खेती में आधुनिक कृषि यंत्रों का इस्तेमाल बढ़ रहा है, लेकिन ट्रैक्टर, रोटावेटर, सीड ड्रिल, थ्रैशर जैसी महंगी मशीनें खरीदना हर किसान के लिए आसान नहीं है. ऐसे में मध्य प्रदेश सरकार की कस्टम हायरिंग सैंटर (Custom Hiring Centre) योजना किसानों के साथसाथ ग्रामीण युवाओं के लिए भी उपयोगी साबित हो रही है. इस के तहत कृषि मशीनों का एक केंद्र स्थापित कर उन्हें आसपास के किसानों को किराए पर उपलब्ध कराया जाता है. इस से एक ओर छोटे और सीमांत किसानों को महंगी मशीनें खरीदने की जरूरत नहीं पड़ती, वहीं यह एक स्वरोजगार और आय का अच्छा रास्ता खोलता है.
क्या है कस्टम हायरिंग सैंटर (Custom Hiring Centre)
कस्टम हायरिंग सैंटर के जरीए किसानों को किराए पर कृषि यंत्र दिए जाते हैं. इस में ट्रैक्टर और खेती में इस्तेमाल होने वाले अलगअलग कृषि यंत्र रखे जाते हैं. किसान अपनी जरूरत के अनुसार इन मशीनों को किराए पर ले कर खेत की जुताई, बोआई, निराई, कटाई, मड़ाई और फसल अवशेष प्रबंधन जैसे काम कर सकते हैं.
इस व्यवस्था का सब से बड़ा फायदा छोटे और सीमांत किसानों को मिलता है. उन्हें लाखों रुपए खर्च कर के हर मशीन खरीदने की जरूरत नहीं होती और वह मशीन किराए पर ले कर समय पर खेती के काम को पूरा कर सकते हैं.
मध्य प्रदेश में कैसे मिलती है मदद
मध्य प्रदेश में निजी कस्टम हायरिंग योजना कृषि अभियांत्रिकी संचालनालय के माध्यम से चलाई जाती है. उपलब्ध जानकारी के अनुसार निजी कस्टम हायरिंग सैंटर के लिए परियोजना लागत अधिकतम 25 लाख रुपए तक रखी गई है और पात्र आवेदकों को लगभग 40 प्रतिशत तक अनुदान, अधिकतम 10 लाख रुपए तक होता है, दिया जाता है. इस के लिए उम्मीदवार का चयन औनलाइन आवेदन के बाद कंप्यूटराइज्ड लौटरी के माध्यम से किया जाता है.
मसलन, यदि किसी पात्र आवेदक की स्वीकृत परियोजना लागत 25 लाख रुपए है और उस पर 40 प्रतिशत अनुदान लागू होता है, तो अनुदान की राशि अधिकतम 10 लाख रुपए तक हो सकती है. शेष राशि आवेदक को अपने संसाधनों से जुटानी होती है.
ध्यान रखें : अनुदान की वास्तविक राशि परियोजना, पात्रता, उस समय लागू विभागीय दिशानिर्देश और स्वीकृत लागत पर निर्भर करेगी. आवेदन करने से पहले पोर्टल पर वर्तमान नियम जरूर देखें.
कौन कर सकता है आवेदन
हाल में उपलब्ध मध्य प्रदेश योजना संबंधी
युवाओं को मौका : निजी कस्टम हायरिंग सैंटर के लिए आवेदक की आयु 18 से 40 वर्ष और न्यूनतम शैक्षणिक योग्यता 12वीं पास होनी चाहिए. हालांकि आवेदन की पात्रता और श्रेणियां समयसमय पर विभागीय दिशानिर्देश के अनुसार बदल सकती हैं, इसलिए आवेदन से पहले वर्तमान विज्ञप्ति देखना जरूरी है. ग्रामीण युवा, किसान और कृषि मशीनरी के क्षेत्र में काम करने के इच्छुक लोग इस योजना को स्वरोजगार के रूप में अपना सकते हैं.
कौनकौन से कृषि यंत्र रखे जा सकते हैं
कस्टम हायरिंग सेंटर में क्षेत्र की जरूरत के हिसाब से मशीनों का चयन किया जाता है. इन में ट्रैक्टर, ट्रॉली, कल्टीवेटर, रोटावेटर, एमबी प्लाऊ, सीड कम फर्टिलाइजर ड्रिल, मल्टीक्रॉप थ्रैशर, चौपर, रीपर, स्ट्रॉ रीपर, मल्चिंग मशीन और अन्य आधुनिक कृषि उपकरण शामिल हो सकते हैं. कुछ केंद्रों में ड्रोन जैसी नई तकनीक भी किसानों को किराए पर उपलब्ध कराई जा रही है.
