Pulses Seeds. पांच दिवसीय प्रशिक्षण में उत्पादन से लेकर पैकेजिंग और मार्केटिंग तक मिली पूरी जानकारी.

आचार्य नरेंद्र देव कृषि एवं प्रौद्योगिक विश्वविद्यालय, अयोध्या के अंतर्गत कृषि विज्ञान केंद्र (केवीके), सोहांव में विगत दिनों दलहन बीज उत्पादन तकनीक पर पांच दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया. प्रशिक्षण में जिले के 25 शिक्षित बेरोजगार युवक-युवतियों और प्रगतिशील किसानों ने भाग लिया. विशेषज्ञों ने किसानों को गुणवत्तापूर्ण बीज उत्पादन से लेकर उसकी पैकेजिंग, भंडारण और विपणन तक की आधुनिक तकनीकों की जानकारी दी.

प्रशिक्षण के दौरान डॉ. सोमेंद्र नाथ ने किसानों को बीज और अनाज के बीच अंतर, बीजों के प्रकार, बीज प्रमाणीकरण में उपयोग होने वाले टैग, अलगाव दूरी (आइसोलेशन डिस्टेंस), रोगिंग और गुणवत्तापूर्ण बीज उत्पादन के लिए जरूरी सावधानियों की विस्तार से जानकारी दी.

कीट-रोग नियंत्रण और सहफसली खेती के फायदे

डॉ. अभिषेक यादव ने दलहनी फसलों में लगने वाले प्रमुख कीट एवं रोगों की पहचान और उनके वैज्ञानिक प्रबंधन के तरीके बताए. वहीं डॉ. अवधेश कुमार ने सहफसली खेती के लाभ, आधुनिक उत्पादन तकनीक और लागत कम करके अधिक लाभ लेने के उपायों पर चर्चा की.

सीखे पैकेजिंग, भंडारण और मार्केटिंग के तरीके

प्रशिक्षण के चौथे दिन दिव्यम सीड्स किसान उत्पादक संगठन, महाराजपुर के चेयरमैन अरविंद कुमार ने किसानों को बीज की ग्रेडिंग, पैकेजिंग, सुरक्षित भंडारण और बेहतर विपणन की व्यावहारिक जानकारी दी. अंतिम दिन प्रगतिशील किसान मणिशंकर तिवारी ने प्राकृतिक खेती के जरिए देसी किस्मों के बीज उत्पादन के अपने अनुभव साझा किए.

गुणवत्तापूर्ण बीज से बढ़ेगी आय

कृषि विज्ञान केंद्र के वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं अध्यक्ष डॉ. संजीत कुमार ने कहा कि सही बीज चयन, प्रमाणित बीज का उपयोग, पृथक्करण दूरी, संतुलित पोषण, कीट एवं रोग नियंत्रण तथा गुणवत्ता प्रबंधन अपनाकर किसान बेहतर बीज तैयार कर सकते हैं. इससे फसल की उत्पादकता बढ़ने के साथ अतिरिक्त आय के अवसर भी मिलते हैं.

प्रशिक्षण के समापन पर सभी प्रतिभागियों को प्रमाणपत्र प्रदान किए गए. इस अवसर पर डॉ. अभिषेक यादव, डॉ. जितेंद्र कुमार, डॉ. अवधेश कुमार, अमित तिवारी, धर्मेंद्र कुमार, राकेश कुमार सिंह सहित कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिक एवं कर्मचारी उपस्थित रहे.

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