के पूरा होने के बाद देश, वैज्ञानिकों के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करेगा. यह अभियान 29 मई से 12 जून तक देशव्यापी स्तर पर आयोजित किया जा रहा है, जिस में वैज्ञानिकों की टीमें गांवगांव जा कर किसानों से सीधा संवाद करेगी.

इस अभियान में 731 कृषि विज्ञान केंद्रों और आईसीएआर के 113 संस्थानों के वैज्ञानिक विशेषज्ञ और राज्यों व अन्य कृषि विभाग के अधिकारी भी शामिल रहेंगे. यह अभियान 700 से ज्यादा जिलों में आयोजित किया जाएगा. साथ ही, इस में कृषि, बागबानी, पशुपालन, मछलीपालन आदि विभागों के अधिकारी, वैज्ञानिक एवं नवोन्मेषी किसान भी शामिल रहेंगे. इस अभियान का लक्ष्य 1.5 करोड़ किसानों से सीधा संवाद करना है.

Placement Drive : पशुपालकों के लिए प्लेसमेंट ड्राइव

Placement Drive : कैंपस प्लेसमेंट ड्राइव का आयोजन सरदार वल्लभभाई पटेल कृषि विश्वविद्यालय के कुलपति डा. केके सिंह के दिशानिर्देशन में किया गया. इस अवसर पर माई एनिमल कंपनी के वाइस प्रेसिडेंट संदीप दत्ता ने कहा कि भारत में माई एनिमल कंपनी द्वारा कुत्तों, ऊंटों, घोड़ों और अन्य जानवरों के लिए स्वास्थ्यवर्धक एवं गुणकारी प्रोडक्ट बनाया जा रहा है, जिस से भारत के पशुपालक लाभान्वित हो सकें.

माई एनिमल कंपनी जूनियर के वाइस प्रेसिडेंट आदित्य पांडे ने कहा कि आज राष्ट्रीय स्तर पर कई कंपनियां हैं, जो अपने विभिन्न उत्पादों को बना कर मार्केटिंग कर रही हैं, लेकिन पशुपालन क्षेत्र को बढ़ावा देने के लिए पहली कंपनी माई एनिमल है, जो पशुपालन क्षेत्र को बढ़ावा देने के लिए राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर काम कर रही है.

उन्होंने कहा कि उन का प्रयास है कि गुणवत्तायुक्त उत्पादों से हर गांव के पशुपालक परिचित हों और पशुओं की सुरक्षा को ध्यान में रख कर पशुपालन का एक अच्छा व्यवसाय कर सकें, इस के लिए कंपनी पेरावेट और वेटरनरी डाक्टर के सहयोग से भारत के ग्रामीण इलाकों तक पहुंच कर पशुपालकों का सहयोग कर रही है. इसी को विस्तार देने के लिए सरदार वल्लभभाई पटेल कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के छात्रछात्राओं का इंटरव्यू लिया गया. इस के बाद  उन को प्लेसमेंट दे कर कंपनी के उद्देश्यों की पूर्ति के लिए उन को विभिन्न जिलों में पोस्टिंग दी जाएगी, जिस से पशुपालक नए उत्पाद और तकनीक की सहायता से अपने पशुओं की जिंदगी को एक नई दिशा दे सकें.

इस अवसर पर 38 छात्रछात्राओं ने कंपनी के प्लेसमेंट ड्राइव में हिस्सा लिया और इन में से कंपनी ने 15 छात्रों का चयन किया. कंपनी इन छात्रों को देश में ही नहीं, बल्कि विदेशों में भी काम करने का मौका देगी, क्योंकि यह कंपनी अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर लगातार बढ़ती जा रही है.

इस कार्यक्रम में निदेशक ट्रेनिंग औफ प्लेसमेंट प्रो. आरएस सेंगर ने कहा कि कुलपति प्रो. केके सिंह के मार्गदर्शन में कृषि विश्वविद्यालय के छात्रों का प्लेसमेंट सौ फीसदी हो सके, इस के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं. उन्होंने आगे कहा कि आने वाले दिनों में कृषि विश्वविद्यालय में रोजगार मेला भी लगाया जाएगा, जिस से छात्र रोजगार पा सकें. इस कार्यक्रम का संचालन जौइंट डायरेक्टर प्रो. सत्य प्रकाश ने किया.

