Government Scheme. खेती से अच्छी पैदावार लेने के लिए खेत की मिट्टी में कार्बन का होना बहुत जरुरी है. इस का पता किसान को तब पता चलता है जब पैदावार मैं कमी आने लगती है और जब वह मिट्टी जाँच कराता है, इसलिए खेती में इन बातों का ध्यान रखना जरुरी है. सरकार भी इस दिशा में अनेक कदम उठाती है.

हाल ही में कर्नाटक सरकार ने एक 3 वर्षीय महत्वाकांक्षी वसुधामृत योजना की पहल की है. इस योजना से सुधरेगा खेती का मृदा स्वास्थ्य अच्छा होगा, रासायनिक उर्वरकों पर निर्भरता कम होगी और बढ़ेगी खेती की उत्पादकता बढ़ेगी.

भारत में खेती की सब से बड़ी चुनौतियों में से एक है लगातार घटती मिट्टी की उर्वरता. वर्षों से रासायनिक उर्वरकों के असंतुलित उपयोग, फसल अवशेषों के उचित प्रबंधन की कमी तथा जैविक पदार्थों के कम इस्तेमाल के कारण अधिकांश कृषि भूमि में जैविक कार्बन का स्तर घटता जा रहा है. इस का सीधा असर मिट्टी की उत्पादकता, जल धारण क्षमता और फसलों की गुणवत्ता पर पड़ रहा है.

इसी चुनौती से निबटने के लिए कर्नाटक सरकार ने वर्ष 2026-27 के बजट में ‘वसुधामृत कार्यक्रम’ की घोषणा की है. इस कार्यक्रम का उद्देश्य अगले 3 वर्षों में राज्य की कृषि भूमि में जैविक कार्बन बढ़ा कर मिट्टी के भौतिक, रासायनिक और जैविक गुणों को मजबूत करना है, ताकि खेती अधिक टिकाऊ और लाभदायक बन सके.

क्यों जरूरी है जैविक कार्बन?

मिट्टी में मौजूद जैविक कार्बन को उस की जीवनशक्ति माना जाता है. यही तत्व मिट्टी को भुरभुरी बनाता है, पानी रोकने की क्षमता बढ़ाता है और पौधों को आवश्यक पोषक तत्व उपलब्ध कराने में मदद करता है.

जैविक कार्बन पर्याप्त होने पर :

-मिट्टी की उर्वरता बढ़ती है.

-सूखा और अधिक वर्षा जैसी परिस्थितियों का प्रभाव कम होता है.

-लाभकारी सूक्ष्मजीव सक्रिय रहते हैं.

-रासायनिक उर्वरकों की आवश्यकता घटती है.

-फसलों की पैदावार और गुणवत्ता बेहतर होती है.

वसुधामृत कार्यक्रम की मुख्य विशेषताएं:

कर्नाटक सरकार इस कार्यक्रम के तहत किसानों को पर्यावरण अनुकूल खेती अपनाने के लिए प्रोत्साहित करेगी. इस का मुख्य फोकस मिट्टी में जैविक पदार्थ बढ़ाने और प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण पर रहेगा.

सरकार की इस पहल का प्रमुख उद्देश्य कृषि भूमि में जैविक कार्बन बढ़ाना, मिट्टी के भौतिक, रासायनिक एवं जैविक गुणों में सुधार करना, टिकाऊ एवं पर्यावरण-अनुकूल खेती को बढ़ावा और जल संरक्षण और पोषक तत्वों की उपलब्धता बढ़ाना है. ऐसा करने से खेती की लागत भी कम होगी और किसानों का मुनाफा बढ़ेगा.

कैसे बढ़ेगा मिट्टी का जैविक कार्बन?

विशेषज्ञों के अनुसार जैविक कार्बन बढ़ाने के लिए कई उपाय अपनाए जा सकते हैं जिस में :

-गोबर की खाद और कंपोस्ट का उपयोग करना, हरी खाद (ग्रीन मैन्योरिंग).

-फसल अवशेषों को जलाने के बजाय खेत में मिलाना.

-खेती में वर्मी कंपोस्ट का प्रयोग करना.

-जैव उर्वरकों का उपयोग.

-मल्चिंग और संरक्षण कृषि तकनीक.

-खेती में फसलचक्र को अपनाना एवं दलहनी फसलों को शामिल करना.

इस तरह के उपायों से मिट्टी की गुणवत्ता धीरे-धीरे बेहतर होती है और लंबे समय तक उत्पादन क्षमता बनी रहती है.

किसानों को क्या होंगे लाभ?

यदि कार्यक्रम प्रभावी ढंग से लागू होता है तो किसानों को कई प्रत्यक्ष लाभ मिल सकते हैं :

-किसानों की खेती में लगने वाली लागत में कमी आएगी.

-रासायनिक खादों पर निर्भरता घटेगी.

-सिंचाई की आवश्यकता कम हो सकती है.

-मिट्टी लंबे समय तक उपजाऊ बनी रहेगी.

-फसल उत्पादन अधिक स्थिर होगा.

-जलवायु परिवर्तन के प्रभावों का सामना करने की क्षमता बढ़ेगी.

-कृषि आय में दीर्घकालीन वृद्धि संभव होगी.

आज देश के कई हिस्सों में अनियमित वर्षा, सूखा और अत्यधिक तापमान जैसी समस्याएं बढ़ रही हैं. ऐसी परिस्थितियों में जैविक कार्बन से भरपूर मिट्टी पानी को अधिक समय तक रोक कर रखती है तथा पौधों को कठिन मौसम में भी सहारा देती है.

इस कारण वसुधामृत कार्यक्रम केवल मृदा सुधार योजना नहीं, बल्कि जलवायु-स्मार्ट कृषि की दिशा में भी महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है.

देश में पहले से मृदा स्वास्थ्य कार्ड, प्राकृतिक खेती, जैविक खेती तथा परंपरागत कृषि विकास जैसी योजनाएं पहले से चल रही हैं, ऐसे में कर्नाटक का यह कार्यक्रम यदि सफल रहता है तो अन्य राज्य भी मिट्टी में जैविक कार्बन बढ़ाने के लिए इसी प्रकार की योजनाएं लागू की जा सकती हैं. विशेषज्ञों का मानना है कि भविष्य की खेती केवल अधिक उत्पादन पर नहीं, बल्कि स्वस्थ मिट्टी पर निर्भर करेगी.

लिहाजा, फार्म एन फ़ूड का मानना है कि हर किसान को वर्ष में कम से कम एक बार अपनी मिट्टी की जांच करानी चाहिए और जैविक पदार्थ बढ़ाने पर विशेष ध्यान देना चाहिए. खेत में फसल अवशेष जलाने के बजाय उन्हें कंपोस्ट या मल्च के रूप में उपयोग करना, गोबर की अच्छी तरह सड़ी खाद डालना तथा फसलचक्र अपनाना मृदा स्वास्थ्य सुधारने के सब से सरल और प्रभावी उपाय हैं.

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