Plant Nursery.नर्सरी में पौध पनपाने का सिलसिला पुराना है, पर वहां पौधों में लगने वाला कमरतोड़ नामक रोग नर्सरी वाले की कमर तोड़ देता है. आखिर इस से कैसे नजात पाई जा सकती है?

सफल सब्जी उत्पादन के लिए स्वस्थ बीज आवश्यक है. टमाटर, बैगन, शिमला मिर्च, फूलगोभी, बंदगोभी, गांठगोभी, चायनीज बंदगोभी, प्याज वगैरह पौध से तैयार होते हैं. पौध का स्वस्थ होना बहुत जरूरी है, क्योंकि खेत में लगने वाली बहुत से बीमारियां बीज व पौध द्वारा ही फैलती हैं.

क्या है कमर तोड़ रोग

नर्सरी में लगने वाली प्रमुख बीमारी कमर तोड़ है. यह बीमारी ठंडे व नम वातावरण में सब्जियों की नर्सरी को बहुत नुकसान पहुंचाती है. इस से न केवल कम मात्रा में बीज अंकुरित होते हैं, बल्कि पौध द्वारा बीमारी के जीवाणु खेत में चले जाए जाते हैं. इस तरह बीमार पौध मिट्टी और बीज द्वारा फैलाए जाने वाली बीमारी के लिए उपयुक्त माध्यम बन जाता है.

नर्सरी में यह बीमारी एक स्थान से शुरू होती है और उस जगह के आसपास के सभी पौधे मर जाते हैं.

कब पनपता है यह रोग

इस बीमारी के लिए मिट्टी में ज्यादा नमी, पीएच मान 6.0 और चिकनी मिट्टी सहायक होती है. उत्थान से पहले कमर तोड़ का हमला 20-25 डिगरी सेंटीग्रेड तापमान पर सब से ज्यादा होता है, जबकि उत्थान के बाद कमर तोड़ 30-40 डिगरी सेंटीग्रेड पर अधिक खतरनाक होता है.

कैसे करें रोकथाम

इस बीमारी को कंट्रोल करने के लिए सभी तकनीकों का इस्तेमाल कर सकते हैं, जैसे कि सस्य क्रियाएं, सौर ऊर्जा से पौधशाला की मिट्टी को उपचारित करना और फफूंदनाशकों का इस्तेमाल.

सस्य क्रियाएं

सस्य क्रियाएं जैसे कि नर्सरी को हर साल एक ही जगह पर नहीं लगाना और नर्सरी में अधिक सिंचाई न करना इस बीमारी की रोकथाम में सहायक हैं. इस के अलावा नर्सरी में मिट्टी, रेत और सड़ीगली खाद के मिश्रण का इस्तेमाल पौध उत्पादन के लिए करना चाहिए.

सौर ऊर्जा से मिट्टी उपचार

इस तकनीक में खेत की जुताई अच्छी तरह की जानी चाहिए और भूतल समतल होनी चाहिए, ताकि पौलीथीन की चादर अच्छी तरह बिछाई  जा सके और मिट्टी अच्छी तरह पानी सोख ले. खेत की जुताई करने के बाद उस में गोबर की खाद मिला लें और सिंचाई करें. सिंचित भूमि को सफेद, पारदर्शी और पतले 25-50 माइक्रोन या 100-200 गेज मोटी पौलीथीन से गरमियों में 4-6 हफ्ते के लिए ढक दें. पौलीथीन चादर के किनारों को मिट्टी में अच्छी तरह से दबा देना चाहिए. उपचारित करने के बाद पौलीथीन की चादर को हटा दें और फिर उपचारित जमीन में सब्जियों की बिजाई करें ताकि स्वस्थ पौध तैयार हो सके.

फफूंदनाशकों का इस्तेमाल

* बीज को बोने से पहले फफूंदनाशक दवा से उपचार (2-3 ग्राम कैप्टान/ बाविस्टीन प्रति किलोग्राम बीज) कर लेना चाहिए.

*  रोपाई से पहले डायथेन एम-45 (25 ग्राम) बाविस्टीन (10 ग्राम) व 10 लीटर पानी के घोल से जड़ों को भिगोएं.

*  कमर तोड़ बीमारी दिखाई देने पर पौधशाला में डायथेन एम-45 (25 ग्राम), बाविस्टीन (10 ग्राम) व 10 लीटर पानी के घोल से जड़ों को उपचारित करें.

जैविक नियंत्रण : जैविक नियंत्रण के लिए ट्राइकोडरमा विरडी, ट्राइकोडरमा हरजिएनम, ग्लायोक्लेडियम वारेंस वगैरह को मिट्टी में मिलाने से भी इस बीमारी को कम किया जा सकता है और इस से बीज की अंकुरण कूवत भी कई गुना बढ़ जाती है.

पत्तों की बीमारी

पौध के पत्तों पर कई प्रकार के फफूंद, जीवाणु तथा विषाणु भी हमला करते हैं. टमाटर में पत्ता झुलसा, गोभी वर्गीय सब्जियों में मृदु रोमिल और काला सड़न, टमाटर व शिमला मिर्च में बैक्टिरियल स्पाट और बैक्टिरियल कैंकर वगैरह नर्सरी में पौध पर दिखाई देते हैं और तेजी से फैलते हैं.

इस के अलावा विषाणु रोग जैसे कि लीफ कर्ल और मोजेइक भी नर्सरी पौध को संक्रमित करते हैं. पौधे के कीट जैसे सफेद मक्खी और तैला इन विषाणु रोगों को फैलाते हैं.

रोकथाम : इन बीमारियों की रोकथाम के लिए विभिन्न बीज उपचार, जो कि कमर तोड़ में भी उपयोगी हैं, किए जा सकते हैं. इस के अलावा कार्बंडाजिम 10 ग्राम, मैंकोजेब 25 ग्राम, स्टे्रप्टोसाइक्लिन 1 ग्राम प्रति 10 लीटर पानी में घोल कर छिड़काव कर सकते हैं.

विषाणु रोगों के नियंत्रण के लिए नर्सरी को नेटहाउस में लगाना चाहिए जिस से बीमारी फैलाने वाले कीट न आ सकें. कीटनाशक जैसे कि मेलाथियान एक मिलीलीटर प्रति लीटर पानी में घोल कर एक हफ्ते के अंतराल पर छिड़काव कर सकते हैं. Plant Nursery

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