Tissue Culture : केला भारत के सभी राज्यों में उगाया जाता है. महाराष्ट्र, कर्नाटक, असम, गुजरात, तमिलनाडु, बिहार और झारखंड केला उत्पादन के प्रमुख राज्य हैं. पिछले कुछ समय से मध्य प्रदेश में भी केले की खेती के प्रति किसानों की रुचि बढ़ी है.

केले की खेती के लिए कंद लगाने का चलन है. कंद अलगअलग होने की वजह से उत्पादन की गारंटी नहीं होती है, क्योंकि कंद एक वजन और एक ही वैरायटी के नहीं मिलते हैं. अलगअलग वैरायटी के होने की वजह से ज्यादा उत्पादन की गारंटी कम होती है. कंद लगाने में सब पेड़ के गुण एक समान नहीं होते और कंद बीमारी मुक्त नहीं होते, इसलिए इन की देखभाल पर अधिक खर्च करना पड़ता है.

कंद लगाने के समय से ले कर 15-16 महीने में उत्पादन शुरू होता है. 30-32 महीने में एक मुख्य फसल और एक कंद की फसल ली जा सकती है. कुल मिला कर कंद लगा कर केले की खेती में खर्च अधिक और पैदावार कम होती है.

कंद की बजाय टिश्यू कल्चर ज्यादा फायदेमंद

टिश्यू कल्चर के लिए अच्छे कंद का चुनाव कर के लैब में कांच की बोतल में केले के रोपों को ग्रीनहाउस में लगाया जाता है. इन रोपों को 6×8 इंच आकार के प्लास्टिक के बैग में मिट्टी, खाद, रेत के मिश्रण में जीवाणु खाद डाल कर सीमेंट के ओटे पर अच्छी तरह बढ़ाने के बाद पौधे किसानों को दिए जाते हैं.

बायोटेक टिश्यू कल्चर से तैयार पौधे एक ही उम्र और जाति के होते हैं. ये पूरी तरह से स्वस्थ होते हैं. मातृ पेड़ के सब गुण समान होते हैं. पौधे लगाने के 11-12 महीने में उत्पादन शुरू हो जाता है और समय कम लगने से पानी, मजदूरी और अन्य खर्चे भी कम होते हैं. 28-30 महीने में मुख्य फसल के अलावा कंद की 2 फसल ली जा सकती हैं. अच्छी क्वालिटी के फल होने से कीमत भी अच्छी मिलती है.

केला लगाने की तकनीक

टिश्यू कल्चर केले के पौधे को पौलीथिन काट कर निकाल लें. पौधे की पिंडी को नुकसान नहीं पहुंचाना चाहिए. इस के बाद पौधे की गड्ढे के बीच रोपाई करें. गहरी रोपाई न करें और ध्यान रखें कि जड़ों को नुकसान न पहुंचे.

केले की फसल के लिए गरम और उमस वाला मौसम, जिस में 26 डिगरी सेल्सियस से 30 डिगरी सेल्सियस तापमान होना, बहुत अच्छा माना गया है.

अच्छी पैदावार के लिए भुरभुरी, मध्यम काली मिट्टी, पानी निकास वाली दलदली मिट्टी का पीएच मान 6.0 से 7.5 और खारापन 0.05 से ज्यादा नहीं होना चाहिए.

केले की पूरी फसल में पौधे लगाने के समय से फल आने तक 7-8 महीने, फल की बढ़वार और पकने के लिए 3-4 महीने लगते हैं.

पैदावार : टिश्यू कल्चर केला लगाने से 1000 पौधों में से 25-30 टन उत्पादन मिलता है. इस के लिए टपक सिंचाई व खाद का सही इंतजाम करना चाहिए.

पौधा लगाने के पहले 5 ग्राम फोरेट एक गड्ढे में डालें और एक पौधे के लिए 1 ग्राम बाविस्टीन इस्तेमाल करें. ब्ल्यू कापर 2 ग्राम और क्लोरोफेरिपास 1 मिलीलीटर इस्तेमाल करें. 19:19:19 उर्वरक को 5 से 7 ग्राम पानी में मिला कर गड्ढे में डालना चाहिए और ठंड के दिनों में बगीचे में धुंआ करना चाहिए.Tissue Culture

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