Sugarcane Farming : बिहार में गन्ना की होगी आधुनिक खेती

Sugarcane Farming: बिहार के किसानों ने गन्ने की खेती में बढ़ती लागत और समय पर तकनीकी जानकारी नहीं मिलने के कारण गन्ने की खेती से दूरी बना ली थी, लेकिन अब प्रदेश सरकार गन्ने की खेती को कहीं अधिक लाभकारी बनाने के लिए खास योजना पर काम कर रही है, इसलिए अब गन्ना की खेती आने वाले समय में बिहार के किसानों के दिन बदलने वाली है. जानिए, क्याक्या बदलाव होने जा रहा है?

बढ़ेगा गन्ने का रकबा, चलेंगी मिलें, होगा मुनाफा

बिहार राज्य में गन्ने की खेती को बढ़ावा देने के लिए अब गांव और पंचायत स्तर पर विशेष अभियान शुरू करने जा रही है. इस अभियान के तहत पंचायतों में किसान कार्यशालाएं आयोजित कर किसानों को गन्ने की आधुनिक, वैज्ञानिक और लाभकारी खेती के लिए जागरूक किया जाएगा.

इसके अलावा किसानों को सरकारी अनुदान, बीज उपलब्धता और विभिन्न योजनाओं की जानकारी भी दी जाएगी.

बढ़ेगा गन्ने का रकबा, किसानों की होगी आय

गन्ना उद्योग विभाग द्वारा तैयार की गई इस योजना का मकसद राज्य में गन्ने का रकबा और उत्पादन बढ़ाना है, ताकि किसानों की आय में वृद्धि हो सके और चीनी व गुड़ उद्योगों को पर्याप्त मात्रा में कच्चा माल भी मिल सके जिससे वह भी सुचारू रूप से चल सकें.

अन्य फसलों की तुलन में गन्ना फसल देती है अधिक लाभ

सरकार का मानना है कि गेहूं और धान जैसी पारंपरिक फसलों की तुलना में गन्ने की खेती किसानों के लिए अधिक लाभदायक साबित हो सकती है. इस अभियान में कृषि, सहकारिता, लघु जल संसाधन, जल संसाधन, पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन, पंचायती राज तथा राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग के अधिकारी भी शामिल होंगे और किसानों को विभिन्न सरकारी योजनाओं की जानकारी देंगे. जिन क्षेत्रों में चीनी मिलें संचालित नहीं हैं, वहां किसानों को गुड़ उत्पादन और गन्ना बीज तैयार करने के लिए भी प्रोत्साहित किया जाएगा.

45,000 गांवों तक पहुंचेगी उन्नत खेती की जानकारी

सरकार का लक्ष्य राज्य की तकरीबन 8,000 पंचायतों और 45,000 गांवों तक पहुंच बनाना है. पहले चरण में उन पंचायतों को प्राथमिकता दी जाएगी जहां पहले से गन्ने की खेती होती रही है या जहां गन्ने की खेती होने की संभावनाएं अधिक हैं. इस दौरान कृषि विशेषज्ञों द्वारा किसानों को उन्नत बीज, आधुनिक कृषि यंत्र, ड्रिप सिंचाई, जैविक खाद, कीट नियंत्रण और कम लागत में अधिक उत्पादन की तकनीकों की जानकारी दी जाएगी.

नकदी फसल है गन्ना

पिछले दिनों बिहार के किसानों ने बढ़ती लागत और समय पर तकनीकी जानकारी नहीं मिलने के कारण गन्ने की खेती से दूरी बना ली थी, इसलिए अब किसानों को यह भी समझाया जाएगा कि नकदी फसल के रूप में गन्ना किस तरह पारंपरिक खेती की तुलना में अधिक मुनाफा दे सकती है. किसानों से कृषि एक्सपर्ट्स की सीधे बात होने पर किसानों का भरोसा बढ़ेगा और वह फिर से गन्ने की खेत की ओर अग्रसर हो सकेंगे.

सरकार को अपनी इस पहल से उम्मीद है कि बिहार राज्य में गन्ना उत्पादन बढ़ेगा, किसानों का भरोसा बढ़ेगा, ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी और नई चीनी मिलों को पर्याप्त मात्रा में गन्ना उपलब्ध हो सकेगा तो चीनी मिलें भी निर्बाध रूप से चल सकेंगी.

U.P. Government Scheme: स्वदेशी गोपालन पर मिलेगी भारी सब्सिडी

U.P. Government Scheme : स्वदेशी नस्ल की गायों को बढ़ावा देने और दूध की बिक्री को मजबूत करने के लिए उत्तर प्रदेश सरकार ने चार महत्वपूर्ण योजनाएं शुरू की हैं. इन योजनाओं के माध्यम से किसानों और पशुपालकों को आर्थिक सहायता दी जाएगी. इन योजनाओं में मुख्यमंत्री स्वदेशी गौ संवर्धन योजना, मुख्यमंत्री प्रगतिशील पशुपालक प्रोत्साहन योजना, नंदिनी कृषक समृद्धि योजना और मिनी नंदिनी कृषक समृद्धि योजना शामिल हैं. सरकार 2 से 25 गायों तक की डेयरी यूनिट स्थापित करने पर किसानों को लाखों रुपये तक का अनुदान दे रही है.

