Cabbage Seeds-
भारत में शरद मौसम में उगाई जाने वाली सब्जियों में पत्तागोभी का खास स्थान है. पत्तागोभी की खेती देश के एक बड़े रकबे में की जाती है. बीज फसल के लिए जुलाईअगस्त में पत्तागोभी की खेती करनी चाहिए.
शुद्ध व अच्छी क्वालिटी वाले बीज तैयार करने के लिए तकनीकी ज्ञान का होना जरूरी है. बीज उत्पादन के समय बीज की शुद्धता व क्वालिटी बनाए रखने के लिए पूरा ध्यान देना चाहिए.
प्रदेश के पहाड़ी इलाके इस की बीज फसल के लिए अच्छी जलवायु होने के कारण अच्छे बीज दे सकते हैं.
जलवायु : पत्तागोभी की खेती साल भर की जाती है. इस की फसल के लिए 15 से 20 डिगरी सेल्सियस तापमान की जरूरत होती है, जो पहाड़ों पर अलगअलग ऊंचाई पर अलगअलग समय में होता है, जिस से साल भर पत्तागोभी की सब्जी मिलती रहती है.
पत्तागोभी में बंद बनने व फूल खिलने के लिए एक खास तापमान की जरूरत पड़ती है. पौधों में फूल बनने के लिए कम से कम डेढ़ से 2 महीने तक 5 से 10 डिगरी सेल्सियस तापमान होना चाहिए, अगर यह तापमान लंबे अरसे तक मिलता है, तो पौधों में जल्दी फूल बनते हैं और अगर तापमान अधिक हो जाता है, तो पौधा वानस्पतिक अवस्था में ही रह जाता है.
बीज फसल के लिए ऐसी जगह होनी चाहिए जहां पर जुलाई से मई तक समयसमय पर बारिश होती हो और पौधों में फलियां बनते समय खूब धूप मिल सके. ऐसी जगह पर ओले का खतरा भी कम होना चाहिए. फसल को ओलों से बचाने के लिए नायलोन के जालों का इंतजाम करना चाहिए.
मिट्टी : पत्तागोभी की खेती के लिए मिट्टी में अच्छी मात्रा में जीवांश होना चाहिए. पानी रोकने वाली व पानी निकास वाली जमीन बीज फसल के लिए अच्छी होती है. पौधों की अच्छी बढ़वार के लिए मिट्टी का पीएच 5.5 से 6.5 होना चाहिए.
खेत की तैयारी : अच्छी फसल के लिए खेत में एक गहरी व एक हलकी जुताई करनी चाहिए. यह खेती असिंचित दशा में मध्यम ऊंचे पहाड़ों में आसानी से की जा सकती है.
अच्छी किस्में : पत्तागोभी की बीज फसल के लिए गोल्डन एकड़ और ग्रीन एक्सप्रेस 2 खास किस्में हैं. इन दोनों प्रजातियों के बंद ठोस, गोल आकार के व स्वादिष्ठ होते हैं. बंद का औसत वजन 750 ग्राम से 1000 ग्राम तक होता है. इस के अलावा पूसा ड्रम, प्राइड आफ इंडिया, ममूथ राक रेड, एक्सप्रेस, डेनिस बाल हेड वगैरह अच्छी किस्में हैं.
बीज उपचार : बीज हमेशा विश्वास वाली जगह से ही लेना चाहिए. अच्छे अंकुरण के साथ बीज कवकनाशी रसायनों से उपचारित होना चाहिए. प्रजनक आधारीय बीज किसी सरकारी संस्था या कृषि विश्वविद्यालय से लेना चाहिए.
नर्सरी का इंतजाम : पौधों को भरपूर धूप मिल सके, इस के लिए नर्सरी खुले स्थान पर बनानी चाहिए और हर साल नर्सरी बनाने के लिए नई जगह का चुनाव करना चाहिए.
केप्टान नामक दवा के 0.3 फीसदी के घोल से 5 लीटर प्रति वर्ग मीटर की दर से नर्सरी की जमीन को उपचारित करना चाहिए.
पत्तागोभी के बीज को लाइनों में 5 से 6 सेंटीमीटर की दूरी पर 1-1.5 सेंटीमीटर की गहराई में लगाते हैं.
नर्सरी की क्यारियां एक मीटर से अधिक चौड़ी नहीं होनी चाहिए और क्यारियां जमीन से 10-15 सेंटीमीटर ऊंची होनी चाहिए.
नर्सरी के लिए एक नाली में 10-12 ग्राम बीज की जरूरत होती है और रोपाई करने के लिए 5-6 वर्ग मीटर पौध क्षेत्र काफी होता है.
