राजस्थान में अफीम पैदा करने वाले किसानों को इन दिनों बेहतर पैदावार और गुणवत्ता युक्त अफीम की खेती के लिए वैज्ञानिक तरीके से खेती (Opium Farming)की जानकारी दी जा रही है. वैज्ञानिक बताएंगे बेहतर खेती और रोगकीट से बचाव के तरीके.

महाराणा प्रताप कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (एमपीयूएटी), उदयपुर के अखिल भारतीय औषधीय एवं सुगंधीय पौध अनुसंधान परियोजना और केंद्रीय नारकोटिक्स ब्यूरो, भारत सरकार के संयुक्त तत्वावधान में 6 से 11 अगस्त तक अफीम उत्पादक किसानों के लिए जागरूकता शिविर आयोजित किए जा रहे हैं.

इन शिविरों में किसानों को अफीम की फसल से जुड़ी वैज्ञानिक तकनीकों, फसल की देखभाल, रोग एवं कीट प्रबंधन और उत्पादन की गुणवत्ता बेहतर करने के उपाय बताए जा रहे हैं. अभियान में चित्तौड़गढ़, प्रतापगढ़, भीलवाड़ा, कोटा और झालावाड़ जिलों के किसान शामिल हो रहे हैं.

वैज्ञानिकों से मिल रही तकनीकी जानकारी

राजस्थान कृषि महाविद्यालय, उदयपुर के कृषि वैज्ञानिक किसानों को अफीम की उन्नत खेती से जुड़ी जानकारी दे रहे हैं. डाक्टर अमित दधीच, सहायक आचार्य एवं पौध प्रजनक, डाक्टर आरएन बुनकर, प्रोफेसर एवं विभागाध्यक्ष, पादप रोग विभाग तथा डाक्टर एनके पाडीवाल, तकनीकी सहायक किसानों को फसल प्रबंधन के बारे में मार्गदर्शन दे रहे हैं.

शिविरों में किसानों को उन्नत बीज और उर्वरकों के उचित उपयोग, फसल में होने वाले रोगों और कीटों की पहचान तथा उनके प्रबंधन के वैज्ञानिक तरीकों की जानकारी दी जा रही है. किसानों को फसल की स्थिति के अनुसार सही तकनीक अपनाने और समय पर आवश्यक कदम उठाने के लिए भी जागरूक किया जा रहा है.

5 जिलों के किसानों की भागीदारी

इस जागरूकता अभियान में अफीम उत्पादक किसानों के साथ लंबरदार, जनप्रतिनिधि और संबंधित गांवों के प्रतिनिधि भी भाग ले रहे हैं. इसका उद्देश्य किसानों तक खेती से जुड़ी वैज्ञानिक जानकारी सीधे पहुंचाना और फसल प्रबंधन को बेहतर बनाना है.

कहां कहां मिल रही जानकारी

अभियान के तहत 6 अगस्त को चित्तौड़गढ़, 7 अगस्त को प्रतापगढ़ और छोटी सादड़ी तथा 8 अगस्त को भीलवाड़ा डिवीजन के सिंगोली में शिविर लगाए गए. चित्तौड़गढ़ में करीब 300 से 400 किसानों, जनप्रतिनिधियों और अन्य संबंधित लोगों ने शिविर में भाग लिया.

कोटा और झालावाड़ में भी जागरूकता शिविर

अभियान के अगले चरण में 11 अगस्त को कोटा और झालावाड़ जिलों के अफीम उत्पादक किसानों के लिए जागरूकता शिविर आयोजित किए जा रहे हैं. इन शिविरों के आयोजन और जरूरी व्यवस्थाओं की जिम्मेदारी केंद्रीय नारकोटिक्स विभाग के साथ संबंधित जिलों के जिला अफीम अधिकारियों और नारकोटिक्स विभाग के अधिकारियों द्वारा संभाली जा रही है.

खेती में वैज्ञानिक जानकारी पर जोर

अफीम की खेती से जुड़े किसानों को एक ही जगह पर खेती और फसल प्रबंधन की जरूरी तकनीकी जानकारी उपलब्ध कराने से उन्हें अपनी फसल को बेहतर तरीके से समझने में मदद मिलेगी. वैज्ञानिकों की ओर से किसानों को उत्पादन और गुणवत्ता सुधारने के साथ रोग एवं कीट प्रबंधन के वैज्ञानिक उपायों की जानकारी दी जा रही है. इस तरह के जागरूकता शिविर किसानों और कृषि विशेषज्ञों के बीच सीधे संवाद का माध्यम भी बन रहे हैं.

अफीम की खेती करने के लिए सरकार द्वारा कुछ मापदंड तय किए जाते हैं जिनके तहत ही किसान अफीम की खेती कर सकता है. इसमें नारकोटिक्स विभाग की भी खास भूमिका होती है, किसानों के लिए ये शिविर अफीम की खेती से जुड़े सरकारी नियमों, फसल प्रबंधन और वैज्ञानिक जानकारी को समझने का अवसर उपलब्ध करा रहे हैं.

जरूरी जानकारी

भारत में अफीम की खेती नियमानुसार लाइसेंस और निर्धारित सरकारी मापदंडों के तहत की जाती है. किसानों को अफीम की खेती से संबंधित नियमों, लाइसेंस और विभागीय निर्देशों की जानकारी केंद्रीय नारकोटिक्स ब्यूरो से प्राप्त करनी चाहिए.Opium Farming

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