डेयरी के कारोबार में किसानो को अब मिलेगी सरकारी मदद

पशुपालन विभाग के अपर मुख्य सचिव मुकेश मेश्राम के अनुसार, सरकार स्वदेशी और अच्छी नस्ल की गायों को पालने के लिए किसानों की आर्थिक मदद कर रही है. नन्दिनी कृषक समृद्धि योजना और मिनी नन्दिनी कृषक समृद्धि योजना के तहत डेयरी यूनिट लगाने और दूध का उत्पादन बढ़ाने के लिए 50 प्रतिशत की मदद दी जाएगी. इस योजना में किसानों को स्वयं 15 प्रतिशत पैसा लगाना होगा, जबकि 35 प्रतिशत बैंक से लोन लेना होगा और बाकी पचास प्रतिशत सरकार सब्सिडी देगी. इससे छोटे और मध्यम किसानों के लिए डेयरी का काम शुरू करना आसान हो जाएगा और उनके लिए यह किफायती भी होगा.

स्वदेशी गायों को पालने वाले किसानों को मिलेगी मदद

मुख्यमंत्री स्वदेशी गौ-संवर्धन योजना के तहत किसानों को दो गायों वाली डेयरी यूनिट पर अधिकतम 80 हजार रुपये तक का अनुदान मिल रहा है. इस योजना का मुख्य उद्देश्य प्रदेश में आधुनिक डेयरी व्यवस्था को बढ़ावा देना और स्वदेशी नस्ल की गायों के पालन को प्रोत्साहित करना है.

मुख्यमंत्री प्रगतिशील पशुपालक प्रोत्साहन योजना के तहत उन्नत स्वदेशी नस्ल की गायों का पालन करने वाले पशुपालकों को 10 हजार से 15 हजार रुपये तक की प्रोत्साहन राशि दी जा रही है. सरकार का मानना है कि इससे न केवल स्वदेशी नस्लों का संरक्षण होगा, बल्कि दुग्ध उत्पादन में भी वृद्धि होगी.

स्वदेशी नस्लों के संरक्षण पर सरकार का जोर

सरकार गिर, साहीवाल और गंगातीरी जैसी उन्नत स्वदेशी नस्लों के संरक्षण और विकास को प्राथमिकता दे रही है. इन योजनाओं के जरिए गांवों में रोजगार के नए अवसर तैयार होंगे और डेयरी क्षेत्र को मजबूती मिलेगी.

साथ ही महिलाओं और युवाओं को डेयरी व्यवसाय से जोड़कर आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में तेजी से काम किया जा रहा है. इससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलने के साथ किसानों की आय बढ़ाने में भी मदद मिलेगी.

ग्रामीण क्षेत्र में तेजी से फैल रहा डेयरी कारोबार

सरकार की स्वदेशी गो आधारित योजनाओं का प्रभाव अब प्रदेश के ग्रामीण इलाके में साफ दिखाई देने लगा है. मुख्यमंत्री स्वदेशी गो-संवर्धन योजना के तहत अब तक 1,500 से अधिक डेयरी इकाइयां स्थापित की जा चुकी हैं. इसके अलावा, प्रगतिशील पशुपालक प्रोत्साहन योजना के तहत 7,250 से ज्यादा पशुपालकों को सम्मानित और प्रोत्साहित किया गया है. नन्दिनी कृषक समृद्धि योजना के तहत 72 और मिनी नन्दिनी योजना के जरिए 245 डेयरी इकाइयों की स्थापना की गई है.

यह सभी योजनाएं ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलने के साथ गांवों में रोजगार के नए अवसर बढ़ाने में मदद कर रही हैं. इन योजनाओं से गांवों में स्थिति में सुधार हो रहा है और लोगों को रोजगार के नए अवसर मिल रहे हैं. U.P. Government Scheme

Balanced Fertilizer Usage : यूरिया उपयोग घटा, जागरूकता से बचे करोड़ों

Balanced Fertilizer Usage : हरियाणा का यमुनानगर जिला खेती में संतुलित उर्वरक उपयोग का उदाहरण बनकर उभरा है. यहां किसानों की जागरूकता और कृषि विभाग की रणनीति के कारण वित्त वर्ष 2025-26 में यूरिया की खपत में लगभग 22% की कमी दर्ज की गई है.

हरियाणा कृषि एवं किसान कल्याण विभाग के अनुसार, जिले में 2024-25 में यूरिया की खपत लगभग 1.52 लाख मीट्रिक टन थी, जो 2025-26 में घटकर करीब 1.25 लाख मीट्रिक टन रह गई. इसे कृषि क्षेत्र में सकारात्मक बदलाव माना जा रहा है.

किसानों की जागरूकता से कम हुआ यूरिया उपयोग

मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, यह कमी लगभग 6.136 लाख यूरिया बैग के बराबर है. हर 45 किलो के बैग पर सरकार करीब 2,000 रुपये की सब्सिडी देती है. इस तरह जिले ने एक साल में लगभग 123 करोड़ रुपये की सब्सिडी बचाने में योगदान दिया है.

