Bonsai Gardening-
जरा कल्पना करें कि आम, जामुन, नीम, बरगद, शीशम, इमली व पीपल जैसे पेड़ घर के ड्राइंगरूम में सजे नजर आएं तो कैसा लगेगा? यकीनन अच्छा लगेगा. बोनसाई के जरीए ऐसा मुमकिन हो सका है. विशाल पेड़ों की चोटी अब आप खड़ेखड़े छू सकते हैं.
गमले में कैसे करें बोनसाई
बोनसाई के लिए छिछले गमले इस्तेमाल किए जाते हैं. मानक बोनसाई पात्र की ऊंचाई 25 सेंटीमीटर से भी कम होती है और इस का आयतन 2 से 10 लीटर तक होता है. ये गमले कई प्रकार के होते हैं जैसे कि अंडाकार, गोलाकार, वर्गाकार या चौकोर.
छिछले गमलों में पानी के निकास के लिए 2 छेद होने चाहिए. इस के अलावा गमले के किनारे पर 4 और छोटेछोटे छेद करने चाहिए, इन चारों छेदों में से तांबे के तार डालिए, जो कि आधे गमले के ऊपर हों और आधे गमले के नीचे निकले हों.
ऐसा करने पर जब जड़ों की कटाईछंटाई की जाती है, तब गमले से पौधे को निकालने में सुविधा होती है और जड़ों की छंटाई के बाद पौधे को गमले से बांधने में सुविधा होती है. मगर जब बोनसाई झुकी या अर्ध झुकी पद्धति के बनाने हों तो गहरे गमलों का चुनाव करें, क्योंकि पौधे के झुकाव के कारण छिछला गमला पलट जाएगा.
बोनसाई उगाने के लिए पानी की निकासी वाले पात्रों का ही इस्तेमाल किया जाना चाहिए और ये पात्र चिकनी मिट्टी, प्लास्टिक या लकड़ी के हो सकते हैं. पानी निकलने वाली जगह पर मिट्टी को रोकने के लिए एक कोयले का टुकड़ा लगाना अच्छा माना जाता है. पात्र के अंदर जड़ों में घुमाव नहीं होना चाहिए और न ही पात्र की दीवारों से जड़ों को चिपकने देना चाहिए. इस के लिए जड़ों को समयसमय पर कैंची से काटते रहना चाहिए. पात्र में बोनसाई पेड़ को बीच से थोड़ा हट कर लगाना अच्छा होता है.
बोनसाई के लिए मिट्टी :
बोनसाई के लिए मिट्टी भुरभुरी होनी चाहिए ताकि पानी आसानी से बाहर निकल जाए. बर्तनों में लाल मिट्टी, गोबर की खाद या केंचुआ खाद, रेत व पत्ती की सड़ी खाद को बराबरबराबर मात्रा में मिला कर भरना चाहिए.
पौधे तैयार करना:
बोनसाई के लिए वानस्पतिक तरीके द्वारा पौधे तैयार किए जाते हैं, क्योंकि ऐसे पौधे तैयार होने में ज्यादा समय नहीं लगता. बीजों द्वारा भी पौधे तैयार किए जाते हैं, पर इस में ज्यादा वक्त लगता है.
रोपाई का समय : पौधों की ज्यादातर प्रजातियों की रोपाई जुलाईअगस्त महीनों के दौरान की जाती है.
कटाईछंटाई :
बोनसाई बनाने के लिए कटाईछंटाई बहुत जरूरी है. सुंदर व आकर्षक बोनसाई कटाईछंटाई के द्वारा ही बनाए जाते हैं.
कटाईछंटाई करते समय जितनी जरूरी हों, उतनी टहनियों को रखें बाकी सभी टहनियों को काट दें. इस बात का भी ध्यान रखें कि जब पीपल, बरगद जैसे बड़े पेड़ों का बोनसाई बनाना हो तो जड़ के पास से निकलने वाली सभी शाखाओं को काट दें. जब बहुतना बोनसाई बनाना हो तो जड़ के पास से निकलने वाली शाखाओं में से जितनी जरूरी हों उस से 2-4 शाखाएं ज्यादा रख लें, जिस से कि यदि कोई शाखा खराब हो जाए तो बची शाखाओं से बहुतना आकार दिया जा सके.
