मूंगफली की खेती (Peanut Farming) के लिए खरीफ का मौसम सब से अच्छा माना जाता है. सिंचाई की सुविधा हो तो जायद में भी मूंगफली की खेती कर सकते हैं.

मूंगफली की मांग सालभर बनी रहती है. इस से तेल, नमकीन, चटनी और मूंगफली का मक्खन बनाया जाता है. इस की खली भी पशुओं के चारे के काम आती है. ऐसे में सही तरीके से मूंगफली की खेती कर के किसान अच्छी पैदावार ले सकते हैं.

कब करें मूंगफली की खेती?

भारत में मूंगफली की खेती मुख्य रूप से खरीफ मौसम में होती है. इस के अलावा सिंचाई की सुविधा वाले क्षेत्रों में जायद के दौरान भी इसकी खेती की जा सकती है. रबी में इस की खेती कुछ खास क्षेत्रों में ही संभव है, जहां तापमान और मौसम अनुकूल हों.

मूंगफली की कब करें बोआई?

खरीफ में मूंगफली की बोआई का मुख्य समय जून के मध्य से जुलाई के मध्य तक है. मानसून आने पर और खेत में पर्याप्त नमी होने पर बोआई करें. उत्तर भारत में जून के मध्य से जुलाई के पहले पखवाड़े तक का समय सही होता है.

सिंचाई की सुविधा वाले क्षेत्रों में फरवरी के अंत से मार्च तक मूंगफली की बोआई की जा सकती है. कुछ क्षेत्रों में स्थानीय मौसम के अनुसार अप्रैल तक भी बोआई होती है. गरमी की फसल में समय पर सिंचाई करना जरूरी है.

क्या रबी में भी उगा सकते हैं मूंगफली?

देश के हर हिस्से में रबी मौसम में मूंगफली की खेती नहीं की जा सकती. कुछ दक्षिणी और गर। जलवायु वाले क्षेत्रों में रबी मौसम के दौरान मूंगफली उगाई जाती है. उत्तर भारत में सर्दियों के कम तापमान के कारण इस की खेती सामान्यतौर पर खरीफ और जायद में ज्यादा सही रहती है, इसलिए रबी में बोआई से पहले स्थानीय कृषि विज्ञान केंद्र की सलाह जरूर लें.

कैसी मिट्टी और कितनी चाहिए खाद?

मूंगफली के लिए भुरभुरी बलुई दोमट मिट्टी अच्छी रहती है. खेत में पानी नहीं रुकना चाहिए, क्योंकि जलभराव से फलियां सड़ सकती हैं. खेत की जुताई कर के मिट्टी को भुरभुरा और समतल बना लें.

खाद उर्वरक की मात्रा और समय

खेत में अच्छी तरह सड़ी गोबर की खाद डालना फायदेमंद रहता है. खाद और उर्वरकों की मात्रा मिट्टी की जांच के आधार पर तय करें. मूंगफली को फास्फोरस, पोटाश, कैल्शियम और सल्फर की जरूरत होती है.
खासकर कैल्शियम फलियों के अच्छे विकास में मदद करता है. इस के लिए जरूरत के अनुसार जिप्सम का इस्तेमाल कृषि विशेषज्ञ की सलाह से करें.

बीज की मात्रा और बोआई का तरीका
मूंगफली की बोआई के लिए स्वस्थ और प्रमाणित बीज चुनें. सामान्यतौर पर फैलने वाली किस्मों के लिए 60-80 किलोग्राम और गुच्छे वाली किस्मों के लिए 75-100 किलोग्राम बीज प्रति हेक्टेयर की जरूरत हो सकती है.

मूंगफली की उन्नत किस्में

मूंगफली की कुछ प्रचलित किस्में हैं :

-टीजी-37ए

-जीजी-20

-जेएल-24 यानी फुले-प्रगति

-टीएमवी-7

-टीएजी-24

-टीपीजी-41

इन में से अपने क्षेत्र और मौसम के अनुकूल किस्म का चुनाव करें. सभी किस्में हर जगह एक जैसा उत्पादन नहीं देतीं.

समय पर करें सिंचाई और निराईगुड़ाई

बोआई के करीब 20-25 दिन बाद पहली निराईगुड़ाई करें. जरूरत पड़ने पर 40-45 दिन बाद दूसरी बार खरपतवार निकालें. खूंटियां जमीन में जाने लगें तो गहरी गुड़ाई न करें, इस से फलियों को नुकसान पहुंच सकता है.

कब तैयार होती है फसल?

मूंगफली की फसल किस्म के अनुसार करीब 90-150 दिनों में तैयार हो जाती है. जब पौधों की पत्तियां पीली पड़ने लगें, तब कुछ पौधों को निकाल कर फलियों को जांचें. दानों का पूरा विकास होने पर कटाई करें. कटाई के बाद फलियों को अच्छी तरह सुखा कर ही भंडारण करें.

मूंगफली की खेती (Peanut Farming) में अच्छी पैदावार के लिए सही मौसम में बोआई, उन्नत बीज, संतुलित खाद और समय पर सिंचाई जरूरी है. खरीफ इस की मुख्य फसल है, जबकि सिंचाई की सुविधा वाले क्षेत्रों में जायद भी कमाई का अच्छा विकल्प बन सकती है. रबी में खेती करने से पहले अपने क्षेत्र की जलवायु के अनुसार कृषि विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें.

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