आज देशभर में डिजिटल लेन-देन और ई-कॉमर्स का दायरा तेजी से बढ़ रहा है. गांव-देहात के किसान भी ऑनलाइन खरीदारी करके खाद, बीज और कीटनाशक घर बैठे मंगाने लगे हैं. लेकिन किसानों तक पहुंचते ये खतरनाक कीटनाशक (Pesticides) क्या सुरक्षा के मापदंडों पर खरे उतरने के साथ-साथ नियमों की भी अनदेखी कर रहे हैं?

नियमों की हो रही अनदेखी, किसान से खिलवाड़

क्रॉपलाइफ इंडिया के अनुसार, ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर कई ऐसे कीटनाशक बिक रहे हैं, जिनकी न तो गुणवत्ता की गारंटी है और न ही उनके स्रोत का कोई ठोस रिकॉर्ड. भारत में अनेक उत्पादों की ऑनलाइन बिक्री बढ़ रही है, कृषि क्षेत्र भी इससे अछूता नहीं है. अनेक कीटनाशक भी किसान ऑनलाइन तरीके से घर बैठे मंगा रहे हैं. क्या वे पूरी तरह किसान की कसौटी पर खरे उतरते हैं?

कीटनाशकों के बिक्री उद्योग का मानना है कि कीटनाशक कोई सामान्य उपभोक्ता वस्तु नहीं है. यह एक सख्ती से नियंत्रित रसायन है, जिसकी बिक्री, भंडारण और इस्तेमाल से पहले कई स्तरों पर जांच और अनुमति जरूरी होती है. ऑफलाइन बाजार में इन नियमों का पालन अपेक्षाकृत बेहतर ढंग से होता है, लेकिन ऑनलाइन बिक्री में यही निगरानी कमजोर पड़ जाती है.

फसल संरक्षण संगठन की मांग

क्रॉपलाइफ इंडिया, 17 अनुसंधान एवं विकास आधारित फसल संरक्षण कंपनियों का संगठन है. उसने ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म्स पर अनाधिकृत फसल संरक्षण उत्पादों की बिक्री को लेकर गंभीर चिंता जताई है. संगठन का कहना है कि ऑनलाइन कीटनाशक बिक्री में नियामक निगरानी, नियमों का पालन और जवाबदेही को तत्काल मजबूत करने की जरूरत है. उन्होंने यह भी कहा कि जब सरकार ड्राफ्ट पेस्टीसाइड्स मैनेजमेंट बिल, 2025 के तहत कीटनाशक कानूनों की समीक्षा कर रही है, तब ऑनलाइन बिक्री से जुड़े नए जोखिमों को स्पष्ट रूप से शामिल किया जाना चाहिए.

यह मुद्दा नई दिल्ली में आयोजित क्रॉपलाइफ इंडिया के ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म्स पर फसल संरक्षण उत्पादों की बिक्री के विषय पर उठाया गया.

किसने क्या कहा

कृषि आयुक्त, कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय, भारत सरकार के डॉ. पी. के. सिंह ने कहा कि जब खतरनाक कृषि-इनपुट्स ऑनलाइन बेचे जाते हैं, तब ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म्स द्वारा केवल विक्रेताओं के जीएसटी जैसे बुनियादी दस्तावेज जांचना पर्याप्त नहीं है. उन्होंने गुणवत्ता जांच, उत्पाद की पहचान और आपूर्ति श्रृंखला की जवाबदेही को मजबूत करने की जरूरत बताई और कहा कि इन बातों पर पेस्टीसाइड्स मैनेजमेंट बिल, 2025 के तहत ध्यान दिया जाना चाहिए.

केंद्रीय कीटनाशक बोर्ड एवं पंजीकरण समिति (CIB&RC) के सचिव डॉ. सुभाष चंद ने कहा कि डिजिटलीकरण और ई-कॉमर्स ग्रामीण भारत में तेजी से बढ़ रहे हैं, लेकिन इसके साथ नए जोखिम भी सामने आ रहे हैं. उन्होंने बताया कि कीटनाशक खतरनाक उत्पाद हैं और जैसे-जैसे ऑनलाइन बिक्री बढ़ेगी, गुणवत्ता, नियमों का पालन और किसान सुरक्षा की जिम्मेदारी प्लेटफॉर्म्स और निर्माताओं—दोनों की होगी.

ओपन नेटवर्क फॉर डिजिटल कॉमर्स (ONDC) के कृषि डोमेन लीड रवि शंकर ने कहा कि बेहतर जानकारी, सही विवरण और ट्रेसबिलिटी से किसानों को असली उत्पाद पहचानने में मदद मिलेगी और नकली या गलत उत्पादों का जोखिम कम होगा.

क्रॉपलाइफ इंडिया के चेयरमैन अंकुर अग्रवाल ने कहा, “हम ई-कॉमर्स पर कीटनाशकों की बिक्री के खिलाफ नहीं हैं. हमारा उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि नियम और उनके पालन की व्यवस्था डिजिटल व्यापार के अनुरूप हों. अनधिकृत उत्पादों को रोकना सरकार और उद्योग—दोनों की साझा जिम्मेदारी है. यह किसानों की सुरक्षा, खाद्य सुरक्षा और उपभोक्ताओं के भरोसे के लिए जरूरी है.

कौन बेच सकता है कीटनाशक

फसल संरक्षण उत्पादों की बिक्री और वितरण कीटनाशक अधिनियम, 1968 और कीटनाशक नियम, 1971 के तहत नियंत्रित होती है. इन नियमों के अनुसार, कीटनाशक केवल लाइसेंस प्राप्त विक्रेता ही बेच सकते हैं, वह भी उन्हीं उत्पादों के लिए जो उनके लाइसेंस पर दर्ज हों. हालांकि, मौजूदा व्यवस्था में ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म्स को कीटनाशक कानून के तहत अलग से लाइसेंस लेने की जरूरत नहीं है. न ही उन पर यह साफ जिम्मेदारी है कि वे यह जांचें कि ऑनलाइन बेचे जा रहे उत्पाद विक्रेता के लाइसेंस में शामिल हैं या उनके साथ वैध प्रिंसिपल सर्टिफिकेट है.

क्रॉपलाइफ इंडिया ने साफ किया कि कीटनाशक नियमों में 2022 में जोड़ा गया नियम 10E ऑनलाइन या घर-घर डिलीवरी की अनुमति देता है, लेकिन यह लाइसेंस, प्रिंसिपल सर्टिफिकेट, स्वीकृत परिसर या भौगोलिक सीमाओं से जुड़े मौजूदा नियमों को खत्म नहीं करता.

डिजिटल व्यापार एक जरूरी और तेजी से बढ़ता माध्यम है. आगे का रास्ता यह है कि इसे सही नियमों के साथ बढ़ने दिया जाए. जैसे-जैसे बिक्री के तरीके बदलते हैं, वैसे-वैसे नियम और उनके पालन की व्यवस्था भी बदलनी चाहिए, ताकि किसानों को सही और सुरक्षित उत्पाद मिलें और पूरे सिस्टम पर भरोसा बना रहे.

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