Banana Farming : अब तक केले की पारंपरिक खेती उस के कंद या गांठ या पुत्ती से की जाती है. टिश्यूकल्चर केलों की खेती कर के किसान कम समय और कम पूंजी में ज्यादा मुनाफा पा सकते हैं और केले के ऐसे पौधों पर बीमारियों और कीटों का असर बहुत कम होता है.
केले की खेती की नई तकनीक
टिश्यूकल्चर तकनीक से केले की खेती (Banana Farming) करने की तकनीक किसानों को रास आने लगी है. इस तकनीक के जरीए केले के जीवित पौधे के रोगरहित भाग से 1 कोशिका या ऊतक को प्रयोगशाला में पूरी तरह से बीमारी, आबोहवा और जगह में मातृ पौधे की बनावट और खासीयत वाले एक पौधे से अनेक पौधों को विकसित किया जाता है.
वैज्ञानिक खेती के फायदे
केला पैदावार की नई तकनीक टिश्यूकल्चर के जरीए तैयार पौधे तेजी से बढ़ते हैं. इतना ही नहीं, सभी पौधे समान रूप से बढ़ते हैं. इस की फसल 11 से 12 महीने में तैयार हो जाती है, जबकि गांठ के पौधे से फसल तैयार होने में 18 से 19 महीने लग जाते हैं.
नई तकनीक से उगाए गए पौधों और फलों में बीमारी होने का डर न के बराबर होता है.
ऐसे पौधों से काफी लंबे समय तक फल मिलते रहते हैं.
क्या है टिश्यूकल्चर तकनीक
कृषि वैज्ञानिक अजय राय बताते हैं कि टिश्यूकल्चर केले को 6-6 फुट की दूरी पर लगाना चाहिए. खेत को अच्छी तरह से तैयार करने के बाद 2×2×2 फुट के गड्ढे तैयार कर के उस में सड़ी हुई गोबर की खाद और खेती के जानकारों से राय ले कर उर्वरकों को मिला कर डाला जाता है.
फायदेमंद ड्रिप सिंचाई
केले की रोपाई के तुरंत बाद सिंचाई करनी चाहिए. ड्रिप सिंचाई के बेहतर फायदे मिलते हैं. दोमट या मटियार दोमट मिट्टी और 32-36 डिगरी सेल्सियस तापमान केले की बेहतर पैदावार के लिए काफी मुफीद है.
केले की खास किस्में
चीनिया, मालभोग, मिठाई, राजा, कैवेंडिस (मौनटेल) व इसम वगैरह केले की मुख्य किस्में हैं. वहीं हरे या कच्चे केले को सब्जी के रूप में भी इस्तेमाल किया जाता है. सब्जी केले के रूप में अबू, अवाक व टंडुक वगैरह किस्मों को पसंद किया जाता है.
कब लगाएं केला
‘मृग बहार प्रजाति’ के केले को जून जुलाई में और ‘कांदे बहार प्रजाति’ के केले को अक्तूबरनवंबर में लगाया जाता है.
केला पैदावार की नई विधि टिश्यूकल्चर से पौधे लगाने व वैज्ञानिक विधि से खेती करने पर पारंपरिक खेती की तुलना में 3 गुना पैदावार और आमदनी होती है. हर पौधे से 35 से 40 किलोग्राम केले पैदा होते हैं, जबकि कंद या गांठ के केले के पौधे से 20 से 25 किलोग्राम केले पैदा होते हैं.
टिश्यूकल्चर केले के पौधों को समय पर और सही तरीके से खादपानी दिया जाए और देखभाल की जाए, तो प्रति पौधा 50 किलोग्राम तक केले हासिल किए जा सकते हैं.