Financial Assistance : नागालैंड में कृषि क्षेत्र के विकास के लिए सहायता

Financial Assistance : केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण व ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय (इंफाल), जलुकी, नागालैंड के पशु चिकित्सा विज्ञान एवं पशुपालन महाविद्यालय के प्रशासनिक सह शैक्षणिक भवन का उद्घाटन किया. इस मौके पर नागालैंड के उपमुख्यमंत्री टी.आर. जेलियांग, राज्य के ग्रामीण विकास मंत्री मेत्सुबो जमीर, केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय (इंफाल) के कुलपति डा. अनुपम मिश्रा भी मौजूद थे.

इस मौके पर कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कृषि एवं पशुधन क्षेत्र की प्रगति और नागालैंड के विशिष्ट उत्पादों पर प्रकाश डाला. उन्होंने कृषि क्षेत्र के विकास और वृद्धि के लिए नागालैंड राज्य को 338.83 करोड़ रुपए की वित्तीय सहायता देने की घोषणा भी की है. उन्होंने नागालैंड सरकार से राज्य के कृषि और ग्रामीण विकास के लिए कार्य योजना बनाने को कहा और इस संबंध में केंद्र सरकार से पूर्ण सहयोग का भरोसा भी दिया.

कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने राज्य सरकार के अधिकारियों को सलाह दी कि वे नागालैंड के हर एक जिले के लिए वैज्ञानिकों, केवीके अधिकारियों, विश्वविद्यालय के पेशेवरों और किसानों की एक कोर वैज्ञानिक टीम बनाएं, जो महीने में कम से कम दो बार गांवों में किसानों से बातचीत कर के उन की समस्याओं का पता लगाए. इस से जमीनी स्तर पर नीति निर्माण और किसानों तक कृषि संबंधी तकनीक पहुंचाने में मदद मिलेगी. साथ ही, उन्होंने नागालैंड राज्य में प्राकृतिक खेती के अवसरों पर जोर दिया. उन्होंने कहा कि इस मामले में केंद्र सरकार मदद के लिए भी तैयार है.

केंद्रीय मंत्री ने पशु चिकित्सा विज्ञान एवं पशुपालन महाविद्यालय के प्रयासों की प्रशंसा की और यहां के छात्रों को अपने नवीन विचारों को उन के साथ साझा करने के लिए दिल्ली आमंत्रित किया. उन्होंने विद्यार्थियों के स्टार्टअप विकास के लिए हर संभव सहयोग एवं आर्थिक सहायता देने का भरोसा भी दिया. उन्होंने किसानों और छात्रों से बातचीत करने के लिए दोबारा नागालैंड आने का वादा भी किया. उन्होंने इस मौके पर आयोजित किसान मेले एवं प्रदर्शनी स्टालों का भी अवलोकन किया और किसानों से बातचीत की.

इस मौके पर नागालैंड के राज्यपाल ला. गणेशन ने समारोह की अध्यक्षता की और क्षेत्र के लोगों के लिए पशु स्वास्थ्य देखभाल और कृषि सुधार में मदद करने के लिए केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय, इंफाल और कालेज की भूमिका की सराहना की. उन्होंने भारत के विकास के लिए वैज्ञानिक दृष्टिकोण और किसानों एवं स्टेट होल्डर्स की भागीदारी की भूमिका पर जोर दिया ताकि 2047 तक विकसित भारत का सपना साकार किया जा सके.

नागालैंड के उपमुख्यमंत्री टी.आर. जेलियांग ने राज्य में कृषि प्रगति और आर्थिक उत्थान के लिए क्षेत्र में तकनीकी विशेषज्ञता और रिसर्च आधारित खेती की भूमिका पर जोर दिया. इस कार्यक्रम में 639 किसान समेत राज्य एवं केंद्र सरकार के 84 अधिकारी शामिल हुए.

Aqua Insurance : मछुआरों को पहली बार मिलेगा एक्वा बीमा

मुंबई : केंद्रीय मत्स्यपालन, पशुपालन और डेयरी मंत्रालय एवं पंचायती राज मंत्री राजीव रंजन सिंह की अध्यक्षता में पिछले दिनों 28 अप्रैल, 2025 को मुंबई में “तटीय राज्य मत्स्यपालन बैठक: 2025” का आयोजन किया गया.

इस कार्यक्रम में मत्स्यपालन, पशुपालन और डेयरी मंत्रालय और पंचायती राज राज्य मंत्री प्रोफैसर एसपी सिंह बघेल, मत्स्यपालन, पशुपालन और डेयरी और अल्पसंख्यक मामलों के राज्य मंत्री जौर्ज कुरियन के साथसाथ कई तटीय राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के राज्यपालों और मत्स्यपालन मंत्रियों की भी उपस्थिति रही.

