Agricultural Drones-
खेती में फसलों पर कीटबीमारी का प्रकोप होने पर समय पर कीटनाशकों का छिड़काव करना जरूरी होता है. खड़ी और घनी फसलों में हर हिस्से तक कीटनाशक का पहुंचना भी आसान नहीं होता.
ऐसे में कृषि यंत्र ड्रोन छिड़काव के काम को आसान बनाने का काम करता है. इसके इस्तेमाल से किसान भी सुरक्षित और फसल भी सुरक्षित रहती है.
किसान रहे सेफ:
अकसर देखने में आता है कि पारंपरिक तरीके से कीटनाशक का छिड़काव करने के तरीके में किसान अपनी पीठ पर स्पेयर लादकर खेत में कीटनाशक का स्प्रे करता है, जिससे किसान चाहेअनचाहे भी कीटनाशक के संपर्क में रहता है. स्प्रे के दौरान
खेत में उड़ता हुआ कीटनाशक भी किसान की सेहत के लिए नुकसानदायक है. इसलिए ड्रोन कृषि भी किसान के लिए एक सुरक्षित कृषि यंत्र है, जो किसान की सुरक्षा के साथ सुरक्षित खेती भी करता है.
एक दिन में 30 एकड़ तक छिड़काव:
कोरोमंडल इंटरनेशनल लिमिटेड की ‘Gromor Drive’ की दी गई जानकारी के अनुसार ड्रोन से एक दिन में करीब 30 एकड़ तक फसल में छिड़काव किया जा सकता है. एक एकड़ में करीब 10 लीटर पानी की जरूरत पड़ती है. और घनी और खड़ी फसल में भी ड्रोन अच्छा छिड़काव किया जाता है. यह बैटरी से चलने वाला यंत्र होता है. इसे कहीं भी ले जाना भी आसान है.
ड्रोन से बन सकता है रोजगार का साधन:
कृषि ड्रोन सिर्फ किसान के लिए खेती आसान करने वाली मशीन नहीं है, बल्कि इसे कमाई का साधन भी बनाया जा सकता है. कोई युवा या कृषि स्नातक ड्रोन खरीदकर आसपास के गांवों में किसानों को छिड़काव की सेवा दे सकता है. इसके लिए एक साथ बड़ी जमीन का मालिक होना जरूरी नहीं है. आसपास के किसानों से बुकिंग लेकर खेत के हिसाब से सेवा दी जा सकती है.
इसके लिए कस्टम हायरिंग सेंटर शुरू करना भी एक रास्ता है. इसमें किसान, एफपीओ, सहकारी समिति या ग्रामीण उद्यमी ड्रोन खरीदकर उसे किसानों को किराये पर उपलब्ध करा सकते हैं.
सरकार की योजना में ऐसे केंद्रों के लिए ड्रोन खरीद पर वित्तीय सहायता का प्रावधान है.
किराए पर भी ड्रोन:
इस तरह कृषि ड्रोन खेती में समय और पानी की बचत के साथ युवाओं के लिए सेवा आधारित रोजगार का रास्ता भी खोल सकता है. छोटे किसान खरीदने के बजाय अपने क्षेत्र में ड्रोन सेवा किराये पर लेकर भी इसका फायदा उठा सकते हैं.
इस काम में सिर्फ ड्रोन उड़ाने वाला व्यक्ति ही नहीं, बल्कि ड्रोन की देखभाल, बैटरी चार्जिंग, खेतों की बुकिंग, दवा की तैयारी और छिड़काव सेवा से जुड़े दूसरे लोगों के लिए भी काम के अवसर बन सकते हैं.
सुरक्षित इस्तेमाल के लिए प्रशिक्षण जरूरी:
सेवा देने से पहले प्रशिक्षण जरूरी
ड्रोन खरीदकर सीधे छिड़काव शुरू करने के बजाय उसके संचालन और कृषि-रसायनों के सुरक्षित इस्तेमाल का प्रशिक्षण लेना जरूरी है.
ड्रोन खरीदने में कितना खर्च?
कृषि ड्रोन की कीमत उसकी क्षमता, बैटरी, छिड़काव टैंक और दूसरी सुविधाओं के अनुसार उसकी कीमत अलगअलग हो सकती है. बाजार में कृषि छिड़काव वाले ड्रोन की कीमत करीब 4.5 लाख रुपये से 10 लाख रुपये तक बताई जा रही है.
हालांकि किसान को पूरी कीमत अपनी जेब से नहीं देनी पड़ सकती. केंद्र सरकार की कृषि यंत्रीकरण योजना के अनुसार पात्र किसानों को ड्रोन खरीद पर सब्सिडी मिलती है.
छोटे और सीमांत किसानों, अनुसूचित जाति/जनजाति, महिला किसानों और पूर्वोत्तर राज्यों के किसानों को लागत का 50% तक, अधिकतम 5 लाख रुपये तक सहायता का प्रावधान है. अन्य किसानों के लिए 40% तक, अधिकतम 4 लाख रुपये तक का अनुदान मिलता है. समय समय पर योजनाओं में बदलाव हो सकता है, इसलिए ड्रोन खरीदने से पहले उस समय चल रही योजना की जानकारी जरूर लें.
एफपीओ को अधिक फायदा:
किसान उत्पादक संगठन यानी एफपीओ को खेतों पर ड्रोन खरीद के लिए 75 फीसदी या अधिक तक अनुदान मिल सकता है.
एक एकड़ में 10 लीटर पानी:
ड्रोन से छिड़काव में पानी की भी बचत होती है. कंपनी के अनुसार एक एकड़ खेत में करीब 10 लीटर पानी से छिड़काव किया जा सकता है. इससे कम पानी में खेत का काम पूरा करने में मदद मिलती है.
कैसे मिलेगी सुविधा:
किसान अपने नजदीकी खाद और दवा विक्रेता, कृषि यंत्र विक्रेता से संपर्क कर अधिक जानकारी ले सकते हैं. ड्रोन यंत्र के लिए दिए गए मोबाइल नंबरों पर भी संपर्क किया जा सकता है.
संपर्क:
शैलेश कुमार सिंह: 9870980391
अरविन्द कुमार: 7906252305





