MP Chita Andolan. मध्य प्रदेश में केन-बेतवा लिंक परियोजना के विरोध में वहां के आदिवासी समुदाय द्वारा चलाया जा रहा ‘चिता आंदोलन’ काफी चर्चा में हैं. जानिए, इस आंदोलन के पीछे का प्रमुख कारण क्या है और उन आदिवासियों की विशिष्ट मांगे क्या हैं.

मध्य प्रदेश का चिता आंदोलन इन दिनों काफी चर्चा में है. जहां पर आदिवासी चिता पर लेटकर इस आंदोलन को सरकार के केन-बेतवा नदी परियोजना से प्रभावित होकर इस आंदोलन को कर रहे है. आदिवासी और ग्रामीण परिवारों द्वारा किया जा रहा यह आंदोलन आज राष्ट्रीय स्तर का मुद्दा बन गया हैं. इस आंदोलन के प्रदर्शनकारी प्रतीकात्मक रूप से लकड़ियों की चिता पर लेटकर यह बताना चाहते है कि,इस परियोजना से उनकी जमीन, जंगल और आजीविका छिन जाएगी, और यही उनके लिए मृत्यु के समान होगा.

जानिए क्या है चिता आंदोलन?

‘चिता आंदोलन’ मध्य प्रदेश के छतरपुर और पन्ना जिलों के आदिवासियों द्वारा किया जा रहा प्रतीकात्मक और अहिंसक विरोध प्रदर्शन है. इसमें प्रभावित ग्रामीण, विशेष रूप से आदिवासी महिलाएं, चिता जैसी संरचना पर लेटकर सरकार से न्याय की मांग कर रही हैं, वे सब अपने गले में रस्सी डाल कर अपने बच्चो के साथ चिता पर बैठी है, और सभी ग्रामीण वासी अपने लिए न्याय की मांग कर रहे है.

इस आंदोलन का संदेश है कि “सम्मानजनक पुनर्वास के बिना विस्थापन स्वीकार नहीं है.” इसके साथ ही कई स्थानों पर जल सत्याग्रह, अनशन और फांसी सत्याग्रह जैसे प्रतीकात्मक प्रदर्शन भी किए गए.

आंदोलन की वजह क्या है?

इन सभी ग्रामीण प्रदर्शनकारियो का कहना है कि केन-बेतवा लिंक परियोजना के अंतर्गत भविष्य में दौधन बांध बनने से उनके गांवों, खेतो और जंगल के नष्ट होने की आशंका लगातार बनी हुई है. उनके अनुसार सरकार उन्हें उनकी जमीन का पर्याप्त मुआवजा नहीं दे रही है, पुनर्वास की प्रक्रिया भी अधूरी बताई जा रही है, उनकी जमीन के बदले जमींन देने की मांग पूरी नहीं हुई, और उनका यह भी मानना है कि, इस परियोजना से उनकी आजीविका और संस्कृति पर भी भारी संकट मंडरा रहा है.

आखिर क्या है ये केन-बेतवा लिंक परियोजना?

केन-बेतवा लिंक परियोजना भारत की पहली बड़ी नदी जोड़ो परियोजना है. इसका मुख्य उद्देश्य बुंदेलखंड क्षेत्र में सिंचाई, पेयजल और जल संकट का समाधान करना है. इस परियोजना के तहत, केन नदी का पानी बेतवा नदी तक पहुंचाया जाएगा, जिससे लाखों लोगों को लाभ मिलने की उम्मीद है. लेकिन इसके कारण कई गांव वासियों के विस्थापन और पर्यावरणीय प्रभाव को लेकर लगातार विरोध भी हो रहा है. यह परियोजना बुंदेलखंड क्षेत्र के लिए एक बड़ा बदलाव ला सकती है, लेकिन इसके परिणामों को ध्यान से देखना होगा.

परियोजना पर सरकार का पक्ष

सरकार का कहना है कि इस परियोजना से बुंदेलखंड क्षेत्र में सिंचाई, पेयजल और विकास को बढ़ावा मिलेगा. इस सबमें प्रशासन पुख्ता इंतजाम किये हुए है. प्रभावित परिवारों के पुनर्वास और मुआवजे की प्रक्रिया जारी है. वहीं हाल ही में प्रशासन ने सुरक्षा कारणों और आंदोलनकारियों के स्वास्थ्य का हवाला देते हुए प्रदर्शन स्थल को खाली करवाया है.

आंदोलन का महत्व

यह चिता आंदोलन केवल मुआवजे की मांग तक सीमित नहीं है, बल्कि यह बड़ी विकास परियोजनाओं से प्रभावित समुदाय के अधिकारों और उनके विकास बनाम विस्थापन की बहस को भी सामने लाता है

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