मशीनों का चयन करते समय यह देखना जरूरी है कि आसपास के किसानों को किस फसल और किस कृषि कार्य के लिए सब से ज्यादा मशीनों की जरूरत पड़ती है. इस से मशीनों का उपयोग बढ़ेगा और केंद्र की कमाई की संभावना भी बेहतर होगी.
किसान को क्या फायदा
कस्टम हायरिंग सैंटर से किसान को सब से बड़ा फायदा कम लागत में आधुनिक मशीनों की उपलब्धता का होता है. छोटे किसान को ट्रैक्टर या महंगी मशीन खरीदने के लिए बड़ी पूंजी लगाने की जरूरत नहीं पड़ती. जरूरत के समय मशीन किराए पर मिल जाने से बोआई और कटाई जैसे काम समय पर किए जा सकते हैं.
केंद्र सरकार की कृषि यंत्रीकरण व्यवस्था में भी कस्टम हायरिंग सैंटर को छोटे और सीमांत किसानों तक कृषि यंत्रीकरण पहुंचाने का महत्वपूर्ण माध्यम माना गया है.
कमाई का कैसे बन सकता है जरीया
कस्टम हायरिंग सैंटर को केवल सरकारी अनुदान से मिलने वाली सुविधा न समझ कर कृषि मशीनरी आधारित व्यवसाय के रूप में चलाना ज्यादा महत्वपूर्ण है. केंद्र संचालक मशीनों को घंटे, एकड़ या कृषि कार्य के हिसाब से किराए पर दे सकता है. उदाहरण के लिए जुताई, बोआई, थ्रैशिंग या फसल अवशेष प्रबंधन के लिए अलगअलग किराया निर्धारित किया जा सकता है.
हालांकि कमाई इस बात पर निर्भर करेगी कि केंद्र के पास कितनी और किस प्रकार की मशीनें हैं, आसपास खेती का क्षेत्र कितना है, मशीनों की मांग कितनी है, किराए की दर क्या है और मशीनों का रखरखाव कितना खर्चीला है.
आवेदन कैसे करें
मध्य प्रदेश में कृषि यंत्रों से संबंधित औनलाइन आवेदन और जानकारी के लिए कृषि अभियांत्रिकी संचालनालय का ईकृषि यंत्र अनुदान पोर्टल इस्तेमाल किया जाता है. विभाग के पोर्टल पर आवेदन, पंजीयन, आवेदन की स्थिति और अनुदान से संबंधित जानकारी उपलब्ध है.
कस्टम हायरिंग सैंटर से जुड़ी जानकारी के लिए विभाग का अलग सीएचसी पोर्टल भी उपलब्ध है. आवेदन करने से पहले उस पर जारी ताजा विज्ञप्ति, पात्रता, परियोजना लागत, मशीनों की सूची, जिलेवार लक्ष्य और आवेदन की अंतिम तारीख जरूर देखनी चाहिए.
आवेदन से पहले इन बातों का रखें ध्यान
सब से पहले अपने क्षेत्र में किसानों की मशीनों की वास्तविक जरूरत का आकलन कर के मशीनों का चयन करना चाहिए. विभागीय नियमों में दस्तावेज अपलोड, खरीद स्वीकृति और भौतिक सत्यापन जैसी प्रक्रियाएं भी शामिल हैं.
यहां से मिलेगी आधिकारिक जानकारी
कस्टम हायरिंग सैंटर से जुड़ी ताजा जानकारी के लिए किसान मध्य प्रदेश कृषि अभियांत्रिकी संचालनालय के आधिकारिक पोर्टल पर आवेदन और दिशानिर्देश देख सकते हैं.
मध्य प्रदेश कस्टम हायरिंग सैंटर पोर्टल कृषि यंत्रों पर औनलाइन अनुदान और आवेदन की जानकारी के लिए ईकृषि यंत्र अनुदान पोर्टल उपलब्ध है.
मध्य प्रदेश में कस्टम हायरिंग सैंटर योजना किसानों को आधुनिक मशीनें उपलब्ध कराने और ग्रामीण युवाओं के लिए कृषि आधारित स्वरोजगार पैदा करने का दोहरा अवसर देती है. छोटे किसान मशीन खरीदने के बजाय उन्हें किराए पर ले कर खेती की लागत को नियंत्रित कर सकते हैं, जबकि केंद्र संचालक मशीनों को किराए पर दे कर आय अर्जित कर सकता है. यदि मशीनों का चयन स्थानीय फसलों और किसानों की जरूरत के अनुसार किया जाए और केंद्र का संचालन व्यवस्थित ढंग से हो, तो यह खेती के साथ कमाई का अच्छा मौडल बन सकता है.