यमुनानगर के कृषि एवं किसान कल्याण विभाग के उप निदेशक डॉ. आदित्य प्रताप दबास ने बताया कि, किसानों को संतुलित उर्वरक उपयोग के लिए लगातार जागरूक किया गया, जिससे खेती अधिक टिकाऊ बनी और मिट्टी की गुणवत्ता में सुधार हुआ.

कृषि विभाग की रणनीति से बदली तस्वीर

कृषि विभाग ने गांव स्तर पर उर्वरक प्रबंधन योजना तैयार की और किसानों को सही मात्रा में खाद उपयोग की जानकारी दी. खेतों में प्रदर्शन और मृदा स्वास्थ्य कार्ड के जरिए किसानों को वैज्ञानिक तरीके से उर्वरक उपयोग के फायदे समझाए गए.

POS मशीनों और “मेरी फसल मेरा ब्योरा” पोर्टल के जरिए उर्वरक वितरण की रियल टाइम मॉनिटरिंग की गई, जिससे रियायती यूरिया सही किसानों तक पहुंच सका और फर्जी खरीद पर रोक लगी.

नियम तोड़ने वालों पर सख्त कार्रवाई

सब्सिडी वाले यूरिया के गलत इस्तेमाल को रोकने के लिए कृषि विभाग ने 14 मामले दर्ज किए और 6,845 यूरिया बैग जब्त किए. नियमों का उल्लंघन करने वाले 30 उर्वरक विक्रेताओं के लाइसेंस भी रद्द किए गए.

IFFCO-MC Crop Science : मिला नया नेतृत्व, दिलीप संघानी बने चेयरमैन

भारत की प्रमुख कृषि रसायन कंपनी IFFCO-MC Crop Science Pvt. Ltd. ने अपनी 47वीं बोर्ड बैठक में एक महत्वपूर्ण निर्णय लेते हुए दिलीप संघानी को सर्वसम्मति से कंपनी का नया चेयरमैन नियुक्त किया है. यह निर्णय इफको सदन में बोर्ड सदस्यों और वरिष्ठ अधिकारियों की उपस्थिति में औपचारिक रूप से स्वीकृत किया गया.

कंपनी की विकास यात्रा में महत्वपूर्ण कदम

दिलीप संघानी की नियुक्ति को कंपनी की विकास यात्रा में एक बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है. उम्मीद की जा रही है कि उनके नेतृत्व में संगठन को नई सोच, बेहतर प्रबंधन और किसानों के लिए बनाई गई नीतियों को और मजबूती मिलेगी. यह बदलाव ऐसे समय में हुआ है जब भारतीय कृषि क्षेत्र तकनीकी बदलाव, टिकाऊ खेती और अधिक उत्पादन की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है.

सहकारी क्षेत्र में तीन दशकों का अनुभव

दिलीप संघानी वर्तमान में इंडियन फार्मर्स फर्टिलाइजर कोऑपरेटिव लिमिटेड के चेयरमैन हैं. उन्होंने लगभग तीन दशकों से भारत के सहकारी आंदोलन को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है.

इसके अलावा, उन्होंने निम्न प्रमुख सहकारी संस्थाओं में भी महत्वपूर्ण पदों पर कार्य किया है-
• नेशनल एग्रीकल्चरल कोऑपरेटिव मार्केटिंग फेडरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड
• नेशनल कोऑपरेटिव यूनियन ऑफ इंडिया
• गुजरात स्टेट कोऑपरेटिव ऑयल सीड्स ग्रोवर्स फेडरेशन लिमिटेड

राजनीति और कृषि प्रशासन का व्यापक अनुभव

दिलीप संघानी अमरेली लोकसभा क्षेत्र से चार बार सांसद रह चुके हैं. इसके साथ ही उन्होंने गुजरात विधानसभा में विधायक के रूप में भी कार्य किया है. उन्होंने कृषि, सहकारिता और पशुपालन जैसे महत्वपूर्ण विभागों का नेतृत्व किया है. किसानों के हित में नीतियां बनाने और सहकारी क्षेत्र को नई दिशा देने वाले नेता के रूप में उनकी पहचान रही है.

कृषि इनपुट और फसल सुरक्षा क्षेत्र को मिलेगा बढ़ावा

कंपनी को उम्मीद है कि नए नेतृत्व में कृषि इनपुट सेक्टर और फसल सुरक्षा क्षेत्र में नई तकनीकों और सुधारों को गति मिलेगी. उनके रणनीतिक दृष्टिकोण के कारण इफको-एमसी क्रॉप साइंस प्राइवेट लिमिटेड अपने लक्ष्यों को अधिक प्रभावी तरीके से हासिल कर सकेगी. कंपनी का मुख्य उद्देश्य किसानों को बेहतर और आधुनिक फसल सुरक्षा तकनीक उपलब्ध कराना और देश में स्थायी कृषि को बढ़ावा देना है.

