El Nino Alert-

अल नीनो इस समय दुनिया में मौसम से जुड़ी बड़ी चिंता बना हुआ है. प्रशांत महासागर के पानी का तापमान सामान्य से ज्यादा बढ़ने पर अल नीनो की स्थिति बनती है. इसका असर भारत के मानसून पर भी पड़ सकता है. मानसून कमजोर रहने पर बारिश कम या अनियमित हो सकती है, जिससे किसानों को परेशानी का सामना करना पड़ सकता है.

क्या है अल नीनो?

अल नीनो प्रशांत महासागर में होने वाला एक प्राकृतिक बदलाव है. इसके दौरान समुद्र का पानी सामान्य से ज्यादा गर्म हो जाता है. इसका असर हवाओं और बादलों की चाल पर पड़ता है. इससे भारत समेत दुनिया के कई हिस्सों में बारिश और तापमान प्रभावित हो सकते हैं.

अल नीनो के उलट स्थिति को ला नीना कहा जाता है, जब प्रशांत महासागर का पानी सामान्य से ठंडा हो जाता है. इन दोनों के बीच सामान्य स्थिति भी होती है.

मानसून कमजोर हुआ तो क्या होगा?
भारत की खेती का बड़ा हिस्सा आज भी बारिश पर निर्भर है. इसलिए मानसून कमजोर रहने पर खरीफ फसलों पर सीधा असर पड़ सकता है. धान, मक्का, सोयाबीन, कपास, दलहन और तिलहन जैसी फसलों में पानी की कमी से उत्पादन घट सकता है.

बारिश देर से आने पर बुआई और धान की रोपाई में देरी हो सकती है. वहीं लंबे समय तक बारिश न होने के बाद अचानक तेज बारिश होने से खेतों में पानी भर सकता है और फसल खराब हो सकती है.

सिर्फ खेती ही नहीं, पशुपालन पर भी असर
कम बारिश से तालाब, कुएं और जलाशयों में पानी कम हो सकता है. इसका असर सिंचाई के साथ पशुओं के पीने के पानी और हरे चारे पर भी पड़ सकता है. चारे की कमी से दूध उत्पादन और पशुपालकों की आय प्रभावित हो सकती है.

हर अल नीनो का मतलब सूखा नहीं
यह जरूरी नहीं कि अल नीनो आते ही पूरे भारत में सूखा पड़ जाए. भारत के मानसून पर कई दूसरे मौसम संबंधी कारणों का भी असर पड़ता है. इसलिए मौसम वैज्ञानिक केवल अल नीनो देखकर मानसून का फैसला नहीं करते.

किसानों को क्या करना चाहिए?
मौसम की जानकारी लेकर खेती की योजना बनाना इस समय सबसे जरूरी है. किसान स्थानीय कृषि विज्ञान केंद्र और कृषि विभाग की सलाह के अनुसार फसल का चुनाव करें.

कम पानी में तैयार होने वाली और कम अवधि की फसलों की किस्मों को प्राथमिकता दी जा सकती है. खेत में बारिश का पानी रोकने के लिए मेड़बंदी, खेत तालाब और वर्षा जल संचयन जैसे उपाय उपयोगी हैं. ड्रिप और स्प्रिंकलर जैसी सिंचाई तकनीकों से भी पानी बचाया जा सकता है.

धान जैसी ज्यादा पानी मांगने वाली फसलों में पानी बचाने वाली तकनीकों को अपनाना भी फायदेमंद है. साथ ही फसल बीमा और मौसम आधारित कृषि सलाह का लाभ लेना चाहिए.

सरकार की तैयारी
कम बारिश या मानसून में देरी की स्थिति से निपटने के लिए कृषि विभाग और कृषि वैज्ञानिक किसानों के लिए वैकल्पिक फसल और खेती की योजनाएं तैयार करते हैं. कृषि विज्ञान केंद्रों और मौसम विभाग की सलाह किसानों तक मोबाइल संदेश और अन्य माध्यमों से पहुंचाई जाती है.

अल नीनो एक प्राकृतिक मौसम घटना है, लेकिन बदलते जलवायु दौर में इसका असर समझना जरूरी है. किसानों के लिए समय पर मौसम की जानकारी, पानी का सही इस्तेमाल और फसल में विविधता अपनाना जोखिम कम करने में मददगार हो सकता है.El Nino Alert

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