किसी भी फसल के बेहतर उत्पादन में उच्च गुणवत्ता वाले बीज (seed production) की भूमिका सबसे अहम होती है. शोध बताते हैं कि अच्छे बीजों के प्रयोग से फसल की पैदावार 20 से 30 प्रतिशत तक बढ़ाई जा सकती है. अक्सर किसान कम कीमत के लालच में घटिया बीज खरीद लेते हैं, जिसका नतीजा कम उपज और आर्थिक नुकसान के रूप में सामने आता है.
बीज कितने प्रकार के होते हैं
किसानों के लिए बीजों की श्रेणियों को समझना बेहद जरूरी है. कृषि विशेषज्ञों के अनुसार बीज मुख्य रूप से तीन प्रकार के होते हैं.
प्रजनक बीज (Breeder Seed)
• रंग: पीला
• उत्पादन: पौधा प्रजनक की प्रत्यक्ष निगरानी में
• विशेषता: 100% आनुवांशिक शुद्धता
• उपयोग: आधार बीज तैयार करने के लिए
प्रजनक बीज का प्रमाणीकरण नहीं बल्कि निगरानी (Monitoring) की जाती है.
आधार बीज (Foundation Seed)
• रंग: सफेद
• उत्पादन: प्रजनक बीज से
• उत्पादन स्थल – राष्ट्रीय बीज निगम, राज्य बीज निगम, और कृषि विश्वविद्यालय
• प्रमाणीकरण: अधिकृत संस्था द्वारा
इसकी शुद्धता प्रजनक बीज से थोड़ी कम होती है.
प्रमाणित बीज (Certified Seed)
• रंग: नीला
• उत्पादन: आधार बीज से
• प्रमाणीकरण: राज्य बीज प्रमाणीकरण संस्था
• उपयोग: सामान्य किसान फसल उत्पादन के लिए
यही बीज खेतों में बोने के लिए सबसे उपयुक्त माना जाता है.
बीज हमेशा भरोसेमंद स्रोत से ही खरीदें
सरकारी बीज एजेंसियों से ही बीज लें. प्रमाणित टैग और सील अवश्य जांचें. जैविक खाद का अधिक उपयोग करें
बीज उपचार क्यों है जरूरी
बोआई से पहले बीज उपचार करने से रोगों का खतरा कम होता है और अंकुरण बेहतर होता है.
• बीज को रसायनों या जैविक उपचार से उपचारित करें,
• बीज प्रमाणीकरण संस्था के निर्देशों का पालन करें,
• कटाई के बाद बीजों को अच्छी तरह सुखाएं,
• भंडारण से पहले 2% बीएचसी डस्ट से उपचार करें,
गेहूं के बीज उत्पादन की सही विधि
• जुताई के बाद बीज 5–6 सेमी गहराई पर बोएं,
• कतार से कतार दूरी: 25 सेमी रखें.
• बीज मात्रा: 100 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर ले.
• बोआई विधि: सीड ड्रिल या हाथ हल से बोआई करें.
उर्वरक व पोषक तत्व प्रबंधन
अच्छी बीज पैदावार के लिए प्रति हेक्टेयर नाइट्रोजन 120 किलोग्राम, फास्फोरस 50–60 किलोग्राम और पोटाश 40 किलोग्राम का प्रयोग करें. उर्वरकों का प्रयोग कृषि विशेषज्ञ की सलाह से करें.
बीज फसलों में सिंचाई प्रबंधन
पहली सिंचाई बोआई के 20–25 दिन बाद, दूसरी कल्ले निकलते समय, तीसरी गांठ बनने की अवस्था में और अंतिम सिंचाई फूल आने पर या 90–95 दिनों बाद करें. समय पर सिंचाई बीज की गुणवत्ता बनाए रखती है.
दलहनी फसलों के बीज उत्पादन की जानकारी
• बीजों को कीटनाशक व राइजोबियम से उपचारित करें
• चना और मसूर के लिए उपयुक्त समय: अक्टूबर–नवंबर हैं.
• 25–30 दिन के भीतर निराई-गुड़ाई जरूरी है.
भंडारण से पहले सावधानी
• बीजों को अच्छी तरह सुखाएं
• नमी 9% से अधिक न रहने दें.
यदि किसान स्वयं उम्दा बीज उत्पादन करें और वैज्ञानिक तरीकों को अपनाएं, तो न केवल लागत घटाई जा सकती है, बल्कि फसल की गुणवत्ता और पैदावार दोनों में उल्लेखनीय बढ़ोतरी संभव है.