नवाचार आधारित उत्पादों और किसान प्रशिक्षण पर जोर

नए नेतृत्व के तहत कंपनी अपने विस्तार को गति देने की योजना बना रही है. इसमें शामिल हैं-
• नवाचार आधारित उत्पादों का विकास
• किसानों के लिए प्रशिक्षण कार्यक्रम
• जागरूकता अभियान
• टिकाऊ कृषि विकास को बढ़ावा
• आधुनिक फसल सुरक्षा तकनीकों का विस्तार

इफको-एमसी का लगातार प्रयास रहा है कि किसानों को विश्वसनीय, सुरक्षित और उन्नत कृषि समाधान उपलब्ध कराए जाएं.

बोर्ड सदस्यों ने जताया विश्वास

इस अवसर पर कंपनी के बोर्ड सदस्यों हाजिमे किटो (Hajime Kito), नाओहिरो योशिदा (Naohiro Yoshida), योगेंद्र कुमार, मनोज वर्धिनी, रोहित चोपड़ा और संतोष शुक्ला ने दिलीप संघानी को बधाई दी और उनके नेतृत्व में संगठन के विकास और नवाचार के अगले चरण के लिए अपना पूरा विश्वास व्यक्त किया.

इफको-एमसी क्रॉप साइंस प्राइवेट लिमिटेड: किसानों के लिए समर्पित कंपनी

इफको-एमसी क्रॉप साइंस प्राइवेट लिमिटेड की स्थापना वर्ष 2015 में हुई थी. यह इंडियन फार्मर्स फर्टिलाइजर कोऑपरेटिव लिमिटेड और मित्सुबिशी कॉर्पोरेशन के बीच एक साझेदारी है. कंपनी का मुख्य उद्देश्य किसानों की आय बढ़ाना और उन्हें उचित मूल्य पर गुणवत्तापूर्ण फसल सुरक्षा उत्पाद उपलब्ध कराना है.

कंपनी के प्रमुख उत्पाद

पिछले कुछ वर्षों में कंपनी ने अपने उत्पादों की श्रृंखला का विस्तार किया है, जिनमें शामिल हैं-
1. खरपतवार नाशक
2. कीटनाशक
3. फफूंदनाशक
4. पौध वृद्धि नियामक
5. जैव-आधारित कृषि समाधान

कंपनी का वितरण मॉडल सीधा है, जिससे लागत नियंत्रित रहती है और उत्पाद किसानों तक उचित मूल्य पर पहुंचते हैं.

किसान सुरक्षा बीमा योजना भी चला रही कंपनी

किसानों पर विशेष ध्यान देते हुए कंपनी “किसान सुरक्षा बीमा योजना” के तहत मुफ्त दुर्घटना बीमा भी उपलब्ध कराती है.

इफको-एमसी का मानना है कि किसानों को सशक्त बनाना एक दीर्घकालिक प्रतिबद्धता है, जिसका उद्देश्य भारतीय कृषि को मजबूत, टिकाऊ और भविष्य के लिए सुरक्षित बनाना है.

Agriculture News: किसानों को खून के आंसू रुला रहा है प्याज (Onions)

Onions : प्याज, जो सब्जियों में लाजवाब स्वाद दिलाने के लिए जाना जाता है, वही प्याज (Onions )अब किसानों को नौ – नौ आंसू रुला रहा है. इसका कारण यह है कि प्याज के दामों में भारी गिरावट होने से किसानों को मुनाफा तो दूर, उनकी लागत भी नहीं निकल रही है. आखिर ऐसा क्या हुआ कि मुनाफे की फसल किसान की बर्बादी का कारण बन रही है, जानिए-

क्यों बनी मुनाफे की फसल घाटे का सौदा

प्याज (Onions ) एक मसाले वाली औषधीय फसल है, जिसकी पैदावार भारत में बड़े पैमाने पर होती है और देश-भर में महाराष्ट्र के नासिक प्याज का बोलबाला है, लेकिन इन दिनों प्याज की कीमतों में भारी गिरावट के चलते किसानों का बुरा हाल है. इसका सबसे बड़ा कारण क्षेत्र में भारी बारिश और अचानक मौसम बदलाव का असर बताया गया. इसके अलावा प्याज की खेती में इस्तेमाल किए जाने वाले पारंपरिक तौर-तरीके भी नुकसान का कारण बनते हैं.

आधुनिक तकनीक से मिलता लाभ

प्याज (Onions ) की खेती में पानी का रुकना भारी नुकसान का कारण बनता है. अगर तैयार में पानी भर गया और उसकी निकासी नहीं होगी तो प्याज का सड़ना तय है, इसलिए प्याज की खेती में जल निकासी की व्यवस्था होनी चाहिए और सिंचाई के आधुनिक तकनीकों को अपनाना चाहिए, जिससे भारी नुकसान से बचा जा सके.

ड्रिप और फव्वारा सिंचाई है लाभकारी

प्याज की खेती में सिंचाई के लिए सामान्य तरीके ना अपनाकर ड्रिप और स्प्रिंकलर सिंचाई के तरीके अपनाने चाहिए, जबकि प्याज की खेती में ये दोनों विधियां कम ही इस्तेमाल होती हैं.

