Biofuel. एथेनॉल एक जैव ईंधन (Biofuel) है, जिसे पेट्रोल में तय मात्रा में मिलाकर वाहनों में इस्तेमाल किया जाता है. इससे पेट्रोल की खपत में कमी आती है. खासकर किसानों के लिए इससे जुड़ी खेती/फसल करना उनके लिए गेमचेंजर साबित हो सकता है.

क्या है एथेनॉल और यह कैसे बनता है?

एथेनॉल खेती से सीधा जुड़ा हुआ विषय है और खासकर गन्ने और मक्का की खेती करने वाले किसानों के लिए यह गेमचेंजर है. देखा जाए तो एथेनॉल एक जैव ईंधन (Biofuel) है, जो गन्ने के रस, मोलासेस (शीरा), मक्का, चावल और अन्य कृषि उत्पादों से बनाया जाता है. इसे पेट्रोल में 20 फीसदी तक मिलाया जाता है. इसे E20 पेट्रोल कहते हैं, जो गन्ने के रस, मोलासेस (शीरा), मक्का, चावल और अन्य कृषि उत्पादों से बनाया जाता है.

कैसे होता है तैयार

सबसे पहले कच्चे माल के रूप में मक्का, गन्ने का रस, शीरा या अन्य स्टार्चयुक्त फसल को एथेनॉल प्लांट में लाया जाता है. अगर मक्का का इस्तेमाल कर रहे हैं तो उसे बारीक पीसकर आटे जैसी अवस्था में बदल दिया जाता है.

पिसे हुए मक्का या अन्य कच्चे माल को पानी के साथ मिलाकर एक मिश्रण तैयार किया जाता है, जिसे स्लरी कहा जाता है. इसके बाद तापमान और pH को नियंत्रित किया जाता है.

इसके बाद इसमें विशेष एंजाइम मिलाए जाते हैं. ये एंजाइम मक्का या अन्य फसलों में मौजूद स्टार्च को पहले जटिल शर्करा और फिर सरल शर्करा में बदल देते हैं. बाद में मिश्रण को ठंडा करके बड़े टैंकों में भेजा जाता है. यहां यीस्ट (खमीर) मिलाया जाता है. यीस्ट शर्करा को खाकर उसे एथेनॉल और कार्बन डाइऑक्साइड (CO₂) में बदल देता है.

आमतौर पर यह प्रोसेस 40 से 80 घंटे तक चलती है. किण्वन पूरा होने पर मिश्रण में लगभग 17-18 फीसदी एथनॉल होता है.

बाद में आसवन (Distillation) तकनीक से किण्वित मिश्रण को डिस्टिलेशन कॉलम में भेजा जाता है. यहां गर्मी देकर एथेनॉल को अन्य तरल और ठोस पदार्थों से अलग किया जाता है. एथेनॉल वाष्प के रूप में ऊपर उठता है और अलग कर लिया जाता है.

डिस्टिलेशन के बाद एथेनॉल की शुद्धता लगभग 95 फीसदी तक पहुंच जाती है. इसके बाद इसे मॉलेक्यूलर सिव (Molecular Sieve) जैसी तकनीक से और शुद्ध किया जाता है, जिससे पानी की बची हुई मात्रा भी निकल जाती है.

तैयार होता 99 फीसदी शुद्ध एथेनॉल

इन सब प्रक्रिया से गुजरने के बाद करीब 99 फीसदी शुद्ध एथेनॉल प्राप्त होता है,। इसे बड़े स्टोरेज टैंकों में रखा जाता है और फिर इसकी आगे आपूर्ति की जाती है,।

एथेनॉल ब्लेंडिंग में भारत कितना आगे पहुंचा?

पेट्रोलियम प्लानिंग एंड एनालिसिस सेल (PPAC) के ताजा आंकड़ों के अनुसार, भारत एथेनॉल ब्लेंडिंग के अपने महत्वाकांक्षी लक्ष्य तक पहुंच चुका है. एथेनॉल सप्लाई वर्ष (ESY) 2025-26 में नवंबर 2025 से मार्च 2026 के दौरान पेट्रोल में एथेनॉल ब्लेंडिंग का स्तर 20 फीसदी दर्ज किया गया.

सरकार किसानों को क्यों दे रही है बढ़ावा

-किसान की होगी अच्छी कमाई, गन्ना-मक्का का नया बाजार, एक्स्ट्रा डिमांड से अच्छे रेट.

-तेल का आयात घटेगा. अभी भारत 85 फीसदी कच्चा तेल बाहर से मंगाता है.

-प्रदूषण कम. E20 से 30 फीसदी कम कार्बन निकलता है.

किसान को होगा सीधा फायदा

-गन्ना की खेती को मिलेगा बढ़ावा, शीरे के अलावा सीधे रस से भी इथेनॉल बन रहा है.

-इथेनॉल डिमांड बढ़ने से मक्का की खेती से किसानों को होगा अधिक फायदा.

-सरकार मक्का उत्पादन बढ़ाने पर फोकस कर रही है, जिसके लिए बीज पर सब्सिडी भी दे रही है.

-किसान FPO बनाकर प्लांट लगा सकते हैं.

-पराली जलाने की समस्या कम होगी.

आज दुनिया-भर में पेट्रोल की कमी को लेकर मारामारी है ऐसे में एथेनॉल की डिमांड दिनोंदिन बढ़ेगी जिसका फायदा किसानों को मिलाना तय है, इसलिए अब गन्ना और मक्का जैसी फसल किसानों के लिए गेमचेंजर साबित हो सकती है

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