दीवाली के दौरान फल मंडियों में कश्मीरी सेब (Kashmiri Apples) की अच्छी मांग होती है, लेकिन इस समय फसल पर स्कैब बीमारी की वजह से सेब की खेती और बाजारों में खतरा बना हुआ है. इस स्कैब की वजह से किसानो की अच्छी गुणवत्ता वाले सेब की मांगों पर प्रभाव पड़ रहा है. इससे किसानों और कारोबारियों को अपनी उपज के बेहतर दाम मिलने में परेशानी हो रही है.

स्केब बीमारी है का इसे क्या हुआ असर?

कश्मीर के फ्रूट डीलर्स के अनुसार, इस साल सेब की फसल पर प्राइमरी और सेकेंडरी दोनों तरह के स्कैब रोग बड़े पैमाने पर असर डाल रहे हैं. इससे फलों की गुणवत्ता में गिरावट आई है.
उन्होंने बताया कि मंडियों में पहुँचने वाले लगभग 50 से 55 प्रतिशत सेब ग्रेड‑B और ग्रेड‑C के हैं, और कुछ जगहों पर यह प्रतिशत 60 प्रतिशत तक पहुँच रहा है. इन किस्मों की मांग कम होने के कारण किसानों को अच्छे दाम नहीं मिल पा रहे हैं.

ग्रेड -A सेब की मांगों में हुई बढ़ोतरी

दीवाली के त्योहार के वक्त बड़े आकार वाले ग्रेड-A कश्मीरी सेब और गिफ्ट पैक की मांग बहुत अच्छी है. लेकिन बीमारी के कारण अच्छी गुणवत्ता वाले सेब की आपूर्ति ठीक तरह से नहीं हो रही है. किसानों के लिए मुश्किल यह है कि ग्रेड-A, B और C सभी तरह के सेब लगभग एक ही लागत पर उगाए जाते हैं, लेकिन बाजार में ज्यादा पैसा ग्रेड-A सेब से ही मिलता है.

जाने मंडी में सेब के बॉक्स की कीमत

कश्मीर के सेब व्यापारियों के मुताबिक, बाजार में कीमतें ठीक-ठाक हैं. लकड़ी के एक सेब क्रेट के लिए लगभग 1300 रुपये दिए जा रहे हैं, जबकि सेब रखे हुए गत्ते के कार्टून्स 600 रुपये तक में खरीदे जा सकते हैं.

दीवाली के चलते बाजार में अच्छी मांग है. हर दिन लगभग 400 से 500 ट्रक सेब मंडी से भेजे जाते हैं, जो देश के अलग-अलग हिस्सों में जाते हैं.

इस समय कश्मीरी सेब (Kashmiri Apples) किसानों के लिए आवश्यक है कि, सेब की स्कैब बीमारी दूर हो और किसान अपनी फसल की गुणवत्ता और सही ग्रेड हासिल कर पाएं , क्योंकि इससे उनकी कमाई बढ़ सकती है.

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