Agriculture Fair 2026 : बिहार की राजधानी पटना में विगत दिनों तीन दिवसीय बागबानी महोत्सव (Agriculture Fair)  का आयोजन किया गया. गांधी मैदान में आयोजित इस मेले का उद्घाटन राम कृपाल यादव, कृषि मंत्री, बिहार द्वारा किया गया. इस मौके पर उन्होंने कहा, “बिहार की असली ताकत खेतों में पसीना बहाने वाले हमारे किसान भाई-बहन हैं. यदि किसान मजबूत होंगे, तभी बिहार मजबूत बनेगा.

बिहार का किसान बन रहा उद्यमी

आज बिहार की खेती एक नए युग में प्रवेश कर चुकी है. यह केवल बदलाव नहीं, बल्कि कृषि का नवजागरण है, जहां किसान अब उत्पादक के साथ-साथ उद्यमी और निर्यातक भी बन रहा है. बिहार को कृषि निर्यात नीति के जरिए किसानों की उपज को सीधे वैश्विक बाजार से जोड़ा जा रहा है. मखाना, शहद, फल-सब्जियां, मसाले और G.I. टैग प्राप्त उत्पाद बिहार की गुणवत्ता और पहचान को मजबूत कर रहे हैं.

राष्ट्रीय मखाना बोर्ड और प्रस्तावित शहद नीति आय वृद्धि का सशक्त आधार हैं. हर जिले में विशेष फसल आधारित क्लस्टर बनाकर खेती को रोजगार, उद्योग और निर्यात से जोड़ा जाएगा. बागबानी और विशिष्ट फसलें आज किसानों के लिए एटीएम के समान हैं, जो त्वरित आय और स्थायी समृद्धि का मार्ग खोलती हैं.

सरकार का लक्ष्य

अब खेती को कम लागत और अधिक मुनाफे की दिशा में तेजी से आगे बढ़ाया जा रहा है. धान और गेहूं के साथ-साथ ड्रैगन फ्रूट, स्ट्रॉबेरी, केला, आंवला, सब्जी एवं मसाला फसलें जैसे मिर्च, हल्दी, धनिया, लहसुन और प्याज किसानों की आय बढ़ाने का नया इंजन बन सकती हैं.

सरकार का लक्ष्य है कि बिहार के हर जिले में स्थानीय जलवायु के अनुरूप हाई-वैल्यू क्लस्टर विकसित किए जाएं, जहां नर्सरी से लेकर उत्पादन, पैकिंग, प्रोसेसिंग और बिक्री की समुचित व्यवस्था एक ही स्थान पर हो.

कृषि मंत्री ने कहा

इस अवसर पर कृषि मंत्री रामकृपाल यादव ने कहा, “नई सरकार का फोकस तीन स्तंभों तकनीक, निवेश और रोजगार पर आधारित है. ड्रिप सिंचाई, मल्चिंग, पॉली एवं नेटहाउस, टिशू कल्चर पौधे, मृदा परीक्षण, समेकित कीट-रोग प्रबंधन और सटीक पोषण प्रबंधन जैसी आधुनिक तकनीकों को अपनाने पर विशेष बल दिया जा रहा है. उद्यान निदेशालय के माध्यम से किसानों को प्रशिक्षण, प्रदर्शन प्लॉट, तकनीकी मार्गदर्शन तथा गुणवत्तापूर्ण पौध एवं बीज उपलब्ध कराए जा रहे हैं.”

उन्होंने आगे कहा कि इन प्रयासों से बागबानी को रोजगार एवं स्वरोजगार का प्रभावी साधन बनाया जा रहा है, जिससे किसानों की आमदनी बढ़ने के साथ-साथ ग्रामीण युवाओं और महिलाओं के लिए भी आजीविका के नए अवसर सृजित हों.

रोजगार का जरिया बन रहा बागबानी

बागबानी केवल खेती नहीं, बल्कि रोजगार का बड़ा स्रोत है. नर्सरी, ग्रेडिंग-सॉर्टिंग, पैकेजिंग, कोल्ड चेन, परिवहन, प्रोसेसिंग, ब्रांडिंग और ई-कॉमर्स के माध्यम से लाखों रोजगार सृजित किए जा सकते हैं. इसके लिए हर प्रखंड में किसान उत्पादक संगठनों को सशक्त किया जा रहा है, जिससे किसानों को बेहतर मूल्य मिल सके और बिचौलियों की भूमिका घटे.

