Camel Rearing. राष्ट्रीय उष्ट्र अनुसंधान केंद्र, बीकानेर द्वारा ऊंट पालन से जुड़े तमाम पहलुओं पर खोजबीन की जा रही है, जिन के आधार पर ऊंट पालन को वैज्ञानिक स्वरूप देते हुए इन का कारोबारी महत्त्व तैयार किया जा सकेगा. हर साल बीकानेर के लाडेरा गांव में जनवरी महीने में ऊंट महोत्त्सव आयोजित होता है.
सीमा सुरक्षा बल के जवान सिपाही ऊंटों पर सवार हो कर अंतर्राष्ट्रीय सीमा की निगरानी करते हैं. रेगिस्तान की सुरक्षा चौकियों पर सेना के लिए रसद पहुंचाने का काम ऊंटों द्वारा किया जाता है. इस लेख में हम ऊंट पालन के कुछ अहम पहलुओं पर चर्चा कर रहे हैं.
ऊंट की खुराक :
ऊंट मरुस्थलीय वनस्पतियों के अलावा मोठ का चारा, मूंगफली का चारा, ग्वार फलगटी को चाव से खाता है.
– एक दिन में एक जवान ऊंट को 11 से 14 किलोग्राम चारा 2 खुराकों में दिया जाता है.
-दिन में 6-8 किलो और रात में 5-6 किलो चारा देना चाहिए.
– ज्यादातर पशु पालक अपनी मादा ऊंट को प्रजननकाल में अजवायन, गुड़ और तेल भी देते हैं. इस के अलावा मेथी और हलदी भी देते हैं.
-ऊंट खुले खेतों में 9 से 11 घंटे तक चराई करता है.
-ऊंट को गरमी में 2 बार व सर्दी व बरसात में एक बार रोजाना पानी पिलाया जाता है. वैसे ऊंट कई दिनों तक बिना पानी पिए ही काम चला लेता है.
राष्ट्रीय उष्ट्र अनुसंधान केंद्र में ऊंटों की खानेपीने की आदतों को स्थानीय चारे व खानेपीने की चीजों की कीमत को ध्यान में रखते हुए अलगअलग तरह के संतुलित आहार बना कर उस की पोषकता व ऊंटों की उत्पादकता बढ़ाने की कूवत को परखा गया.
12 तरह के आहारों में ग्वार फलगटी, मूंगफली चारा, चने की खार, नीम, खेजड़ी, शीरा, गुड़, चोकर, ग्वारचूरी, चावल की कनी, खनिज मिश्रण वगैरह शामिल किए गए हैं. ऊंट पालक अपनी हैसियत के मुताबिक ज्यादा से ज्यादा फायदा लेने के लिए इन में से कोई भी आहार चुन सकते हैं.
संस्थान द्वारा ऊंटों को खिलाने के लिए संतुलित आहार की ईंटे भी बनाई गई हैं, जो कम जगह घेरती हैं. 5 किलो वजन की 3 ईंटें एक ऊंट के लिए एक दिन का संपूर्ण आहार हैं. इस को तोड़ कर खिलाने की जरूरत नहीं है. ऊंट खुद ही तोड़ कर इन्हें चबा लेता है.
ऊंट की दूध उत्पादन कूवत खराब हालात में भी अच्छी पाई जाती है. जहां गाय 9 किलो सूखा चारा खा कर एक लीटर दूध देती है, वहीं पर ऊंटनी सिर्फ 2 किलो सूखा चारा खा कर एक लीटर दूध देती है.
ऊंटों का विकास : आमतौर पर एक नर ऊंट को व्यस्क होने में 6 साल लगते हैं. एक ही झुंड में नर व मादा साथ रखे जाने पर नर ऊंट 6 साल से पहले ही जवान हो जाते हैं. मादा 4 साल में जवान हो कर 5 साल में पहला बच्चा दे सकती है.
प्रजनन काल : ऊंटों में प्रजनन मौसमी होता है. जाड़े के दिनों में नर ऊंट रट यानी मस्ती में आते हैं. मादा ऊंट में गरमी के लक्षण नर ऊंटों की तरह दिखाई नहीं देते और अन्य पालतू पशुओं की तरह ऊंटनी मदकाल के लक्षण जाहिर नहीं करती. जाड़े के मौसम में दिसंबर से मार्च के बीच प्रजनन काल में ऊंटनी के डिंब निकलते हैं.
रट या मस्ती में आया नर ऊंट रोबीला उत्तेजक व्यवहार करता है, भोजन कम कर देता है, बोझा ढोने में आनाकानी करता है, तालू में हवा भर कर गुब्बारे की तरह फुला लेता है और फर्रर्रफर्रर्र की आवाज निकालता है.
कभीकभी मेगनी की बजाय दस्त भी करता है. इन्हीं दिनों में नर ऊंट, मादा ऊंट के जननांगों, पेशाब व मेगनी को सूंघते हुए सिर ऊंचा उठा कर ऊपरी होठों को पीछे की ओर मोड़ लेता है. नर ऊंट मादा ऊंट की गरदन पर हलके दांत गड़ा कर नीचे बैठने का इशारा करता है.
मदकाल में आई हुई ऊंटनी तुरंत इस इशारे को समझ कर समागम के लिए नीचे बैठ जाती है. 5 से 15 मिनट तक सहवास होता है. इस दौरान सफल गर्भधारण होने पर 4 हफ्ते के बाद ऊंटनी अपनी पूंछ उठा कर खुद के गाभिन होने का संकेत देती है. आमतौर पर मादा ऊंट 4 साल से ले कर 25 साल तक बच्चा पैदा करने में सक्षम है. नर ऊंट के मदकाल को अनदेखा करना किसी भी ऊंट पालक के लिए नुकसानदायक हो सकता है. Camel Rearing





