हाल ही में महाराणा प्रताप कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (MPUAT), उदयपुर में आयोजित कार्यक्रम के दौरान राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा का विश्वविद्यालय परिवार ने गर्मजोशी से स्वागत किया. इस अवसर पर विश्वविद्यालय के कुलगुरु डॉ. प्रताप सिंह ने मुख्यमंत्री को विश्वविद्यालय की प्रमुख उपलब्धियों, चल रहे अनुसंधान कार्यों और किसानों के लिए विकसित नई तकनीकों की जानकारी दी.
कुलगुरु ने कहा कि एमपीयूएटी आज राजस्थान के अग्रणी कृषि विश्वविद्यालयों में शामिल है. विश्वविद्यालय दक्षिणी राजस्थान के 8 जिलों में कृषि शिक्षा, अनुसंधान और कृषि प्रसार के माध्यम से किसानों तक नई तकनीक पहुंचाने का काम कर रहा है. इसके साथ ही खेती को अधिक लाभकारी और टिकाऊ बनाने के लिए लगातार नए प्रयोग भी किए जा रहे हैं.
91 अनुसंधान परियोजनाओं पर काम
डॉ. प्रताप सिंह ने बताया कि विश्वविद्यालय में इस समय 91 अनुसंधान परियोजनाएं चल रही हैं, जिनमें 38 परियोजनाओं को भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) का वित्तीय सहयोग मिल रहा है. इन परियोजनाओं का उद्देश्य खेती की नई चुनौतियों का समाधान खोजने के साथ किसानों के लिए उपयोगी तकनीक विकसित करना है.
नई किस्में की विकसित
पिछले 5 वर्षों में विश्वविद्यालय ने 12 नई फसल किस्में विकसित कर अधिसूचित कराई हैं. वहीं, पिछले वर्ष 2,747.21 क्विंटल गुणवत्तायुक्त बीज का उत्पादन किया गया. इसके अलावा विश्वविद्यालय जैविक खेती, कृषि यंत्रीकरण और डिजिटल कृषि के क्षेत्र में भी लगातार काम कर रहा है
मक्का किसानों के लिए खास तकनीक
मेवाड़ क्षेत्र में मक्का की फसल को नुकसान पहुंचाने वाले फॉल आर्मीवर्म कीट से बचाव के लिए विश्वविद्यालय ने एक प्रभावी जैविक तकनीक विकसित की है इसमें प्रति हेक्टेयर 25 किलोग्राम सिलिका पाउडर का बुरकाव करने की सलाह दी गई है. यह तकनीक कम लागत वाली होने के साथ पर्यावरण के लिए भी सुरक्षित मानी जा रही है.
फसल अवशेष से बनेगा बायोचार
विश्वविद्यालय ने कृषि पादप अवशेषों से बायोचार बनाने के लिए विशेष भट्टी भी विकसित की है. इससे फसल अवशेष जलाने की समस्या कम होगी और मिट्टी की उर्वरता बढ़ाने में भी मदद मिलेगी.
हजारों किसानों को नियमित प्रशिक्षण
विश्वविद्यालय किसानों तक नई तकनीक पहुंचाने के लिए नियमित प्रशिक्षण कार्यक्रम भी आयोजित करता है. पिछले वर्ष 137 प्रशिक्षण कार्यक्रमों के माध्यम से 9,245 किसानों और अन्य हितधारकों को आधुनिक कृषि तकनीकों की जानकारी दी गई.
शोध और नवाचार में भी अव्वल
पिछले 3 वर्षों में विश्वविद्यालय ने 58 पेटेंट हासिल किए हैं. इसके अलावा 81 एमओयू किए गए और 497 शोध पत्र प्रकाशित हुए.
राष्ट्रीय स्तर पर मिली पहचान
एनआईआरएफ 2025 की रैंकिंग में एमपीयूएटी को राज्य वित्तपोषित विश्वविद्यालयों की 50–100 रैंक बैंड में स्थान मिला है. इसके अलावा विश्वविद्यालय की 3 अखिल भारतीय समन्वित अनुसंधान परियोजनाओं (एआईसीआरपी) को आईसीएआर ने देश का सर्वश्रेष्ठ केंद्र घोषित किया है.
कार्यक्रम में कुलसचिव अशोक कुमार, वित्त नियंत्रक महेंद्र सिंह, निदेशक अनुसंधान डॉ. मनोज कुमार महला सहित विश्वविद्यालय के सभी प्रमुख अधिकारी, वैज्ञानिक, शिक्षाविद् और कर्मचारी उपस्थित रहे.
किसानों के लिए काम कर रहा अग्रणी संस्थान
कार्यक्रम में प्रस्तुत उपलब्धियों से स्पष्ट हुआ कि एमपीयूएटी केवल कृषि शिक्षा तक सीमित नही है बल्कि किसानों के हित के लिए जमीनी स्तर पर काम कर रहा है. MPUAT