प्याज स्टोरेज की कमी भी है कारण

प्याज (Onions ) का भंडारण करने के लिए स्टोरेज की कमी होने से भी प्याज खराब होने लगता है, जिसके कारण किसान अपनी उपज को औने – पौने दामों पर बाजार में बेचने को मजबूर होता है और फसल तैयार होने पर बड़े पैमाने पर उपज मंडियों में आती है तो दाम गिरना भी तय है, इसलिए सरकार को अन्य फसलों की उपज भंडारण की तर्ज पर प्याज भंडारण के लिए भी व्यवस्था करनी चाहिए.

महाराष्ट्र के अलावा प्याज देश के अनेक प्रदेशों की मंडी में प्याज कौड़ियों के भाव बिक रहा है, जिसके चलते किसान फसल फेंकने को मजबूर हो रहे हैं. ऐसे में सरकार से उचित मूल्य और समर्थन की पहल की आवश्यकता है. अन्यथा किसान प्याज की खेती से मुंह मोड़ लेंगे और फिर बाहर के देशों से प्याज आयात भी करना पड़ सकता है, जो सरकार की किरकिरी करने वाला काम है.

Dhan Dhanya Agriculture Scheme : प्रधानमंत्री धन-धान्य कृषि योजन

Dhan Dhanya Agriculture Scheme : केंद्रीय सरकार ने 16 जुलाई, 2025 को 6 साल की अवधि के लिए “प्रधानमंत्री धन-धान्य कृषि योजना” को मंजूरी दे दी है. यह योजना 2025-26 से 100 जिलों में लागू होगी. नीति आयोग के आकांक्षी जिला कार्यक्रम से प्रेरित प्रधानमंत्री धन-धान्य कृषि योजना, कृषि और उस से संबंधित क्षेत्रों पर आधारित पहली विशिष्ट योजना है.

इस योजना का उद्देश्य कृषि उत्पादकता में बढ़ोत्तरी, फसल विविधीकरण और सतत कृषि पद्धतियों को अपनाना, कटाई के बाद पंचायत और प्रखंड लैवल पर भंडारण क्षमता में वृद्धि, सिंचाई सुविधा में सुधार और दीर्घ व अल्प काल के लिए ऋण उपलब्धता सुगम बनाना है. यह 2025-26 के केंद्रीय बजट में “प्रधानमंत्री धन-धान्य कृषि योजना” के अंतर्गत 100 जिले विकसित किए जाने की घोषणा के अनुरूप हैं. इस योजना का क्रियान्वयन 11 विभागों की 36 मौजूदा योजनाओं, राज्यों की अन्य योजनाओं और निजी क्षेत्र की स्थानीय भागीदारी में किया जाएगा.

इस योजना के तहत 3 प्रमुख घटकों कम उत्पादकता, कम फसल सघनता और अल्प ऋण वितरण के आधार पर 100 जिलों को चुना जाएगा. प्रति एक राज्य/केंद्र शासित प्रदेश में जिलों की संख्या शुद्ध फसल क्षेत्र (वह कुल क्षेत्रफल, जहां किसी कृषि वर्ष में वास्तव में फसलें उगाई जाती हैं) और परिचालन जोत के हिस्से पर आधारित होगी. इस योजना में प्रति एक राज्य से कम से कम एक जिले का चयन किया जाएगा.

इस योजना के नियोजन, क्रियान्वयन और निगरानी के लिए जिला, राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर समितियां गठित की जाएंगी. जिला धन धान्य समिति द्वारा जिला कृषि और संबद्ध गतिविधि योजना को अंतिम रूप दिया जाएगा. इस समिति में प्रगतिशील किसान भी सदस्य होंगे. जिले की योजनाएं फसल विविधीकरण, जल और मृदा स्वास्थ्य संरक्षण, कृषि व उस से संबंधित क्षेत्रों में आत्मनिर्भरता और प्राकृतिक व जैविक खेती को विस्तार देने जैसे राष्ट्रीय लक्ष्यों के अनुरूप होंगी.

प्रत्येक धन धान्य जिले में योजना में प्रगति की निगरानी प्रति महीने डैशबोर्ड के माध्यम से 117 प्रमुख कार्य करने के संकेतकों के अनुसार की जाएगी. जिस में नीति आयोग भी जिला योजनाओं की समीक्षा और मार्गदर्शन करेगा. इस के अलावा, प्रत्येक जिले में नियुक्त केंद्रीय नोडल अधिकारी भी निरंतर योजना की समीक्षा करेंगे.

इन 100 जिलों में लक्षित परिणामों में सुधार के साथ देश के प्रमुख प्रदर्शन संकेतकों के मुकाबले समग्र औसत में वृद्धि होगी. इस योजना के परिणामस्वरूप उत्पादकता में बढ़ोत्तरी होगी, कृषि और उस से संबंधित क्षेत्र में मूल्यवर्धन (उत्पाद और सेवा में उत्थान)  होगा और स्थानीय लोगों के लिए रोजगार सृजित होगा. इस प्रकार इस योजना से घरेलू उत्पादन में वृद्धि और देश में आत्मनिर्भरता हासिल होगी. इन 100 जिलों के संकेतकों में सुधार के साथ देश के संकेतकों में भी वृद्धि होगी.

