बासमती धान (Basmati Paddy) हमारे देश की अनमोल धरोहर है. इस की भीनी खुशबू और अच्छा स्वाद सभी का मन मोह लेता है. अपनी खास क्वालिटी के कारण देशविदेश में बासमती चावल की मांग बढ़ रही है. वैसे तो परंपरागत बासमती धान की पैदावार कम है, परंतु अनुसंधानों द्वारा तैयार नई वैरायटी व तकनीकी ज्ञान के अनुसार खेती कर के बासमती धान की भी अच्छी पैदावार ली जा सकती है.
कुछ खास किस्में
क्वालिटी के हिसाब से तरावड़ी बासमती, देहरादून बासमती, बासमती-370, बासमती-386, बासमती सीएसआर-30, पूसा बासमती-1121, पूसा बासमती-1 और पूसा बासमती-6 उम्दा वैरायटी हैं. इन वैरायटियों की पैदावार कूवत तो कम है, लेकिन अच्छी क्वालिटी के कारण देशविदेश में इन की ज्यादा कीमत मिलती है. इन वैरायटियों में खाद और पानी की जरूरत भी कम होती है. वैसे बासमती की कुल 17 वैरायटी हैं.
यहां हम बासमती धान (Basmati Paddy) की खेती के वैज्ञानिक पहलुओं पर रोशनी डाल रहे हैं.
बीज और उपचार
स्वस्थ बीज ही स्वस्थ पौध का आधार है, इस के लिए हमेशा प्रमाणित बीज ही इस्तेमाल करना चाहिए. बासमती निर्यात विकास प्रतिष्ठान अच्छी क्वालिटी वाला प्रमाणित आधारीय बीज उपलब्ध कराता है, जिस की 6 किलोग्राम मात्रा प्रति एकड़ काफी है. ट्राइकोडर्मा हरजेनियस की 5 ग्राम मात्रा या फफूंदीनाशक कार्बेंडाजिम की 2 ग्राम मात्रा एक किलोग्राम बीज उपचार के लिए इस्तेमाल करें. बहुत सी बीमारियां बीज द्वारा ही खेतों में पहुंचती हैं, इसलिए बीज उपचार जरूर करें.
बीज का फुटाव
सब से पहले बीजों को 10 फीसदी नमक के घोल में निथार लेना चाहिए. जिस से हलके व खराब बीज ऊपर आ जाएंगे, उन्हें फेंक देना चाहिए. अच्छे बीजों को एक बार साफ पानी में निकाल कर 24 घंटे के लिए पानी में भिगो कर रख दें. इसी समय बीज उपचार के लिए केमिकल को भी पानी में डाल देना चाहिए. 24 घंटे बाद पानी निकाल कर बीजों को एक बोरे में भर कर ऊपर से 4-5 बोरे डाल कर छांव में 24 से 36 घंटे के लिए रखना चाहिए. इस तरह बीज पूरी तरह से अंकुरित हो जाएंगे. इस दौरान बीजों में नमी बनाए रखनी चाहिए.
पौध तैयार करना
बासमती धान में 40 वर्गमीटर प्रति किलोग्राम बीज की दर से नर्सरी की जरूरत होती है. क्यारी बनने से पहले नर्सरी में 200 किलोग्राम प्रति 400 वर्गमीटर में गोबर की खाद मिलानी चाहिए. नर्सरी के लिए सिंचाई व पानी निकालने का इंतजाम वाले खेत में 3-4 जुताई कर के मिट्टी को भुरभुरी बना कर 2 मीटर चौड़ी क्यारियां बना लें. क्यारी बनाते वक्त 2 क्यारियों के बीच में चलनेफिरने और पानी के निकले की जगह रखें.
इन क्यारियों में 3-4 सेंटीमीटर पानी भर कर कीचड़ बना लें. कीचड़ बना कर खेत को एकसार करते समय 4 किलोग्राम यूरिया, ढाई किलोग्राम डीएपी, 2 किलोग्राम म्यूरेट आफ पोटाश और सवा किलोग्राम जिंक प्रति 240 वर्गमीटर (एक एकड़ रोपाई के लिए) डालना चाहिए. अंकुरित बीजों को समान रूप में शाम के समय क्यारी में बिखेर देना चाहिए. नर्सरी की शाम के समय सिंचाई करनी चाहिए. बिजाई के बाद 5-6 दिन तक क्यारी को गीला रखना चाहिए. इस के बाद धीरेधीरे पानी का स्तर बढ़ा कर 3-4 सेंटीमीटर कर देना चाहिए. बिजाई के 10-12 दिन बाद जरूरत होने पर डेढ़ किलोग्राम नाइट्रोजन प्रति 240 वर्गमीटर क्षेत्र को टौप ड्रेसिंग के रूप में देनी चाहिए.
खेत की तैयारी
खेत में धान लगाने से पहले हरी खाद के लिए मूंग, ढैंचा या सनई की फसल लेनी चाहिए. रोपाई से 2-4 दिन पहले हरी खाद को खेत में पलट कर अच्छी तरह मिला दें. साथ ही खेत में पानी भर कर 2-3 बार पडलिंग कर के पाटा लगा कर खेत को समतल बना लेना चाहिए. अच्छी पैदावार के लिए खेत का समतल होना बहुत जरूरी है. इस से सिंचाई के पानी व खर्च में बचत होती है. इस के लिए भले ही खेत को छोटेछोटे हिस्सों में बांटना पड़े.
