Soil Health. फलदार पौधों की बढ़वार के लिए 16 पोषक तत्त्वों की जरूरत होती है. इन में से किसी भी तत्त्व की जमीन में कमी होने से पौधों की बढ़वार पर उलटा असर पड़ता है. पौधों को 3 खास तत्त्व कार्बन, हाइड्रोजन व औक्सीजन, हवा व पानी से मिलते हैं, बाकी 13 तत्त्वों को पौधे जमीन से हासिल करते हैं. आमतौर पर नाइट्रोजन, फास्फोरस व पोटैशियम के अलावा बाकी तत्त्वों की जमीन में कमी नहीं होती है, लेकिन लगातार फसल लेते रहने से इन तत्त्वों की भी कमी होने लगी है, जिसे उर्वरकों व खादों द्वारा पूरा किया जाता है.

फलदार पौधों से अच्छा व ज्यादा उत्पादन, बाग की मिट्टी की उर्वरा ताकत पर निर्भर करता है. सभी तरह की जमीन की उर्वरा शक्ति भी समान नहीं होती है. किसी भी स्थान पर बाग लगाने से पहले उस इलाके की मिट्टी के बारे में पूरी जानकारी लेना जरूरी है. बगीचा लगाना बहुत लंबे समय का काम है. खराब व कम उत्पादक मिट्टी में बाग लगाने से फलदार पौधों की बढ़वार नहीं होती है. लिहाजा बागों से ज्यादा पैदावार लेने के लिए जमीन की उर्वरा ताकत का पता लगाना जरूरी है. इस के लिए मिट्टी की जांच करानी चाहिए. जांच के आधार पर ही फलदार पौधों का चयन और पौधों के लिए खाद व उर्वरकों की मात्रा तय की जाती है. इस से मिट्टी की क्षारीयता व लवणीयता के बारे में भी पता चलता है.

मिट्टी जांच के लिए आमतौर पर 20 सेंटीमीटर की गहराई से मिट्टी का नमूना लिया जाता है, परंतु फलदार पौधों की जड़ें गहराई में जाती हैं. इसलिए सतही नमूने के साथ एक फुट, 2 फुट व 3 फुट गहराई से भी अलगअलग नमूने लेने चाहिए.

नमूना लेने से पहले खेत का ढाल, मिट्टी का रंग, गठन व फसल प्रबंधन वगैरह की जानकारी होनी चाहिए. खेत की मिट्टी की बनावट व ढलान समान न हो तो खेत को अलगअलग हिस्सों में बांट कर हर हिस्से का अलग नमूना लेना चाहिए.

मिट्टी की ऊपरी सतह से घास साफ कर के नमूने लेने के लिए 20 सेंटीमीटर की गहराई तक का ‘वी’ आकार का गड्ढा बनाएं, फिर इस की दीवार के साथ पूरी गहराई तक मिट्टी की एक इंच मोटी एक समान परत काट कर साफ बालटी में रखें. उसी जगह से एक फुट, 2 फुट व 3 फुट गहराई से मिट्टी के अलगअलग नमूने भी लें.

अलगअलग जगहों से ली गई मिट्टी साफ कपड़े पर डाल कर फैलाएं व अच्छी तरह मिला कर 4 भागों में बांटें. 4 भागों में से आमनेसामने के 2 भागों की मिट्टी को फिर मिलाएं और फिर से 4 भाग बनाएं और फिर आमनेसामने के 2 भागों की मिट्टी को मिलाएं. यह काम तब तक दोहराएं जब तक कि मिट्टी आधा किलो न रह जाए. अब इस मिट्टी को कपड़े की साफ थैली में डाल कर मिट्टी जांच प्रयोगशाला में भेजना चाहिए.

ध्यान रखें कि रास्ता, सिंचाई की नाली, पुरानी मेंड़, खाद के ढेर, पेड़ के नीचे, कुएं के पास, दलदली जगहों वगैरह से मिट्टी का नमूना नहीं लेना चाहिए.

प्रयोगशाला में जांच के बाद इन बातों की जानकारी किसान को दी जाती है:

जैविक कार्बन व नाइट्रोजन: मिट्टी में जैविक पदार्थ कितना है, इस के आधार पर जैविक खाद की सिफारिश की जाती है. जैविक खाद से मिट्टी की संरचना व गठन बना रहता?है, जिस से पानी लेने की कूवत बढ़ती है.

फास्फोरस: फास्फोरस का इस्तेमाल पौधे की बढ़वार व प्रजनन क्रिया में होता है. यह पौधों में ऊर्जा, प्रकाश संश्लेषण, शर्कराओं और स्टार्च के इस्तेमाल, पौधों के अंदर पोषक तत्त्वों के परिवहन और आनुवांशिक लक्षणों को एक पीढ़ी से अगली पीढ़ी तक पहुंचाने में भी मदद करता है.

पोटाश: खेतों में लगातार और सघन खेती करने से पोटाश की कमी होने लगी है. पोटाश से फलों की चमक बढ़ती है, जिस से बाजार में भाव ज्यादा मिलते हैं. यह पौधों को गरमी व सर्दी से बचाने में भी मदद करता है. फास्फोरस की तरह पोटाश उर्वरक भी जड़ क्षेत्र के 2-3 इंच नीचे डाला जाना अच्छा रहता है.

पीएच मान : यह मिट्टी की क्षारीयता व अम्लीयता को बताता है. इस के आधार पर क्षारीय व लवणीय जमीन में सुधार की सिफारिश की जाती है. जिप्सम व हरी खाद द्वारा मिट्टी किस तरह सुधारी जाए, इस के पीएच मान की जानकारी देता है. 7 से 7.5 के बीच की पीएच होने पर मिट्टी सामान्य मानी जाती है.

विद्युत चालकता : विद्युत चालकता जमीन में मौजूद घुलनशील लवणों की जानकारी देती है. घुलनशील लवणों की मात्रा ज्यादा होने पर गरमी के मौसम में मिट्टी सूखने पर उस की ऊपरी सतह पर लवण की सफेद परत जमा हो जाती है. पौधे छोटे रह जाते हैं और पीले हो कर मर जाते हैं. ज्यादा विद्युत चालकता वाले इलाकों में फलों के बाग लगाने की सिफारिश नहीं की जाती है.

जिप्सम : मिट्टी का पीएच मान 8.5 से ज्यादा होने पर क्षारीयता का असर फलों पर पड़ता है. ऐसी मिट्टी में, जिप्सम की जांच कर पौधों में जिप्सम डालने की सिफारिश की जाती है.

गहराई : बाग लगाने के लिए मिट्टी की गहराई बहुत अहम होती है. आमतौर पर फलदार पौधों के लिए 10 फुट गहराई तक कठोर परत नहीं होनी चाहिए. कठोर परत वाले इलाकों में बाग लगाने से पौधों की जड़ों का विकास ठीक ढंग से नहीं होता. पौधों में डाई बैक पोषक तत्त्वों की कमी की समस्या आने से फल झड़न, शाखा सूखना, पौधे सूखना, उकठा वगैरह समस्याएं आती हैं और बगीचे खत्म हो जाते हैं.    Soil Health

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