Fertilizers : नकली और घटिया गुणवत्ता वाले उर्वरकों को जड़ से खत्म करना है

Fertilizers : केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण और ग्रामीण विकास शिवराज सिंह चौहान ने सभी राज्यों व केंद्रशासित प्रदेशों के मुख्यमंत्रियों को पत्र लिख कर नकली व निम्न गुणवत्ता वाले उर्वरकों की समस्या को गंभीरता से लेते हुए इस पर तुरंत और सख्त कार्रवाई किए जाने के निर्देश दिए हैं. यह पत्र देश भर में नकली उर्वरकों की बिक्री और सब्सिडी वाले उर्वरकों की कालाबाजारी व जबरन टैगिंग जैसी अवैध गतिविधियों पर रोक लगाने के उद्देश्य से जारी किया गया है.

केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने पत्र में कहा है कि कृषि भारत की अर्थव्यवस्था की रीढ़ है और किसानों की आय में स्थिरता बनाए रखने के लिए उन्हें गुणवत्तापूर्ण उर्वरक सही समय पर, सुलभ दरों पर और मानक गुणवत्ता के साथ उपलब्ध कराना बेहद जरूरी है.

उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि उर्वरक नियंत्रण आदेश, 1985 (जो कि आवश्यक वस्तु अधिनियम, 1955 के अंतर्गत आते हैं) के तहत नकली व निम्न गुणवत्ता वाले उर्वरक की बिक्री प्रतिबंधित है.

केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने पत्र लिख कर निम्नलिखित निर्देश राज्यों को जारी किए हैं :

– किसानों को सही स्थान और उन जगहों पर जहां इन की जरुरत है, पर्याप्त मात्रा में उर्वरक उपलब्ध कराना राज्यों की जिम्मेदारी है. इसलिए राज्य कालाबाजारी, अधिक मूल्य पर बिक्री और सब्सिडी वाले उर्वरकों के डायवर्जन जैसी गतिविधियों पर कड़ी निगरानी व  तुरंत कार्रवाई करें.

– उर्वरक के निर्माण व बिक्री की नियमित निगरानी और सैंपलिंग व परीक्षण के माध्यम से नकली एवं निम्न गुणवत्ता वाले उत्पादों पर सख्त नियंत्रण किया जाए.

– पारंपरिक उर्वरकों के साथ नैनोउर्वरक अथवा जैवउत्तेजक उत्पादों की जबरन टैगिंग को तुरंत रोका जाए.

– दोषियों के विरुद्ध लाइसैंस रद्द, प्राथमिकी पंजीकरण सहित सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए और मामलों का प्रभावी अनुसरण कर दंड सुनिश्चित किया जाए.

– राज्यों को फीडबैक व सूचना तंत्र विकसित कर किसानों/किसान समूहों को निगरानी प्रक्रिया में शामिल करने, और किसानों को असली और नकली उत्पादों की पहचान हेतु जागरूक करने के लिए विशेष प्रयास करने के निर्देश भी दिए गए हैं.

केंद्रीय मंत्री ने सभी राज्यों से अनुरोध किया है कि उपर्युक्त दिशानिर्देशों के अनुसार एक राज्यव्यापी अभियान शुरू  कर नकली और घटिया गुणवत्ता वाले कृषि इनपुट्स की समस्या को जड़ से समाप्त किया जाए. उन्होंने यह भी कहा कि यदि राज्य स्तर पर इस कार्य की नियमित निगरानी की जाएगी तो यह किसानों के हित में एक प्रभावी और स्थायी समाधान सिद्ध होगा.

Ashwagandha : अश्वगंधा की खेती पर प्रशिक्षण

Ashwagandha : देवारण्य योजना के अंतर्गत आज मध्य प्रदेश राज्य औषधि पादप बोर्ड, भोपाल के निर्देशानुसार कलेक्टर किशोर कुमार कन्याल व जिला आयुष अधिकारी डा. केएस गनावे के मार्गदर्शन में विकास खंड चांचौड़ा और आरोन के किसानों व स्वयं सहायता समूह के सदस्यों को “एक जिला एक औषधीय पौधा” योजना के अंतर्गत अश्वगंधा की खेती संबंधी प्रशिक्षण प्रदान किया गया.

इस प्रशिक्षण में मास्टर ट्रेनर द्वारा अश्वगंधा की कृषि के लिए खेत तैयार करना, पौध तैयार करना, बिजाई, जैविक खाद प्रयोग, कीटनाशक प्रयोग, निराईगुड़ाई, सिंचाई फसल कटाई, उपज भंडारण, प्रसंस्करण, विपणन, फसल चक्र, रासायनिक संगठन उच्च गुणवत्ता और उपयोग आदि विषयों पर विस्तार से जानकारी प्रदान की.

अश्वगंधा के औषधीय गुणों की जानकारी

आयुर्वेदिक यूनानी औषधीयों में अश्वगंधा के उपयोग और विभिन्न प्रकार के रोगों में अश्वगंधा के प्रयोग व आयुर्वेदिक योगों के बारे में जानकारी प्रदान की गई है. साथ ही, औषधीय पौधे अश्वगंधा की आर्थिक संभावनाओं के बारे में भी बताया गया है.

