Multi-Crop Farming: 

धीरे-धीरे रे मना, धीरे सब कुछ होय,
माली सींचे सौ घड़ा, ऋतु आए फल होय.

खेती को अक्सर जोखिम भरा काम माना जाता है, और यह सच भी है कि कुछ नहीं पता कब कहाँ क्या हो जाये, लेकिन जब परंपरागत खेती में आधुनिक तकनीक और नवाचार का समावेश हो जाए, तो यही खेती किसानों की आय और पहचान दोनों बदल सकती है. उत्तर प्रदेश के अयोध्या जिले के ये किसान इसका एक ऐसा उदाहरण बन गए हैं जो हर किसी को प्रेरित करता हैं. उन्होंने बहुफसली खेती (Multi Cropping Farming) के जरिये एक ऐसी मिसाल पेश की है, जिसमें एक ही खेत से तीन से पाँच फसलों का उत्पादन लेकर न केवल अपनी आमदनी बढ़ाई, बल्कि अन्य किसानों के लिए भी प्रेरणा का स्रोत बनी. कृषि में उनके उत्कृष्ट नवाचार और उल्लेखनीय योगदान के लिए उन्हें कई पुरस्कार और प्रशस्ति पत्र प्राप्त हो चुके हैं. इसी कड़ी में फार्म एन फूड मीडिया ने उन्हें ‘बेस्ट यंग फार्मर अवार्ड’ से सम्मानित किया है.

बहुफसली खेती से बढ़ाई आय और उत्पादन

उन्होंने अपनी खेती में नई तकनीकों को अपनाया है. वे केला, धान, आलू, गेंदा फूल और खीरा जैसी फसलों की बहुफसली खेती करते हैं. उनकी विशेषता यह है कि वे खेत की जगह में आधुनिक संसाधनों और वैज्ञानिक तरीकों का उपयोग करते हैं. वे एक साथ तीन से पाँच फसलें उगाते हैं. इससे भूमि की उत्पादकता बढ़ती है. लागत का बेहतर प्रबंधन होता है. किसानों को साल भर आय के अलग-अलग स्रोत मिलते हैं.

आम के बाग में हल्दी की हुई सफल खेती

इन्होंने एक नया तरीका अपनाया है जिसमे ये आम के पेड़ के नीचे हल्दी की खेती करते हैं. वैसे तो आमतौर पर बागों में पेड़ों के नीचे की जमीन खाली रहती है, लेकिन इन्होने इस जगह को हल्दी उगाने के लिए इस्तेमाल किया. इस तरीके से न सिर्फ जमीन का अच्छा इस्तेमाल हुआ, बल्कि उन्हें अतिरिक्त आय का एक नया जरिया भी मिला. उनका यह तरीका दिखाता है कि वैज्ञानिक तरीके से खेती करने पर कम संसाधनों में भी ज्यादा फायदा हो सकता है.

नवाचार बना पहचान का आधार

खेती में लगातार किए गए प्रयोगों और नवाचारों ने इन्हें एक प्रगतिशील किसान के रूप में नई पहचान दिलाई है. उनके सफल मॉडल को देखने और समझने के लिए आसपास के किसान भी उनके खेतों का दौरा करते हैं. वे आधुनिक कृषि तकनीकों को अपनाने और साझा करने में भी सक्रिय भूमिका निभाते हैं, जिससे क्षेत्र के अन्य किसान भी प्रेरित हो रहे हैं.

कृषि क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य, नवाचार और किसानों के लिए प्रेरणादायक योगदान कई पुरुस्कारों से सम्मानित किया हैं. यह सम्मान उनकी मेहनत, दूरदृष्टि और आधुनिक कृषि के प्रति समर्पण का प्रमाण है. शोभाराम की सफलता यह संदेश देती है कि नई तकनीक, वैज्ञानिक सोच और बहुफसली खेती को अपनाकर किसान कम भूमि में भी अधिक उत्पादन और बेहतर आय हासिल कर सकते हैं. यही सोच भारतीय कृषि को आत्मनिर्भर और अधिक लाभकारी बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित हो रही है. Multi-Crop Farming

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