Mustard Variety: भाकृअनुप के कृषि विज्ञान केंद्र (केवीके), उजवा, नई दिल्ली, द्वारा विगत दिनों सरसों फसल प्रबंधन विषय पर एक दिवसीय वैज्ञानिक प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया गया, जिसमें सरसों किस्म (Mustard Variety) आर. एच. 1424 की क्या है खासियत, यह भी जानकारी दी गई. इस प्रशिक्षण कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य किसानों को जनवरी एवं फरवरी माह में सरसों फसल हेतु अपनाई जाने वाली उन्नत कृषि तकनीकों, कीट-रोग प्रबंधन तथा सिंचाई प्रबंधन की जानकारी प्रदान करना था. जानिएं, सरसों किस्म (Mustard Variety) आर. एच. 1424 की क्या है खासियत-
आर. एच.-1424 से मिलता है अधिक उत्पादन
डॉ. डी. के. राणा, वरिष्ठ वैज्ञानिक और प्रमुख, कृषि विज्ञान केंद्र, दिल्ली ने अपने संबोधन में बताया कि रबी मौसम के दौरान केवीके, दिल्ली द्वारा दिल्ली देहात क्षेत्र में 125 किसानों के प्रक्षेत्र (50 हेक्टेयर) में क्लस्टर अग्रिम पंक्ति प्रदर्शन आयोजित किया गया है. इन प्रदर्शनों के अंतर्गत किसानों के खेतों में नवीनतम सरसों प्रजाति (Mustard Variety) आर. एच.-1424 का प्रदर्शन शामिल है, जो तिलहनी फसलों के उत्पादन में वृद्धि करने एवं किसानों को नवीन तकनीकों से उत्पादन क्षमता बढ़ाने में सहायक सिद्ध होने वाला है.
कब और कैसे करें फसल प्रबंधन
प्रशिक्षण कार्यक्रम के दौरान, डॉ. समर पाल सिंह, विशेषज्ञ (सस्य विज्ञान) ने फसल की वर्तमान अवस्था को ध्यान में रखते हुए फली बनने की अवस्था पर दूसरी सिंचाई के महत्त्व पर विशेष बल दिया, जिससे दाना भराव बेहतर हो तथा उत्पादन में वृद्धि सुनिश्चित की जा सके. उन्होंने यह भी सलाह दी कि यदि पाले की संभावना हो, तो फसल को नुकसान से बचाने के लिए हल्की सिंचाई अवश्य करें. इसके साथ-साथ उन्होंने किसानों को संतुलित उर्वरक प्रबंधन, समय पर सिंचाई एवं फसल की नियमित निगरानी जैसे महत्त्वपूर्ण बिंदुओं पर भी मार्गदर्शन दिया.
सरसों कीट एवं रोगों की कैसे करें रोकथाम
डॉ. बाबू लाल फगोडिया, विशेषज्ञ (पादप संरक्षण) ने सरसों फसल में लगने वाले प्रमुख कीट जैसे एफिड (माहू), आरा मक्खी, चितकबरा कीड़ा तथा रोगों जैसे आल्टरनेरिया ब्लाइट, मृदुरोमिल तुलासिता, सफेद रतुआ, सफेद चूर्णी रोग एवं तना गलन की पहचान, उनके समय पर प्रबंधन के उपाय तथा समन्वित कीट प्रबंधन (IPM) के महत्त्व पर विस्तार से जानकारी दी.
कृषि प्रशिक्षण से किसानों को मिलता है लाभ
इस अवसर पर कैलाश, विशेषज्ञ (कृषि प्रसार) ने कहा कि इस प्रकार के प्रशिक्षण कार्यक्रम किसानों को अद्यतन वैज्ञानिक जानकारी एवं व्यावहारिक कौशल से सशक्त बनाने, सरसों फसल की उत्पादकता एवं लाभप्रदता बढ़ाने तथा उत्तम कृषि प्रबंधन पद्धतियों एवं नवीन तकनीकों को अपनाने के लिए प्रेरित करने में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं.
दिल्ली के उजवा केवीके में इस प्रशिक्षण के दौरान किसानों ने सक्रिय रूप से भाग लिया तथा केंद्र पर प्रदर्शित सरसों फसल का प्रत्यक्ष अवलोकन भी किया, जो किसानों के लिए एक जानकारी भरी ट्रेनिंग रही और सरसों की उन्नत किस्म के बारे में भी उन्होंने जाना.