बाजार को मजबूती दे रहा ‘बिहार ब्रांड’

इसी कड़ी में मधुमक्खी पालन और मखाना बिहार की विशिष्ट पहचान हैं. इन क्षेत्रों में समग्र विकास, प्रोसेसिंग, पैकेजिंग, गुणवत्ता जांच और ‘बिहार ब्रांड’ के माध्यम से बाजार तक पहुंच को मजबूत किया जा रहा है. सरकार यह सुनिश्चित करेगी कि योजनाओं का लाभ समय पर, पारदर्शी तरीके से सीधे खेतों तक पहुंचे.

निदेशक उद्यान ने क्या कहा

निदेशक उद्यान, अभिषेक कुमार ने बागबानी महोत्सव (Agriculture Fair ) में किसानों को संबोधित करते हुए कहा-

सरकार की नीतियों का उद्देश्य खेत से बाजार तक मूल्य संवर्धन के माध्यम से अधिक आय और रोजगार सुनिश्चित करना है. उन्होंने बागबानी फसलों के उत्पादन के साथ प्रोसेसिंग एवं निर्यात पर विशेष जोर दिया. ड्रैगन फ्रूट व स्ट्रॉबेरी जैसे एग्जॉटिक फलों तथा ड्रिप, स्प्रिंकलर व माइक्रो-स्प्रिंकलर जैसी आधुनिक सिंचाई तकनीकों को अपनाने का आह्वान किया. मखाना के लिए गठित मखाना बोर्ड निर्यात को नई दिशा देगा और असली परिवर्तन किसानों के खेतों में दिखेगा.

इसके अलावा मखाना के प्रसंस्करण एवं विपणन पर भोला पासवान शास्त्री कृषि महाविद्यालय के वैज्ञानिक डॉ. अनिल कुमार, औषधीय एवं सुगंधित पौधों की खेती पर सी आई एम ए पी, लखनऊ के वैज्ञानिक डॉ. राकेश कुमार तथा प्याज की वैज्ञानिक खेती पर बिहार कृषि विश्वविद्यालय, सबौर के वैज्ञानिक डॉ. एम डी ओझा ने उपयोगी जानकारियाँ दीं. इसके अतिरिक्त ‘पर ड्रॉप मोर क्रॉप’ योजना अंतर्गत सूक्ष्म सिंचाई के लाभों पर अवनीश कुमार द्वारा चर्चा हुई.

कार्यक्रम के दौरान वैज्ञानिकों एवं उद्यान विभाग के पदाधिकारियों के साथ किसानों के संवाद, चित्रकला प्रतियोगिता, क्विज एवं सांस्कृतिक कार्यक्रमों का भी आयोजन किया गया, जिससे महोत्सव और अधिक जीवंत बन गया.

किसानों को मिले पुरस्कार

इस बागबानी महोत्सव (Agriculture Fair ) की प्रदर्शनी में कुल 92 लोगों को प्रथम पुरस्कार, 88 लोगों को द्वितीय पुरस्कार एवं 89 लोगों को तृतीय पुरस्कार प्रदान किया गया, जो कि किसानों के लिए उत्साहवर्धक तो है ही. यहां बिहार के सभी क्षेत्रों से कृषकों ने प्रदर्श लगाएं थे. कुल 807 कृषकों के द्वारा फल, फूल, सब्जी, औषधीय एवं सुगंधीय पौधे आदि के 7696 उत्पादों का प्रदर्शन किया गया था.

इस महोत्सव में लगभग 1500 किसानों की सहभागिता, शहद, मखाना, रोपण सामग्री एवं शहरी कृषि उत्पादों की बिक्री के लिए सहभागिता रही. इससे आने वाले समय में गुणवत्तापरक कृषि उत्पाद के लिए बाजार की मजबूत संभावनाओं को बेहतर किया जा सकता है.

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