दोबारा रोपाई:
बोनसाई पेड़ की हालत व उम्र के मुताबिक नियमित अंतराल पर गमला या पात्र बदलना चाहिए. आमतौर पर नर्सरी में विकसित पौधे को वहां से निकाल कर बोनसाई पात्र में रोपा जाता है. अगर गमले या बोनसाई पात्र की मिट्टी के ऊपर जड़ फैलने लगे या पात्र के नीचे का सुराख, जड़ों के ज्यादा निकल जाने से बंद होने लगे, तो ऐसी हालत में गमला या पात्र बदल देना चाहिए.
जड़ों के बढ़ने को यदि समय से नहीं रोका गया तो बोनसाई पेड़ गमले के मुकाबले ज्यादा बड़ा हो जाएगा. पुरानी जड़ें पानी और पोषक पदार्थों का अवशोषण बहुत धीमी गति से करती हैं या नहीं कर पाती हैं, इसलिए उन्हें काट कर हटा देना चाहिए, ताकि नई जड़ें विकसित हों जो पानी और पोषक पदार्थों का भलीभांति अवशोषण कर सकें. दोबारा रोपाई करने के लिए पहले तो सावधानी से पौधे को अलग कर लें, फिर जड़ों में लगी हुई मिट्टी को हटा दें और फिर चारों ओर से 75 फीसदी जड़ों को काट दें. जब मुख्य जड़ को काटें तो कट तिरछा लगाएं. इस के बाद नए गमले में तारों की सहायता से पौधे को लगा दें और मिट्टी को पहले बताए गए अनुपात के मुताबिक भरें. इस के बाद पौधे की सिंचाई कर दें. जड़ों की कटाईछंटाई से बोनसाई पेड़ों का आकार काबू में रहता है. बड़ी व मोटी जड़ों को और गमले की सतह की ओर जाती हुई जड़ों को काट दें.
बस पतलीनाजुक जड़ों के जाल को ऊपरी सतह पर रहने दें. पेड़, जड़ों के सिरों से पानी खींचता है, इसलिए छोटे गमले में 1 मोटी गहरी जड़ की बजाय जड़ों का जाल अच्छा रहता है.
खाद व उर्वरक : बोनसाई के लिए गोबर की खाद, नीम की खली, मूंगफली की खली, अरंडी की खली व पत्तियों की सड़ी खाद अच्छी रहती है. मूंगफली की खली और नीम की खली की 1 किलोग्राम मात्रा को 5 लीटर पानी में भिगो देना चाहिए और इसे 1 महीने तक रखना चाहिए. फिर इसे 5 गुने पानी में मिला कर पेड़ में महीने में 2 बार देना चाहिए और साथ में चुटकी भर हड्डी का चूरा और सिंगल सुपर फास्फेट को?भी मिला देना चाहिए.
बोनसाई के फायदे
* बोनसाई एक अच्छा रोजगार भी है. इस की देखभाल गृहणियों द्वारा अच्छी तरह से की जा सकती है.
* जगह की कमी के कारण जो पेड़ घर में लगाना मुमकिन नहीं था, वे भी अब हम अपने घरों में लगा सकते हैं.
* बोनसाई बेहद सुंदर व आकर्षक होता है. यह घर की शोभा बढ़ाता है.
तमाम फसलें खराब मौसम के कारण कई बार खराब हो जाती हैं और किसानों को नुकसान हो जाता है, लेकिन बोनसाई को खराब मौसम से बचाया जा सकता है.
* अन्य फसलों, फलों और सब्जियों की तरह इसे तय समय पर काटना और बेचना नहीं पड़ता.
* फल, फूल और सब्जियों के खराब हो जाने के कारण कई बार किसानों को सही मूल्य नहीं मिल पाता और खराब हो जाने के डर से किसान उन्हें कम कीमत पर बेच दिया करते हैं, किंतु बोनसाई की सही देखभाल साल दर साल उस की कीमत को बढ़ाती है.
* बागबानी तनाव को दूर रखने में मदद करती है, किंतु शहरों में बागबानी मुमकिन नहीं हो पाती, ऐसे में बोनसाई एक अच्छा जरीया है.
* बुजुर्ग लोग जिन का समय नहीं कटता, वे बोनसाई लगा कर अपनेआप को व्यस्त रख सकते हैं.
* जिन किसानों के पास खेती के कम रकबे हैं, उन लोगों के लिए बोनसाई एक अच्छा जरीया है.
* अगर घर में बोनसाई लगाया जाएगा, तो घर के बच्चे भी पेड़ों के महत्त्व को समझेंगे और उन के रखरखाव को बेहद आसानी से सीख जाएंगे.