नर्सरी में जरूरत के मुताबिक निराईगुड़ाई व सिंचाई करते रहना चाहिए और पौध 4-5 हफ्ते में रोपाई के लायक हो जाती है.
रोपाई : बीज फसल के लिए पौध लगाते वक्त पौध से पौध की दूरी 60 सेमी और लाइन से लाइन की दूरी 60 सेमी रखते हैं.
खाद और उर्वरक : 4-5 क्विंटल सड़ी गोबर की खाद, ढाई किलोग्राम डीएपी, 3 किलोग्राम म्यूरेट आफ पोटाश एक नाली के लिए जरूरी होती है. गोबर की खाद, डीएपी और पोटाश की पूरी मात्रा और यूरिया की एक तिहाई मात्रा पौध रोपण से पहले आखिरी जुताई के समय मिट्टी में मिला देनी चाहिए. यूरिया के बचे भाग की आधी मात्रा रोपाई से 25 से 30 दिन बाद और बाकी मात्रा फूल की शाखाएं फूटते समय जमीन में मिला दें.
पलवार व मिट्टी चढ़ाना : पहाड़ी इलाकों में सितंबर से दिसंबर महीने और मार्च से जून महीने तक अकसर जमीन में नमी की कमी रहती है. इस दौरान पौधों को पानी की ज्यादा जरूरत होती है. इसलिए बीज फसल में नमी की कमी के दिनों में पौधों के चारों ओर 3 से 5 सेंटीमीटर मोटी पलवार की परत बिछा देनी चाहिए. इस से कुछ समय तक नमी बची रहती है. बर्फ गिरने से पहले पलवार को हटा देना चाहिए. फसल में सितंबरअक्तूबर और मार्च में मिट्टी चढ़ाना जरूरी है.
रोगिंग : बीज की शुद्धता के लिए रोगिंग करना बेहद जरूरी है. यह काम बंद के आकार व रंग के आधार पर किस्म को पहचान कर किया जा सकता है. जो पौधे किस्म के मुताबिक न हों और जो पौधे बीमार न हों उन्हें रोगिंग के दौरान खेत से निकाल देना चाहिए. पत्तागोभी एक पर सेचित फसल है. प्रमाणित बीज के लिए पत्तागोभी की 2 किस्मों या गोभीवर्गीय फसलों के खेतों के बीच की दूरी कम से कम डेढ़ किलोमीटर रखनी चाहिए.
बंद से बीज बनाना: इस विधि में नवंबरदिसंबर में पूरी तरह तैयार बंद उखाड़ कर फिर 60×60 सेंटीमीटर की दूरी पर रोपित करते हैं. बीज से बीज तकनीक में बंदों को दूसरी क्यारी में नहीं लगाया जाता है, बल्कि शुरू में ही 60×60 सेंटीमीटर की दूरी पर लगा दिया जाता है. इन दोनों विधियों में तैयार फटे हुए बंदों के ऊपरी एकतिहाई भाग को तेज चाकू की धार से काट दिया जाता है. ध्यान रखें कि बंद काटते समय बंद का बढ़वार वाला भाग न कटने पाए. इस विधि से बीज वाली शाखाएं सीधी निकलती हैं और अच्छी किस्म का बीज तैयार होता है.
तुड़ाई व मंड़ाई : पत्तागोभी की फलियां जब हलके हरे रंग की हो जाएं तो उन्हें टहनियों से अलग कर लेना चाहिए.
पत्तागोभी की फलियों को 4-5 दिन तक ढेर में छायादार जगह पर रखने के बाद फलियों को बोरी में भर कर धूप में सुखाने के बाद मंड़ाई करते हैं.
बीज सुखाना : बीज में नमी को सही स्तर तक लाने के लिए उन को अच्छी तरह साफ कर के धूप में तब तक सुखाते हैं जब तक कि बीज की नमी 7-8 फीसदी तक न आ जाए. इस के बाद बीज की ग्रेडिंग करते हैं, ताकि अच्छी क्वालिटी वाला बीज अगल किया जा सके.
उपज : असिंचित पहाड़ी इलाकों में बीज फसल को नायलोन के जालों में मार्चअप्रैल में ढकने से औसतन 8 से 10 किलोग्राम बीज एक नाली में तैयार हो जाता है. मध्यम ऊंचाई वाले पहाड़ों पर पत्तागोभी की बीजू फसल रोपाई से लगभग 320 से 330 दिन में पक कर तैयार हो जाती है. Cabbage seeds





