Animal Care: ज्यादातर पशुपालक अपने दुधारू मवेशियों के खानपान पर ज्यादा ध्यान नहीं देते हैं, पर उन से ज्यादा दूध पाने की उम्मीद लगाए रहते हैं. पशुपालकों के लिए यह जानना बहुत ही जरूरी है कि पशुओं का खानापीन कैसा हो और कब उन्हें कैसा खाना दिया जाए?

चारादाना बेहतर हो: पशुओं को रोज दिए जाने वाले खाने में प्रोटीन, कार्बोहाइड्रेट, वसा, विटामिन और खनिज लवण (मिनरल) का होना जरूरी है.

उन के खानपान के समय में अचानक बड़ा उलटफेर नहीं करना चाहिए. हरा और सूखा चारा खास अनुपात में देना चाहिए और सड़ागला खाना या अनाज कभी नहीं खिलाना चाहिए.

उन्हें रोज की खुराक में 30 ग्राम नमक जरूर दें और खूब पानी पिलाएं. पशुओं की खुराक 2 तरह की होती है. एक खुराक उन्हें मजबूत और स्वस्थ बने रहने के लिए दी जाती है और दूसरी खुराक वह है जिस से उन की दूध देने की कूवत बढ़ती है.

क्या कहते हैं विशेषज्ञ : घास और चारा स्पेशलिस्ट डाक्टर सत्यदेव कुमार कहते हैं कि गाय को चराने और चारा खिलाने के अलावा रोज 1 किलोग्राम दाना भी देना चाहिए, ताकि उस का शरीर स्वस्थ रह सके.

वहीं गाभिन गाय को खास खाने की दरकार होती है. 6 महीने की गाभिन गाय को 1 से 2 किलोग्राम दाना अलग से खिलाना जरूरी है. रोजाना 3 से 4 किलोग्राम दाना देने से गाय और उस के पेट में पल रहा बच्चा दोनों स्वस्थ रहते हैं.

पशुओं का बीमा कराएं: किसानों और पशुपालकों को राहत देने के लिए साल 1973 में पशु बीमा योजना की शुरुआत की गई, पर इस के सालों बाद भी ज्यादातर पशुपालक अपने पशुओं का बीमा कराने में दिलचस्पी नहीं दिखाते हैं. इस से पशुओं के बीमार पड़ने, बाढ़ में बहने या उन के मरने पर पशुपालकों को ही काफी नुकसान उठाना पड़ता है. महंगे और दुधारू पशुओं का बीमा करा कर पशुपालक बड़े नुकसान की भरपाई आसानी से कर सकते हैं.

घर में करें प्राथमिक उपचार: पशुपालकों को यह समझना चाहिए कि उन के मवेशी ही उन की आमदनी और परिवार को चलाने का जरीया होते हैं, ऐसे में मवेशियों के स्वास्थ्य का खास ध्यान रखने की जरूरत है.

इनसानों की तरह मवेशियों को हलकी चोटचपेट लगती रहती है या छोटीमोटी बीमारियां होती रहती हैं. मवेशियों के तुरंत इलाज के लिए पशुपालकों को फर्स्ट एड बाक्स रखना काफी जरूरी है.

मवेशियों के शुरुआती इलाज की जानकारी रख कर कमाऊ और पालतू मवेशियों को खतरनाक और गंभीर बीमारियों के चंगुल में फंसने से बचाया जा सकता है.

समय पर इलाज नहीं किया तो खतरे में : पशुमवेशियों को कब्ज, हड्डी टूटना, पेट फूलना, घाव होना, सांप का काटना, जहरीला घासपात खा लेना, पागल कुत्ते का काटना, लू लगना, दस्त होना जैसी आम बीमारियां व दिक्कतें होती रहती हैं. अगर इन के शुरुआती लक्षणों पर ध्यान दे कर सही समय पर इलाज शुरू नहीं किया जाता तो मामला जानलेवा साबित हो सकता है.

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