Fruit Processing: दुनिया भर में फलों का एक बड़ा बाजार है. आयातनिर्यात के साधन बढ़ने से यह कारोबार लगातार बढ़ता ही जा रहा है. फ्रूट प्रोसेसिंग (Fruit Processing) की नईनई तकनीकें आने के बाद फलों का स्वाद साल भर लिया जा सकता है. फलों के बीज और प्रजातियों में सुधार कर के पूरे साल फल देने वाले पेड़ भी तैयार होने लगे हैं. फलों में सब से ज्यादा पैदावार और खपत के लिहाज से आम सब से खास फल माना जाता था. इसी कारण आम को फलों का राजा कहा जाता है. भारत के अलावा यूएस, जर्मनी, ब्रिटेन, पोलैंड, थाईलैंड, दुबई, साउदी अरब और जमैका में भी बड़ी तादाद में आम पाया जाता है. आम पर बाजारवाद हावी रहा है. जितना प्रचार आम का होता है, उतना शायद ही किसी दूसरे फल का होता हो.
आम की सैकड़ों किस्में
भारत में आम को राष्ट्रीय फल घोषित किया गया है. भारत में करीब 1.5 करोड़ टन आम की पैदावार होती है. देश भर में आम की 1400 किस्में होती हैं. इन में से 210 किस्मों की जानकारी लोगों को है. भारत में लगभग 45 लाख हेक्टेयर जमीन पर आम की खेती होती है. आम अलगअलग आकार और स्वाद के होते हैं. कुछ आम छोटे होते हैं, तो कुछ 2 से ढाई किलोग्राम तक के भी होते हैं.
उत्तर प्रदेश के मलीहाबादी आमों में अनारकली, नयनतारा और जहांआरा खासतौर पर लोगों द्वारा पसंद किए जाते हैं. हुस्नआरा किस्म का आम भी लोगों को पंसद आता है. इस की खास बात यह होती है कि इस में 85 फीसदी गुठली और 15 फीसदी फल होता है. मलीहाबादी दशहरी आम काट कर खाने में बहुत स्वादिष्ठ होता है. इस के अलावा आम की दूसरी किस्में भी खाने में मजेदार होती हैं. चूस कर खाने में मिलासी और काला पहाड़ का कोई जवाब नहीं है. काट कर खाने वाले आमों में शमशुल असमार, चौसा, जौहरी सफेदा और दशहरी अच्छे माने जाते हैं.
आम एक स्वाद अनेक
आम को हर तरह से खाया जाता है. जब यह कच्चा रहता है, तो इस की चटनी बनाई जाती है. पुदीना और गुड़ डाल कर बनाई गई इस की चटनी का खयाल आते ही मुंह में पानी आ जाता है. आम को पका कर काला नमक व जीरा डाल कर इस का पना बनाया जाता है. इसे पीने से गरमी का असर कम होता है. कच्चा आम विटामिन सी से भरपूर होता है. इस में मिठास नहीं होती, जिस से शरीर में शुगर बढ़ने का खतरा कम हो जाता है. आम की चटनी ताजी खाई जाती है. अगर इस को 4-5 दिनों तक रखना हो, तो आम की मीठी चटनी गुड़ डाल कर आम को गरम कर के बनाई जाती है. कच्चे आम का स्वाद पूरे साल महसूस करने के लिए कच्चे आम का अचार कई तरह से बनाया जाता है. जब आम पक जाता है तो इस का मैंगो शेक बना कर पिया जाता है.
आम अलगअलग लोगों पर अपना अलग प्रभाव दिखाता है. इसे खाने से कुछ लोगों को मुंहासे हो जाते हैं. इस में ज्यादा कैलोरी होती है. डायबिटीज के मरीजों को आम का सेवन कम करना चाहिए. आम को पचाना मुश्किल होता है, इसलिए इसे एकसाथ ज्यादा नहीं खाना चाहिए. मोटे लोगों को देशी रसीले आमों का सेवन करना चाहिए. आम को दही और नट्स के साथ खाने से शुगर कम हो जाती है.
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