आयुष अधिकारी डा. केएस गनावे ने बताया कि देवारण्य योजना के अंतर्गत जिले में अश्वगंधा को “एक जिला एक औषधि पौधा” के रूप में चयनित किया गया है, जिस के तहत जिलेभर में अश्वगंधा की खेती को बढ़ावा देने का काम किया जा रहा है. इस कार्यक्रम का उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में औषधीय पौधों की खेती को बढ़ावा देना और स्थानीय समितियों को मजबूत बनाना है. विशेषज्ञों द्वारा यह भी बताया गया कि अश्वगंधा को मिरेकल प्लांट और इंडियन जिनसेंग भी कहते है. जिस की मांग घरेलू और अंतर्राष्ट्रीय बाजारों में तेजी से बढ़ रही है.

विकास खंड चांचौड़ा में डा. पर्वत सिंह धाकड़, डा. जयराम यादव, डा. आकांक्षा गुप्ता,  अजब सिंह लोधा द्वारा और विकास खंड आरोन में डा. विजय कुमार वर्मा, डा. अंकेश अग्रवाल, डा. हुकुम सिंह धाकड़, शैलेंद्र श्रीवास्तव द्वारा प्रशिक्षण दिया गया. इस प्रशिक्षण में उपस्थित सभी सदस्यों को प्रशिक्षण किट एवं प्रमाण पत्र वितरित किए गए.

हमारा लक्ष्य सिर्फ देश ही नहीं, बल्कि दुनिया के लिए अन्न उपलब्ध करवाना है

Shivraj Singh Chauhan : केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण और ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने पिछले दिनों नई दिल्ली स्थित राष्ट्रीय कृषि विज्ञान परिसर के भारत रत्न सी. सुब्रमण्यम सभागार में भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) की 96वीं वार्षिक आम बैठक की अध्यक्षता की.

इस बैठक में 18 से ज्यादा केंद्रीय एवं राज्य मंत्री शामिल रहे. इस बैठक में आईसीएआर के महानिदेशक डा. एमएल जाट ने भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के वार्षिक प्रतिवेदन 2024-2025 का संकल्प पढ़ा. इस बैठक में भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद की सालाना रिपोर्ट 2024-25 जारी की गई. साथ ही, कृषि एवं प्रौद्योगिकी संबंधित चार पुस्तकों का विमोचन भी किया गया.

इस के बाद सभी मंत्रियों ने बैठक को संबोधित किया, जिस में उन्होंने भारत के खाद्यान्न उत्पादन में बढ़ोतरी और कृषि क्षेत्र में तेजी से हो रही प्रगति को ले कर खुशी जाहिर की. इस बैठक में सभी मंत्रियों ने भविष्य में खेती और किसान समृद्धि की दिशा में एक जुट हो कर सार्थक प्रयास करने की प्रतिबद्धता भी जताई. इस बैठक में केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने फसल औषधि केंद्र के विचार को आगे बढ़ाने की भी बात की. साथ ही, विभिन्न राज्यों के मंत्रियों से महत्त्वपूर्ण योजनाओं को जारी रखने और महत्त्वहीन योजनाओं को खत्म करने और नई योजनाओं के शुरू होने को ले कर सुझाव भी आमंत्रित किए. केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि योजनाओं का वास्तविक लाभ किसानों को मिल रहा है या नहीं, इस की पहचान करना बेहद जरूरी है.

केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि कृषि राज्य का विषय है, राज्य सरकारों के सहयोग के बिना कृषि की उन्नति के प्रयास अधूरे हैं. केंद्र और राज्यों को मिल कर कृषि क्षेत्र के लिए कार्य करना होगा. उन्होंने कहा एक समय था जब हमें निम्न गुणवत्ता वाला गेहूं अमेरिका से आयात कर के खाना पड़ता था. भारत के बारे में यह छवि थी कि हम कभी खाद्यान्न के मामले में आत्मनिर्भर नहीं बन सकते. लेकिन आज यह छवि और मिथक पूरी तरह से मिट गई है. खाद्यान्न के मामले में भारत रिकौर्ड कायम कर रहा है. अन्न के भंडार भर रहे हैं. खाद्यान्न उत्पादन में रिकौर्ड स्तर पर वृद्धि दर्ज की गई है. आज हम कृषि उत्पाद निर्यात कर रहे हैं.

उन्होंने कहा कि हमारी उपलब्धियां अभिनंदनीय हैं, जिस के लिए सभी वैज्ञानिकों और आईसीएआर की टीम को बधाई देता हूं. लेकिन उपलब्धियों के साथसाथ कुछ चुनौतियां भी हैं, जिस दिशा में हमें काम करना होगा. उन्होंने कहा कि विकसित कृषि संकल्प अभियान में जो सुझाव व बातें उभर कर आई हैं, उसी के आधार पर आगे का रास्ता तय होगा. राज्य के हिसाब से भावी अनुसंधान के रास्ते तय करने होंगे. मांग आधारित अनुसंधान की जरूरत है. सिर्फ कागजी औपचारिकता के लिए अनुसंधान नहीं, बल्कि किसानों की उपयोगिता को देखते हुए अनुसंधान किए जाने चाहिए.

