Mulberry Cultivation : किसान नकदी फसल के रूप में अगर शहतूत की नर्सरी तैयार कर के उस की खेती (Mulberry Cultivation) की तरफ कदम बढ़ाएं तो वे न केवल अपने हालात सुधार सकते हैं, बल्कि शहतूत की पत्तियों से कीटपालन करने के इच्छुक किसानों को रोजगार के बेहतर अवसर दे सकते हैं.

रेशमकीटपालन के व्यवसाय में 50 फीसदी खर्च पत्तियों पर ही हो जाता है. यह कारोबार पत्तियों पर ही निर्भर है. पत्तियों पर रेशमकीट का जीवनचक्र चलता है. इसी जीवनचक्र में ये कीट रेशम के कोए बनाते हैं.

नर्सरी तैयार करना

शहतूत के पौधे तैयार करने की कई विधियां हैं :

*             बीज द्वारा ,            *             ग्राफ्टिंग द्वारा

*             लेयरिंग द्वारा,        *             कटिंग द्वारा

कम लागत में उच्च गुणवत्ता के पौधे कटिंग विधि से ही तैयार किए जाते हैं. उन्नत किस्म के शहतूत की कटिंग तैयार करने के लिए 6 से 9 महीने पुरानी टहनियों को काट लेते हैं और उन को छाया में रखते हैं ताकि वे सूखने न पाएं. फिर 6-8 इंच लंबी टहनियों को 45 डिगरी त्रिकोण पर तेज धार के चाकू या सिकटियर से काट लेते हैं, खयाल रखें कि सिरों पर टहनियों के छिलके न निकलने पाएं.

कटिंग करते समय वही टहनी लें, जिस की मोटाई पेंसिल के बराबर हो और उस में 4-5 बड (कली) हों. यदि तुरंत कटिंग न लगानी हो तो टहनियों को बंडल बना कर मिट्टी या बोरे से ढक दें और उन की हलकी सिंचाई करते रहें, जब लगाना हो तब सीधे खेत में रोपाई करें.

कटिंग को लगाने का समय व तरीका :

पौधशाला में शहतूत की कटिंग लगाने का सही समय जुलाईअगस्त व दिसंबरजनवरी होता है. दिसंबरजनवरी में लगाई गई कटिंग जुलाईअगस्त में और जुलाईअगस्त में लगाई गई कटिंग दिसंबरजनवरी में खेत में रोपने के लिए तैयार हो जाती है. पहले छोटीछोटी क्यारियां तैयार करें, फिर 6-6 इंच की दूरी पर लंबीलंबी लाइनें बना लें. इस के बाद 2/3 भाग 3 इंच की दूरी पर लाइनों में तिरछा गाड़ दें. 8-10 लाइनें लगाने के बाद 1 फुट जगह छोड़ दें, ताकि घास निकालने में आसानी हो.

कटिंग लगाने के बाद चारों ओर मिट्टी दबा दें और भुरभुरी गोबर की खाद बिछा कर सिंचाई कर दें. कटिंग से 6-8 पत्तियां आने के बाद 15-20 दिनों पर उर्वरक का इस्तेमाल करें और इस के फौरन बाद सिंचाई करें. दीमक से बचाव के लिए एल्ड्रिन नामक दवा का इस्तेमाल करें.

कब करें रोपाई :

6 महीने बाद नर्सरी में पौधे रोपाई के लिए तैयार हो जाते हैं. 1 एकड़ खेत में करीब 5 हजार पौधों की जरूरत पड़ती है. इन की रोपाई 3×3 मीटर की दूरी पर करें. पौधों के विकास में करीब 1 साल का वक्त लगता है. तीसरे साल से सही देखभाल करने पर 1 एकड़ से करीब 10 हजार किलोग्राम पत्तियों का उत्पादन किया जा सकता है. इतनी पत्तियों पर करीब 300 किलोग्राम कोए का उत्पादन हो सकता है.

शहतूत की प्रजातियां :

के 2, एस 146, टीआर 10, एस 54 वगैरह शहतूत की उन्नत प्रजातियां हैं, जिन की खेती कर के किसान ज्यादा लाभ ले सकते हैं.

कीटनाशक, उर्वरक व सिंचाई :

रोपाई के 2-3 महीने बाद प्रति एकड़ 50 किलोग्राम नाइट्रोजन का इस्तेमाल करें और सिंचाई कर के निराईगुड़ाई करें. जुलाईअगस्त में बारिश न होने पर 15-20 दिनों पर सिंचाई का इंतजाम करें. मईजून में सिंचाई का खास खयाल रखें. दीमक से बचाव के लिए खेत तैयार करते समय प्रति एकड़ 100 किलोग्राम बीएचसी पाउडर 20 फीसदी, एल्ड्रिन 5 फीसदी मिलाएं.

कटाईछंटाई प्रूनिंग :

शहतूत से करीब 15 सालों तक उच्च गुणवत्ता की पत्तियां प्राप्त की जा सकती हैं. इस की कटाईछंटाई जूनजुलाई महीने में जमीन से 6 इंच की ऊंचाई से व दिसंबर के मध्य में जमीन से 3 फुट की ऊंचाई से करते हैं. कटाईछंटाई करते समय खयाल रखें कि पौधे की छाल न निकले.

साल में 2 बार कटाईछंटाई करने से ज्यादा पत्तियां प्राप्त की जा सकती हैं. कटाईछंटाई करने से ज्यादा पत्तियां आने पर ज्यादा लाभ मिलेगा, क्योंकि कोया उत्पादन में 50 फीसदी खर्च पत्तियों पर होता है.

Mulberry Cultivation

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