चने की खेती (Chickpea Farming) करने वाले किसानों के लिए अच्छी खबर है. बिहार कृषि विश्वविद्यालय (बीएयू), सबौर ने चने की नई उन्नत किस्म ‘सबौर चना-4’ विकसित की है.
इस नई किस्म को बीएयू की 32वीं अनुसंधान परिषद की दो दिवसीय बैठक में जारी किया गया. विश्वविद्यालय के अनुसार, सबौर चना-4 की फसल करीब 122 दिनों में तैयार हो जाती है. इस की उपज क्षमता 18 से 19 क्विंटल प्रति हेक्टेयर बताई गई है.
मशीन से कटाई, कम होगा खर्च
इस की खासीयत है कि इस की कटाई मशीन से आसानी से की जा सकती है. इस से किसानों को मजदूरी और खेती की लागत में करीब 22 फीसदी तक बचत हो सकती है.
इस से कटाई में लगने वाला समय और मजदूरी का खर्च कम किया जा सकेगा. मशीनों के इस्तेमाल से किसानों को कम लागत में चने की फसल तैयार करने में मदद मिलेगी.
100 शोध पर वैज्ञानिकों ने की चर्चा
अनुसंधान परिषद की बैठक के दूसरे दिन 5 शोध समूहों में करीब 100 शोध प्रस्तुतियां रखी गईं. इन में वैज्ञानिकों, कृषि विशेषज्ञों, शोधार्थियों और किसानों ने खेती से जुड़ी नई तकनीकों और अनुसंधान पर चर्चा की.
विश्वविद्यालय के कुलपति डा. डीआर सिंह ने शोध प्रस्तुतियों के लिए एक समान प्रारूप और समय तय करने का निर्देश दिया. उन्होंने कहा कि इस से अनुसंधान परिषद की बैठक अधिक व्यवस्थित ढंग से हो सकेगी.
विशेषज्ञ डा. देवेंद्र सिंह ने कहा कि खेती से जुड़े शोध का असली फायदा तभी है, जब नई तकनीक किसानों के खेतों तक पहुंचे. वहीं डा. एपी सिंह ने खेती में अलगअलग फसलें लगाने, जैविक खेती, एकसाथ कई कृषि गतिविधियां अपनाने और उपज से नए उत्पाद तैयार करने पर जोर दिया.
डीन पीजी स्टडीज डा. जेएन श्रीवास्तव ने वैज्ञानिकों के लिए शुरू की गई सीड मनी परियोजनाओं को नए शोध और तकनीक विकसित करने की अच्छी पहल बताया.
नई किस्म सबौर चना-4 से चना उत्पादक किसानों को कम लागत में बेहतर उत्पादन लेने और मशीनों से खेती को बढ़ावा देने में मदद मिलने की उम्मीद है.





