Napier Grass-
अगर आप खेती के साथ पशुपालन भी करते हैं तो आप जानते ही होंगे कि बिना हरे चारे के दुधारू पशुओं का दूध नहीं बढ़ता. सूखे भूसे से पेट तो भर जाता है, पर थन में दूध हरे चारे से ही उतरता है. हरे चारों में नेपियर चारा या नेपियर घास पशुओं के लिए पौष्टिक और स्वादिष्ट हरा चारा है.
क्या है नेपियर चारा ?
नेपियर चारा प्रोटीन , कैल्शियम और फाइबर से भरपूर स्वादिष्ट चारा है , जिसे पशु बड़े स्वाद से खाते हैं. इससे पशुओं का पाचन सुधरता है और दूध में 10 से 15 फीसदी तक बढ़ोत्तरी होती है. खासकर गर्मी और सर्दी में जब बरसीम नहीं मिलती उस समय यह बहुत काम आता है.
पशुओं का पसंदीदा चारा
इसकी पत्तियां नरम और रसदार होती हैं. ज्वारबाजरे की तरह इसमें तीखापन नहीं होता बल्कि मिठास होती है. इसलिए गायभैंस दोनों इसे चाव से खाती हैं. रोज हरा चारा मिलने से पशु का स्वास्थ्य अच्छा रहता है, बारबार बीमार नहीं पड़ता और ब्याने का समय भी ठीक रहता है.
एक बार लगाओ 3 साल तक काटो
एक बार जड़ लगा दी तो 2 से 3 साल तक हर 25-30 दिन में कटाई करें. इस चारे को को खेत की मेंड पर भी लगाया जा सकता है जिससे किसान का खेत भी नहीं घिरता. खाली खेत में आप अन्य फसल ले सकते हैं.
सरकार दे रही है 4000 रुपये
पशुपालन विभाग की चारा विकास योजना के तहत नेपियर लगाने पर 4000 रुपये प्रति एकड़ की मदद दी जा रही है.
ये मदद नकद नहीं, बल्कि अच्छी किस्म की जड़ (स्लिप) के रूप में या अनुदान के रूप में मिलती है.
फायदा कैसे लें?
जो किसान इस योजना का लाभ लेना चाहते हैं वह अपने ब्लॉक के पशु अस्पताल में जाएं. वहां से ‘बारहमासी चारा योजना’ का फॉर्म लें. आवेदन करते समय आधार, पशुओं की टैगिंग और जमीन की नकल लगेगी. उसके बाद विभाग वाले ही आपको CO-4, CO-5 जैसी उन्नत किस्म की जड़ देंगे, जो सबसे ज्यादा दूध बढ़ाने वाली मानी जाती है.
कहां लगाएं – खेत नहीं तो भी चलेगा
खेत की मेड़ पर, बाग के किनारे, घर के पीछे, नाले के किनारे , जहां थोड़ी नमी हो और पानी निकासी हो.





