Sheep-Goat Farming-
भाकृअनुप-केंद्रीय भेड़ एवं ऊन अनुसंधान संस्थान, अविकानगर की ओर से मालपुरा भेड़ परियोजना के तहत 16 सितंबर, 2026 को पशु स्वास्थ्य शिविर लगाया गया. शिविर में भेड़बकरीपालकों के पशुओं की जांच के साथ उन्हें पशुओं को स्वस्थ रखने के जरूरी उपायों की जानकारी दी गई.
1,475 पशुओं को मिला मुफ्त इलाज
संस्थान के निदेशक डा. अरुण कुमार तोमर के मार्गदर्शन में आयोजित इस शिविर में 59 भेड़बकरीपालक परिवारों के कुल 1,475 पशुओं की स्वास्थ्य जांच की गई. इन में 1,255 मालपुरा नस्ल की भेड़ें और 220 बकरियां शामिल थीं. बीमार और जरूरतमंद पशुओं का उपचार किया गया. पशुपालकों को पशुओं के बचाव के लिए जरूरी दवाएं भी मुफ्त दी गईं.
108 पशुपालकों ने लिया हिस्सा
शिविर में कुल 108 पशुपालक शामिल हुए. इन में 74 पुरुष और 34 महिलाएं थीं. पशुपालकों ने अपने पशुओं की स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं वैज्ञानिकों और पशु चिकित्सकों को बताईं. इस के बाद वैज्ञानिकों ने पशुओं में दिखाई देने वाले लक्षणों के आधार पर इलाज और बचाव के उपाय बताए.
समय पर टीकाकरण जरूरी
डा. सिद्धार्थ सारथी मिश्रा ने पशुपालकों को बताया कि भेड़बकरियों को स्वस्थ रखने के लिए हर साल समय पर टीकाकरण कराना जरूरी है. इस के साथ पशुओं को खनिज मिश्रण और जरूरी पोषक तत्व देना चाहिए. पेट के कीड़ों से बचाने के लिए समयसमय पर कृमिनाशक दवा देने की भी सलाह दी गई.
संतुलित आहार, सेहत अपार
वैज्ञानिकों ने पशुपालकों को पशुओं के खानपान पर विशेष ध्यान देने को कहा. मौसम के अनुसार सूखा चारा, हरा चारा और संतुलित आहार देने तथा पशुओं को साफसुथरे और सुरक्षित स्थान पर रखने की जानकारी दी गई.
अच्छे पशु चुन कर बढ़ाएं झुंड की गुणवत्ता
शिविर में मालपुरा भेड़ और सिरोही बकरी की नस्ल सुधार पर भी चर्चा हुई. वैज्ञानिकों ने बताया कि अच्छी नस्ल और स्वस्थ पशुओं से बेहतर बच्चे प्राप्त किए जा सकते हैं. इस के लिए पशुपालकों को हर साल बीजू मेंढा और बकरा बदलने की सलाह दी गई. इस के अलावा पशुओं की पहचान और रिकौर्ड रखने के लिए टैगिंग के महत्व के बारे में भी पशुपालकों को जानकारी दी गई. Sheep-Goat Farming