इस अवसर पर केंद्रीय मंत्री राजीव रंजन सिंह ने प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना के तहत 255 करोड़ रुपए के कुल खर्च के साथ 7 तटीय राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के लिए प्रमुख परियोजनाओं का उद्घाटन किया. तटीय राज्य मत्स्य सम्मेलन में 5वीं समुद्री मत्स्यपालन गणना अभियान, कछुआ बहिष्करण डिवाइस पर पीएमएमएसवाई दिशानिर्देश और पोत संचार एवं सहायता प्रणाली के लिए मानक संचालन प्रक्रिया लागू किए जाने जैसी प्रमुख पहलों का भी शुभारंभ किया गया.

इस अवसर पर केंद्रीय मंत्री राजीव रंजन सिंह ने डिजिटल एप्लीकेशन व्यास-एनएवी युक्त टैबलेट भी बांटे और प्रधानमंत्री मत्स्य किसान समृद्धि सहयोजना (पीएम-एमकेएसएसवाई) के तहत लाभार्थियों को पहली बार एक्वा बीमा (एकमुश्त प्रोत्साहन स्वीकृति-सह-रिलीज आदेश) प्रदान किया. साथ ही, 5वीं समुद्री जनगणना अभियान की भी शुरुआत हुई. इस में पर्यवेक्षकों का प्रशिक्षण गांव स्तर पर डेटा गणनाकर्ताओं की भरती और प्रशिक्षण भी शामिल है. इस के पूरा होने के बाद 3 महीने तक चलने वाली वास्तविक गणना गतिविधि होगी. यह अभियान दिसंबर 2025 तक पूरा हो जाएगा.

5वीं समुद्री मत्स्यपालन जनगणना डिजिटल हुई: व्यास-एनएवी एप

भारत की 5वीं समुद्री मत्स्य गणना (एमएफसी 2025) की तैयारी के एक बड़े कदम के रूप में, पारदर्शिता और दक्षता को बढ़ावा देने के उद्देश्य से डिजिटल रूप से डेटा संग्रह के लिए एक मोबाइल एप्लिकेशन व्यास-एनएवी लौंच किया गया है. पारंपरिक पद्धति से भूसंदर्भित, एप आधारित डिजिटल प्रणाली को प्रयोग में लाते हुए एमएफसी 2025 देशभर में 12 लाख मछुआरों के परिवारों को कवर करेगा और वास्तविक समय में जांच संभव हो सकेगी.

यह बड़ा अभियान प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना (पीएमएमएसवाई) के तहत मत्स्यपालन, पशुपालन और डेयरी मंत्रालय के मत्स्यपालन विभाग (डीओएफ) द्वारा समन्वित किया जाता है. व्यास-एनएवी को आईसीएआर केंद्रीय समुद्री मत्स्य अनुसंधान संस्थान द्वारा विकसित किया गया था.

यह गणना फ्रेम की बड़े स्तर पर कवरेज और सटीकता सुनिश्चित करने की दिशा में एक बड़ा कदम है. इस एप में प्राथमिक और द्वितीयक स्रोतों के आधार पर गांवों की सारांश तसवीर रिकौर्ड करने की सुविधा है. यह पर्यवेक्षक केंद्रीय समुद्री मत्स्य अनुसंधान संस्थान भारतीय मत्स्य सर्वे और तटीय राज्यों के मत्स्य विभागों के कर्मचारी हैं.

समुद्री मत्स्यपालन गणना – 2025 के बारे में

समुद्री मत्स्य गणना (एमएफसी)-2025 का ध्यान समुद्र में मछली पकड़ने वाले मछुआरों के प्रत्येक परिवार, उन के गांव, मछली पकड़ने के कौशल और साजोसामान के साथसाथ देशभर में मछली पकड़ने के बंदरगाहों और मछली लैंडिंग केंद्रों से जुड़ी बुनियादी सुविधाओं के संपूर्ण, सटीक और समय पर दस्तावेजीकरण पर है.

व्यवसाय को नया रूप देते हुए केंद्रीय समुद्री मत्स्य अनुसंधान संस्थान द्वारा बनाए गए अनुकूलित मोबाइल और टैबलेट आधारित एप्लिकेशन का उपयोग डेटा संग्रह के लिए किया जाएगा, ताकि हाथ से किए जाने वाले काम में होने वाली गलतियों को कम किया जा सके और नीति स्तरीय उपयोग के लिए डेटा संकलन में तेजी लाई जा सके.