रोपाई का समय
रोपाई के समय का बासमती की उपज और क्वालिटी पर खास असर पड़ता है. जल्दी रोपाई करने पर परंपरागत बासमती वैरायटियों की बढ़वार अधिक हो जाती है और देर होने पर सही बढ़वार नहीं हो पाती है, दोनों ही दशाओं में उपज में कमी आ जाती है. परंपरागत बासमती वैरायटी की रोपाई का सही समय 10 जुलाई से 30 जुलाई के बीच है. बौनी प्रजातियों को जून के आखिरी हफ्ते से मध्य जुलाई तक रोप देना चाहिए.
उर्वरक व खाद
बासमती धान की परंपरागत प्रजातियों में कम नाइट्रोजन की जरूरत होती है. उर्वरकों का इस्तेमाल मिट्टी की जांच और फसल की मांग के आधार पर करना चाहिए. पूरी फसल के दौरान ऊंची बढ़ने वाली वैरायटी के लिए प्रति हेक्टेयर 60 किलोग्राम नाइट्रोजन, 40 किलोग्राम फास्फोरस, 40 किलोग्राम पोटाश और 25 किलोग्राम जिंक सल्फेट की मात्रा काफी होती है.
बौनी वैरायटी के लिए नाइट्रोजन 90 किलोग्राम होनी चाहिए और बाकी उर्वरक की मात्रा समान है. नाइट्रोजन की आधी मात्रा और फास्फोरस, पोटाश व जिंक की पूरी मात्रा आखिरी पडलिंग के समय इस्तेमाल करनी चाहिए. नाइट्रोजन की बाकी मात्रा को 2 बार में कल्ले फूटते समय और गोभ में बाली बनते समय खड़ी फसल में इस्तेमाल करना चाहिए.
रोपाई का तरीका
पौध में 5-6 पत्तियां बिजाई के 20-25 दिनों में बन जाती हैं, तब समझिए कि पौध रोपाई के लिए तैयार है. पौध उखाड़ने से पहले पानी लगाना चाहिए. इस से पौध उखाड़ने में आसानी रहेगी और जड़ों को भी नुकसान नहीं पहुंचेगा. बीमारी की रोकथाम के लिए भी पानी भर कर पौध उखाड़ना अच्छा होता है. पौध उखाड़ते समय कुछ पौधों की जड़े टूट जाती हैं, कुछ में मिट्टी लगी रहती है. इसलिए पौध को अच्छी तरह साफ कर लें. ध्यान रहे कि पौधा हमेशा सीधा रोपें, तिरछा कभी नहीं.
सिंचाई
रोपाई के समय केवल 3-5 सेंटीमीटर पानी रखें. खेत में रोपाई के बाद दरार बनने से पहले हलकी सी सिंचाई करनी चाहिए. बाद में धीरेधीरे बढ़ा कर पानी 3-5 सेंटीमीटर तक कर देना चाहिए. यह 3-5 सेंटीमीटर पानी पहले 45 दिनों तक बनाए रखें. इस से खरपतवार की रोकथाम में मदद मिलेगी. इस के बाद दाने भरने तक केवल खेत गीला रखने से भी पूरी पैदावार मिलेगी. खेत की मिट्टी में दरार न पड़ने दें.
खरपतवार रोकथाम
अगर मजदूर हैं तो धान की 2 बार 20 व 40 दिनों पर निराई करा देनी चाहिए. केमिकल से रोकथाम के लिए ब्यूटाक्लोर 0.6 किलोग्राम सक्रिय पदार्थ या प्रीटीलाक्लोर 50 ईसी 500 मिलीलीटर या टौप स्टार 45 ग्राम प्रति एकड़ का इस्तेमाल रोपाई के 1-4 दिनों के अंदर करना चाहिए. खरपतवारनाशी इस्तेमाल करते समय खेत में 2-3 सेंटीमीटर पानी होना चाहिए. रोपाई के 10-15 दिनों के बीच पानी भर कर 2 बार हलका पाटा चला दें. यह पाटा 1-2 आदमी चला सकते हैं. इस से खरपतवार खत्म होते हैं और फुटाव अधिक होता है.
कटाई, मड़ाई व भंडारण
जब बाली में 85-90 फीसदी दानों का रंग हरे से सुनहरेपीले रंग में बदल जाए तो फसल को काट लेना चाहिए. कटाई के तुरंत बाद मड़ाई कर के फसल को छांव में सुखाना चाहिए. धूप में सुखाने पर चावल की क्वालिटी खराब हो जाती है. 10-14 फीसदी नमी पर सुखा कर बोरों में भर कर भंडारण ऐसी जगह करें जहां नमी न हो.
इस तरह कुछ जरूरी और तकनीकी बातों को ध्यान में रख कर बासमती धान की खेती की जाए तो पैदावार के साथ क्वालिटी भी बढि़या मिलेगी.
बासमती धान के बारे में बीज, खाद और पानी से संबंधित किसी भी जानकारी या तकनीकी व वैज्ञानिक जानकारी आप इस पते से ले सकते हैं:
बासमती निर्यात विकास प्रतिष्ठान, मोदीपुरम, मेरठ-250110, उत्तर प्रदेश. फोन : 0121-2888554, 2578501. Basmati Paddy





