Animal Nutrition. अगर पशु के आहार में 20-30 किलोग्राम हरा चारा शामिल है, तो पौष्टिक दाने में 11-12 फीसदी प्रोटीन होना चाहिए. इस के उलटा हरा चारा नहीं है, तो दाने में प्रोटीन की मात्रा कम से कम 18 फीसदी होनी चाहिए.

यूरिया से उपचार

अच्छी सेहत, ज्यादा दूध, वजन ढोने का काम, अच्छी बढ़वार और सामान्य प्रजनन के लिए संतुलित आहार की जरूरत होती है. भूसा या पुआल सख्त व रेशेदार सूखा होता है, जिस में प्रोटीन की कमी होती है. इन में औसत प्रोटीन की मात्रा 2.5-3.0 फीसदी तक होती है. यह पाचक और जायकेदार भी कम होता है.

यूरिया से उपचार करने पर भूसे या पुआल की पौष्टिकता बढ़ती है. यह ज्यादा जायकेदार व पचनीय हो जाता है. यूरिया से उपचार आसान व किफायती है.

भूसे व पुआल का उपचार और स्टोरेज पक्की जमीन पर किया जाना चाहिए. पशुपालक अपनी जरूरत के मुताबिक पक्की चौकोर टंकी जमीन के अंदर बना लें और बारबार के उपचार से बचने के लिए यह अच्छा होगा कि एकसाथ 10 क्विंटल या ज्यादा भूसे या पुआल का उपचार किया जाए.

कैसे करें भूसे को उपचारित

एक क्विंटल भूसे के उपचार के लिए 40 किलोग्राम यूरिया को 65 लीटर पानी में घोल लेना चाहिए. अब भूसे को 3 बराबर हिस्सों में बांट कर पहले हिस्से की पतली परत पक्के फर्श पर बिछा लें, इस के बाद यूरिया के घोल को स्प्रेयर या हजारे से अच्छी तरह भूसे पर छिड़कें.

इसी तरह बाकी परतों को भी बिछा कर यूरिया का छिड़काव करें. उस के बाद हाथ या पैरों से भूसे को रौंद कर अच्छी तरह मिला कर एक जगह इकट्ठा कर अच्छी तरह दबा दें.

अब उपचारित भूसे के ढेर को प्लास्टिक शीट से अच्छी तरह चारों तरफ से ढक दें, जिस से बाहर की हवा अंदर न जा सके. इस तरह जिन लोगों ने पक्के टैंक बनवा रखे हैं, उन में यूरिया उपचारित भूसे को डाल कर पैरों से खूब अच्छी तरह दबा दें ताकि अंदर की हवा निकल जाए. अब इसे भी प्लास्टिक शीट से अच्छी तरह ढक दें. 4 हफ्ते तक ढका रहने के बाद इसे खिलाने से पहले 2-3 घंटे तक हवा में फैला लेना चाहिए, जिस से भूसे से गैस निकल जाए.

पुआल, कड़वी का उपचार:

धान का सूखी पुआल व ज्वारबाजरा, मक्का की कड़वी को उपचार से पहले कुट्टी काट कर इकट्ठा कर लें. जब सूखे चारे की मात्रा एक क्विंटल या इस से ज्यादा हो जाए तब पहले बताए तरीके से इस को उपचारित कर लें.

भूसा, पुआल व कड़वी जैसे सूखे चारे को पौष्टिक व जायकेदार बनाने के लिए शीरा, नमक व खनिज तत्त्व भी भूसे के साथ मिला कर खिला सकते हैं. जहां बिना यूरिया उपचारित भूसा, पुआल व कड़वी में प्रोटीन की मात्रा 2.5 से 3.0 फीसदी रहती है, वहीं उपचार के बाद 7-9 फीसदी तक प्रोटीन हो जाता है.

कैसे खिलाएं उपचारित चारा

हर बार यूरिया उपचारित पुआल या भूसे को जरूरत के हिसाब से निकाल लें. उपचारित भूसे को खिलाने से पहले हवा में फैला दें. अगर चारा पशु को शाम को खिलाना है तो सुबह यह काम कर लें और अगर सुबह खिलाना है तो एक दिन पहले भूसे को हवा में फैला लेना चाहिए.

अगर आहार की अच्छी मात्रा पशु को देते हैं, तो धीरेधीरे उस की मात्रा एकतिहाई तक कम कर दें. इस से दूध पर कोई असर नहीं होगा. अगर आप पहले ही थोड़ा पशु आहार देते हैं, तो उसे कम न करें.

उपचारित पुआल या भूसा खिलाने से दूध की मात्रा व फैट फीसदी में सुधार होगा. अगर शुरू में पशु को उपचारित पुआल या भूसा अच्छा नहीं लगे, तो इस में कुछ पशु आहार या आटा मिला दें.

उपचारित भूसे व पुआल को शुरू में नाइट्रोजन की महक की वजह से पशु खाना पसंद नहीं करेंगे. अगर इस चारे को हरे चारे की कुट्टी में मिला कर पशु को दिया जाए तो वे उसे बड़े चाव से खाने लगेंगे. इस के बाद पशु इस चारे को इतने चाव से खाएंगे कि इस के मुकाबले दूसरे चारे को पसंद नहीं करेंगे. उपचारित चारे को हरे चारे के साथ खिलाने से दुधारू पशुओं को बहुत कम मात्रा में दाना देने की जरूरत होती है.

फायदा

गाय और भैंस में कुल दाना मिश्रण की एकतिहाई मात्रा उपचारित सूखे चारे के द्वारा कम की जा सकती है. पूरे फायदे के लिए 2 से 3 हफ्ते का समय लगता है. इस से दूध उत्पादन की लागत को कम किया जा सकता है. कम लागत से उपचारित भूसा, पुआल और कड़वी सालभर उपलब्ध कराया जा सकता है. इस चारे को पशु बरबाद नहीं करते.

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