Onions : प्याज, जो सब्जियों में लाजवाब स्वाद दिलाने के लिए जाना जाता है, वही प्याज (Onions )अब किसानों को नौ – नौ आंसू रुला रहा है. इसका कारण यह है कि प्याज के दामों में भारी गिरावट होने से किसानों को मुनाफा तो दूर, उनकी लागत भी नहीं निकल रही है. आखिर ऐसा क्या हुआ कि मुनाफे की फसल किसान की बर्बादी का कारण बन रही है, जानिए-

क्यों बनी मुनाफे की फसल घाटे का सौदा

प्याज (Onions ) एक मसाले वाली औषधीय फसल है, जिसकी पैदावार भारत में बड़े पैमाने पर होती है और देश-भर में महाराष्ट्र के नासिक प्याज का बोलबाला है, लेकिन इन दिनों प्याज की कीमतों में भारी गिरावट के चलते किसानों का बुरा हाल है. इसका सबसे बड़ा कारण क्षेत्र में भारी बारिश और अचानक मौसम बदलाव का असर बताया गया. इसके अलावा प्याज की खेती में इस्तेमाल किए जाने वाले पारंपरिक तौर-तरीके भी नुकसान का कारण बनते हैं.

आधुनिक तकनीक से मिलता लाभ

प्याज (Onions ) की खेती में पानी का रुकना भारी नुकसान का कारण बनता है. अगर तैयार में पानी भर गया और उसकी निकासी नहीं होगी तो प्याज का सड़ना तय है, इसलिए प्याज की खेती में जल निकासी की व्यवस्था होनी चाहिए और सिंचाई के आधुनिक तकनीकों को अपनाना चाहिए, जिससे भारी नुकसान से बचा जा सके.

ड्रिप और फव्वारा सिंचाई है लाभकारी

प्याज की खेती में सिंचाई के लिए सामान्य तरीके ना अपनाकर ड्रिप और स्प्रिंकलर सिंचाई के तरीके अपनाने चाहिए, जबकि प्याज की खेती में ये दोनों विधियां कम ही इस्तेमाल होती हैं.

प्याज स्टोरेज की कमी भी है कारण

प्याज (Onions ) का भंडारण करने के लिए स्टोरेज की कमी होने से भी प्याज खराब होने लगता है, जिसके कारण किसान अपनी उपज को औने – पौने दामों पर बाजार में बेचने को मजबूर होता है और फसल तैयार होने पर बड़े पैमाने पर उपज मंडियों में आती है तो दाम गिरना भी तय है, इसलिए सरकार को अन्य फसलों की उपज भंडारण की तर्ज पर प्याज भंडारण के लिए भी व्यवस्था करनी चाहिए.

महाराष्ट्र के अलावा प्याज देश के अनेक प्रदेशों की मंडी में प्याज कौड़ियों के भाव बिक रहा है, जिसके चलते किसान फसल फेंकने को मजबूर हो रहे हैं. ऐसे में सरकार से उचित मूल्य और समर्थन की पहल की आवश्यकता है. अन्यथा किसान प्याज की खेती से मुंह मोड़ लेंगे और फिर बाहर के देशों से प्याज आयात भी करना पड़ सकता है, जो सरकार की किरकिरी करने वाला काम है.

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