Donkey Rearing : बेरोजगारी के दौर में लोग नए-नए मौके की तलाश में रहते हैं और इन्हीं में से एक मजेदार रोजगार है गधा पालन. यह आपको अटपटा जरूर लगेगा, लेकिन यह कम खर्च, कम जोखिम वाला फायदे का रोजगार है. आइए जानते हैं कैसे…
स्कीम सरकारी, मुनाफा आपका
सरकार की यह एक अनोखी स्कीम है. इस स्कीम के तहत आपको गधा पालने पर सरकार 50 लाख रुपए तक की मदद दे रही है. यह मजाक नहीं, एक सरकारी स्कीम है, जिसका फायदा आप भी उठा सकते हैं. दरअसल, देश में गधों की संख्या में भरी कमी हो रही है. इसी कमी को पूरा करने के लिए सरकार देश में गधों को पालने वालों को बड़ी सब्सिडी दे रही है. अगर आप भी पशुपालन कर इस अनोखी स्कीम का फायदा उठाना चाहते हैं, तो चलिए जानते हैं क्या है यह स्कीम?
गधों की हो रही कमी, सरकार दे रही सब्सिडी
देश में गधों की पशुगणना के अनुसार गधों की गिनती में भारी कमी आई है. देश के 28 राज्यों में ही गधे हैं. कुछ राज्यों में इनकी संख्या बहुत ही सीमित रह गई है, इसलिए सरकार चाहती है कि इनकी स्वदेशी नस्लें बची रहें.
राष्ट्रीय पशुधन मिशन (NML) में गधे, घोड़े शामिल
राष्ट्रीय पशुधन मिशन योजना की शुरुआत 2014-15 में शुरू हुई थी. इस योजना का मकसद रोजगार बढ़ाना, पशु नस्लों में सुधार करना और दूध, मांस, का कारोबार बढ़ाना है. अब इस योजना में गधे, घोड़े और ऊंटों को भी शामिल कर लिया गया है और सरकार चाहती है कि लोग इन जानवरों को पालें और उनकी नस्लें बचीं रहें.
क्या है योजना
इस योजना के तहत अगर कोई पशुपालक गधे, घोड़े या ऊंट पालन के लिए आवेदन करता है, तो उसे प्रोजेक्ट की कुल लागत का 50 फीसदी रकम सब्सिडी के रूप में मिलेगी. यह मदद नए प्रजनन फार्म या वीर्य स्टेशन बनाने के लिए भी दी जाएगी, जिसकी लिमिट 10 करोड़ रुपए तक हो सकती है.
क्या हैं शर्तें
गधा पालन के लिए न्यूनतम यूनिट 50 मादा और 5 नर है. घोड़े के लिए 10 मादा और 2 नर की न्यूनतम यूनिट तय है. योजना सिर्फ स्वदेशी नस्लों के लिए है और सब्सिडी दो किस्तों में दी जाती है.
गधी का दूध बिकता है हजारों रुपए प्रति लीटर
आज बाजार में गधी का दूध 5,000 से 7,000 रुपए प्रति लीटर तक बिक रहा है. इसकी डिमांड औषधीय उत्पादों, कॉस्मेटिक और ब्यूटी प्रोडक्ट्स में तेजी से बढ़ी है. कई कंपनियां इससे साबुन, क्रीम और मॉइस्चराइजर बना रही हैं. सरकार गधी के दूध और उससे बनने वाले प्रोडक्ट्स को प्रमोट कर रही है.
गधे की खास नस्लें
पशुपालन विशेषज्ञों के मुताबिक :
-हलारी और कच्छी नस्ल के गधे पालन के लिए बेहतर माने जाते हैं.
-ये मजबूत होते हैं और कम देखभाल में भी स्वस्थ रहते हैं.
-एक स्वस्थ मादा गधी साल में एक बच्चे को जन्म देती है.
कैसे करें आवेदन
अगर आप भी राष्ट्रीय पशुधन मिशन योजना के तहत गधे पालना चाहते हैं तो और 50 लाख रुपए तक की सब्सिडी पाना चाहते हैं, तो इस योजना की ऑफिशियल वेबसाइट nlm.udyamimitra.in पर जाकर अप्लाई कर सकते हैं.
ग्रामीण इलाकों में गधा पालन कमाई का नया और फायदेमंद रोजगार बन सकता है. कम निवेश में शुरू होने वाला यह व्यवसाय छोटे किसानों और भूमिहीन परिवारों के लिए भी उपयुक्त है.