यह समुद्री मत्स्य गणना एक प्रक्रिया है, जो फील्ड औपरेशन के सिग्नलिंग से शुरू होती है और रिपोर्टिंग के साथ खत्म होती है. जहां घरेलू गणना होती है, वहां संदर्भ अवधि मुख्य गतिविधि है. इस मामले में यह संदर्भ अवधि नवंबरदिसंबर, 2025 है.

इस प्रक्रिया के विभिन्न घटकों को गणना संचालन कहा जाता है. अब तक प्री कोर गणना चरण में ऐसी कई गतिविधियों की योजना बनाई गई है. मोटेतौर पर 3,500 गांवों और 12 लाख परिवारों को इस अभ्यास में अलगअलग समय पर कवर किया जाएगा. गांव की गणना को मईजून तक अंतिम रूप दिया जाएगा, जबकि परिवार स्तर के डेटा और अन्य सुविधाओं को नवंबरदिसंबर माह के दौरान कवर किया जाएगा, जो कि गांव और मछली पकड़ने वाले समुदाय के गणनाकारों द्वारा किया जाएगा.

यह औपरेशन अप्रैल से दिसंबर तक चलेगा. गांव की सूची को अंतिम रूप देने और लैंडिंग केंद्रों के डेटा को केंद्रीय समुद्री मत्स्य अनुसंधान संस्थान, भारतीय मत्स्य सर्वेक्षण और डेयरी मंत्रालय के मत्स्यपालन विभाग के कर्मचारियों द्वारा कवर किया जाएगा.

नवंबरदिसंबर 2025 के लिए निर्धारित मुख्य गतिविधि में स्थानीय समुदाय से प्रशिक्षित गणनाकार शामिल हैं, जो स्मार्ट उपकरणों के साथ प्रत्येक समुद्री मछुआरे के घर का दौरा करेंगे. इस से पहले इस के लिए अच्छे से तैयारी की जाती है. मछुआरों की जनसांख्यिकीय और सामाजिकआर्थिक स्थिति, वैकल्पिक आजीविका के विकल्प और कैसे और कहां सरकारी योजनाएं उन की स्थिति को बेहतर करती हैं, इन पहलुओं की बारीकियां रिकौर्ड करने पर जोर दिया जाएगा. इस के लिए अधिकारी डिजिटल डेटा संग्रहण में काम कर रहे लोगों को प्रशिक्षित करेंगे और व्यास-एनएवी का उपयोग कर के गांव और बुनियादी ढांचे के डाटा की जांच करेंगे.

Hydroponics Technology : हाइड्रोपोनिक्स तकनीक से हरा चारा

Hydroponics Technology: शहर हो या गांव, आज के समय में अनेक पशुपालक डेरी व्यवसाय करना चाहते हैं, लेकिन उन के लिए चारे की समस्या आड़े आ जाती है. गांव में तो किसानों को यह समस्या ज्यादा नहीं है, लेकिन शहरों में जो लोग पशुपालन कर रहे हैं, उन्हें हरा चारा नहीं मिल पाता. शहरों के आसपास चारा उगाने के लिए जमीन की अच्छीखासी कमी है.

आमतौर पर पौधे उगाने के लिए बीजों को मिट्टी में बोया जाता है, जबकि हाइड्रोपोनिक्स तकनीक (Hydroponics Technology) में बीजों को बिना मिट्टी के उगाया जाता है और बहुत कम जमीन की जरूरत होती है.

कृषि विशेषज्ञों और कृषि यंत्र विशेषज्ञों ने मिल कर हाइड्रोपोनिक्स तकनीक ईजाद की है. हाइड्रोपोनिक्स तकनीक पर आयुर्वेट के वैज्ञानिकों द्वारा लगातार आगे बढ़ाने का काम किया जा रहा है और उन्हें  इस के अच्छे नतीजे मिल रहे हैं.

इस तकनीक से उगाए गए चारे को हाइड्रोपोनिक्स चारा भी कह सकते हैं. इस हाइड्रोपोनिक्स तकनीक से रोज ही हरा चारा उगाया जा सकता है. इस तकनीक से 1 किलोग्राम बीजों से 7 दिनों में 6-8 किलोग्राम हरा चारा पैदा हो जाता है.

