Bastar: बस्तर क्षेत्र को आत्मनिर्भर और आर्थिक रूप से मजबूत बनाने के लिए अब खेती, डेयरी और सहकारिता आधारित विकास मॉडल को तेजी से आगे बढ़ाया जा रहा है. इसी दिशा में गांव-गांव में डेयरी नेटवर्क और सहकारी ढांचे को मजबूत करने की योजना तैयार की गई है.
केंद्रीय सहकारिता मंत्री अमित शाह ने 19 मई को जगदलपुर में पत्रकारों से बातचीत के दौरान कहा कि बस्तर लंबे समय तक नक्सल हिंसा के कारण विकास से पीछे रहा. कई गांव ऐसे रहे जहां बिजली, पीने का पानी, शिक्षा और सरकारी योजनाओं का लाभ समय पर नहीं पहुंच सका. अब सरकार का उद्देश्य इन क्षेत्रों को तेजी से विकास की मुख्यधारा से जोड़ना है ताकि स्थानीय लोगों को रोजगार और बेहतर जीवन सुविधाएं मिल सकें.
गांव-गांव में डेयरी और सहकारिता नेटवर्क विकसित करने की तैयारी
बस्तर क्षेत्र में प्राथमिक कृषि सहकारी समितियों को मजबूत बनाने के साथ डेयरी ढांचे के विस्तार पर भी काम किया जा रहा है. योजना के तहत आदिवासी परिवारों, विशेषकर महिलाओं, को पशुपालन से जोड़ने की तैयारी है.
इस मॉडल के जरिए खेती के साथ पशुपालन को भी रोजगार का मजबूत माध्यम बनाने पर जोर दिया जा रहा है. ग्रामीण महिलाएं अपने पशुओं का दूध नजदीकी डेयरियों तक आसानी से पहुंचा सकेंगी, जिससे गांवों में आर्थिक गतिविधियां बढ़ने की उम्मीद है.
खेती, स्किल डेवलपमेंट और शिक्षा पर रहेगा फोकस
बस्तर में रोजगार बढ़ाने के लिए कृषि, कौशल विकास और शिक्षा आधारित मॉडल को आगे बढ़ाने की योजना बनाई जा रही है. सरकार का मानना है कि युवाओं को स्किल ट्रेनिंग देकर उन्हें स्वरोजगार और निजी क्षेत्र में अवसर उपलब्ध कराए जा सकते हैं.
वर्ष 2031 तक विकसित बस्तर बनाने का लक्ष्य
सरकार का उद्देश्य केवल नक्सलवाद को समाप्त करना नहीं, बल्कि वर्ष 2031 तक बस्तर को एक विकसित क्षेत्र के रूप में स्थापित करना है. विकास योजनाओं के जरिए सड़क, बिजली, शिक्षा, पानी और रोजगार जैसी बुनियादी सुविधाओं को गांवों तक पहुंचाने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है.
“सेवा डेरा” मॉडल से गांवों तक पहुंचेगी सुविधाएं
बस्तर में स्थापित सुरक्षा कैंपों में से कई कैंपों को अब “वीर शहीद गुंडाधुर सेवा डेरा” के रूप में विकसित किया जाएगा. इन सेवा केंद्रों के माध्यम से लोगों को सरकारी योजनाओं और आवश्यक सुविधाओं का लाभ एक ही स्थान पर उपलब्ध कराने की योजना है.
इन केंद्रों के जरिए गांवों में बिजली, पानी, शिक्षा और रोजगार से जुड़ी सुविधाओं की पहुंच तेज करने का प्रयास किया जाएगा, जिससे ग्रामीण क्षेत्रों में विकास को गति मिल सके.
बस्तर पंडुम और खेल आयोजनों से आदिवासी संस्कृति को मिलेगा मंच
आदिवासी संस्कृति और परंपराओं को बढ़ावा देने के लिए “बस्तर पंडुम” जैसे आयोजनों को भी प्रोत्साहित किया जा रहा है. इन कार्यक्रमों में लोक कला, पारंपरिक वेशभूषा, खानपान, हस्तशिल्प और स्थानीय भाषाओं को बड़े स्तर पर प्रस्तुत किया जाएगा.
इसके अलावा बस्तर ओलंपिक जैसे खेल आयोजनों के जरिए युवाओं को मुख्यधारा से जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है. इन आयोजनों में बड़ी संख्या में स्थानीय खिलाड़ियों और युवाओं की भागीदारी देखने को मिल रही है, जिससे क्षेत्र में सामाजिक और आर्थिक बदलाव की नई संभावनाएं बन रही हैं. Bastar