यह मशीन अलगअलग कूवतों में मिलती है. इस से 1 दिन में 240 किलोग्राम से ले कर 960 किलोग्राम तक हरे चारे का उत्पादन हो सकता है. गरमी हो या सर्दी या बरसात इस का कोई फर्क नहीं पड़ता. मक्का, जौ और जई जैसे चारे के लिए प्रचलित अनाजों से हाईड्रोपोनिक चारा तैयार किया जाता है.

जमीन में उगाए गए चारे की तुलना में हाइड्रोपोनिक्स मशीन में उगाया गया चारा पौष्टिकता और गुणों से भरपूर होता है. जमीन के मुकाबले इस मशीन से कई गुना अधिक चारा पैदा किया जा सकता है. इस मशीन से चारा उगाने में पानी की भी बहुत बचत होती है. मशीन के नीचे ही पानी की टंकी लगी होती है, जिस से जरूरत के अनुसार पानी मशीन में जाता है. ट्रे में जितने पानी की जरूरत होती है, उतना ही खर्च होता है, बाकी पानी वापस टंकी में चला जाता है.

इस चारे की खूबी यह है कि हमें जड़, बीज व चारा तीनों चीजें मिलती हैं, जबकि खेत में उगाने से हमें केवल चारा ही मिलता है. जमीन में चारा तैयार होने में जहां कम से कम 1 महीना लगता है, वहीं इस मशीन से महज 1 हफ्ते में चारा मिलने लगता है. जमीन में उगे चारे के मुकाबले हाइड्रोपोनिक्स तकनीक से उगाया गया चारा अधिक पौष्टिक और गुणकारी होता है.

Hydroponics Technology

इस चारे की एक और खूबी यह है कि यह कीटनाशकों और खरपतवार से रहित शुद्ध पशु आहार होता है.

कृषि वैज्ञानिकों का कहना है कि दुधारू पशु को रोजाना कुछ मात्रा इस चारे की भी मिला कर खिलाई जाए, तो दूध में अच्छीखासी बढ़ोतरी होती है. इस के इस्तेमाल से गायभैंस के बच्चों की भी बढ़वार अच्छी होती है. अगर प्रजनन करने वाले सांड़ों को भी यह चारा खिलाया जाए तो उन की प्रजनन कूवत में बढ़ोतरी होती है.

इस तकनीक से गन्ने की पौध, गेहूं के ज्वारे आदि की पौध तैयार की जा सकती है. हाइड्रोपोनिक्स तकनीक से धान की नर्सरी भी उगाई जा सकती है. इस से धान के पौधे 1 हफ्ते में तैयार हो जाते हैं. ऐसे पौधे घासपात रहित व रोगमुक्त होते हैं.

आयुर्वेट प्रोग्रीन हाइड्रोपोनिक्स मशीन

Hydroponics Technology

मशीन निर्माता का कहना है कि यह कृषि मंत्रालय भारत सरकार द्वारा पहली और एकमात्र हाइड्रोपोनिक्स मशीन है. इस मशीन पर कृषि मंत्रालय द्वारा सब्सिडी की सुविधा उपलब्ध है और यह खासकर पशु विश्वविद्यालयों द्वारा अनुमोदित है.

प्रोफेसर डा. आरके धूरिया, पशु पोषण विभाग, बीकानेर, राजस्थान का कहना है कि उन के विश्वविद्यालय में पिछले 4 सालों से आयुर्वेट हाइड्रोपोनिक्स मशीन सफलतापूर्वक चल रही है. मशीन द्वारा उत्पादित हरा चारा साधारण हरे चारे की तुलना में 2 से 3 गुना प्रोटीनयुक्त होता है और उस में तकरीबन दोगुनी ऊर्जा होती है. हाइड्रोपोनिक्स हरे चारे के इस्तेमाल से दूध उत्पादन में बढ़ोतरी होती है व संपूर्ण पशु आहार में बचत होती है.

मशीन निर्माता का कहना है कि डेरी फार्म, फार्म हाउस व अन्य पशु आहार तैयार करने वाली कंपनियां उन की मशीन इस्तेमाल कर रही हैं. जरूरत के हिसाब से तमाम साइजों में मशीनें मौजूद हैं.

अधिक जानकारी के लिए किसान दिल्ली कार्यालय के फोन नंबर 011-22455993, गाजियाबाद कार्यालय के फोन नंबर 0120-7100201 और मोबाइल नंबर 9953150352 पर संपर्क कर सकते हैं.