उन्होंने आगे कहा कि सोयाबीन, दलहन, तिलहन में अभी और अधिक शोध व काम की जरूरत है. गेहूं, चावल, मक्के के साथसाथ दलहन, तिलहन व अन्य फसलों के उत्पादन में वृद्धि को ले कर तेजी से प्रयास करने होंगे. जिस के लिए राज्यवार व फसलवार कार्य योजना बनाई जाएगी. उन्होंने कहा कि कल मैं ने मध्य प्रदेश में सोयाबीन की खेती का निरीक्षण किया. जहां खराब बीज की गंभीर समस्या देखने को मिली. खराब बीज के कारण अकुंरण ही नहीं हो पाया था. जिस के बारे में मैं ने तुरंत जांच के आदेश दे दिए हैं. अमानक बीज, खाद और उर्वरक बेहद गंभीर विषय है, जिसे ले कर भी सरकार जल्द ही कड़ा कानूनी प्रावधान लाएगी. उर्वरकों के एमआरपी पर भी काम करने की जरूरत है. उर्वरक की सही कीमत तय होनी बहुत जरूरी है.

केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि फसलवार बैठकों का क्रम शुरू किया जा चुका है. सोयाबीन पर मध्य प्रदेश के इंदौर में बड़ी बैठक की गई है. आगे अब कपास, गन्ने व अन्य फसलों को लेकर भी विशेष बैठकें की जाएगी. आने वाली 11 जुलाई को कोयंबटूर में कपास को ले कर सम्मेलन करेंगे. कपास मिशन को उपयोगी बनाने पर विचार करेंगे. एकएक फसल पर राज्य की जरूरतों, जलवायु अनुकूलता और किसानों की आवश्यकताओं के अनुसार विस्तारपूर्वक चर्चा की जाएगी और उचित समाधान के साथ उत्पादन बढ़ोतरी पर काम होगा.

उन्होंने आगे वैज्ञानिकों से आह्वान करते हुए कहा कि प्रौद्योगिकी के और बेहतर इस्तेमाल के साथ किसानों की मांग के अनुरूप और आधुनिक खेती के उपकरण बनाने की दिशा में प्रयास करें. हाल ही के एक अनुभव का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि एक किसान द्वारा ऐसे उपकरण बनाने की मांग की गई थी, जो उर्वरकता की जांच कर सके. ऐसा उपकरण जो बता सके कि तय मापदंड के अनुसार उर्वरक की गुणवत्ता सही है या नहीं, उर्वरक उपयोगी है या नहीं. ऐसे ही कई विचार किसानों से चर्चा के दौरान सामने आते हैं, जिसे आधार बनाकर शोध की दिशा तय की जा सकती है. उन्होंने कहा कि लैब और संस्थानों का सैद्धांतिक ज्ञान जब व्यावहारिक स्वरूप में किसानों तक पहुंचेगा, तभी सही मायने में शोध की सार्थकता सिद्ध होगी.

केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि रबी की फसल से पहले राज्यों के साथ मिल कर फिर से ‘विकसित कृषि संकल्प अभियान’ के जरीए किसानों तक विज्ञान को ले जाने की कोशिश होगी. रबी सम्मेलन दो दिन का होगा. पहले दिन रूपरेखा तय होगी, दूसरे दिन राज्यों के कृषि मंत्री तय रूपरेखा को अनुमोदित करते हुए अंतिम कार्य योजना को रूप देंगे. भारत की माटी की उर्वरक क्षमता अतुलनीय है. मुझे यकीन है कि भारत देश के लिए भी और दुनिया के लिए भी अन्न की उपज करेगा और दुनिया का फूड बास्केट बनेगा.

उन्होंने आगे कहा कि विकसित भारत के लिए विकसित खेती और समृद्ध किसान जरूरी है. जिस के लिए कोई कसर नहीं छोड़ी जाएगी. उन्होंने कहा कि मैं स्वयं खेतों में जा कर किसानों से मिल कर खेती को जमीनी स्तर पर समझने की कोशिश कर रहा हूं. कश्मीर के सेब हो, केसर हो, उत्तर प्रदेश का गन्ना या कर्नाटक की सुपारी हो, मैं सब जगह जा कर खेती को नजदीक से समझने और भावी रणनीतियों को ले कर प्रयासरत हूं.

केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि खेती मात्र एक व्यवसाय नहीं देश की सेवा है. हमें भारत की खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करनी है. 144 करोड़ आबादी के लिए खाद्यान्न सुरक्षा के साथसाथ पोषणयुक्त आहार उपलब्ध करवाना है, आने वाली पीढ़ी के लिए धरती को सुरक्षित रखना है, हमारा लक्ष्य सिर्फ देश ही नहीं, बल्कि दुनिया के लिए भी अन्न की उपलब्धता करवाना है. उन्होंने कहा कि वर्तमान में भौतिक प्रगति की चाह में दुनिया के कई देश ऐसे कदम उठा रहे है, जिस से प्रकृति को नुकसान हो रहा है. लेकिन हमें ऐसा मार्ग चुनना है जो प्रकृति को नुकसान पहुंचाए बिना, विकास की दिशा तय करे.

अंत में शिवराज सिंह ने वैज्ञानिकों से कहा कि आप बेहतर काम कर रहे हैं, जिस के लिए बधाई के पात्र हैं. लेकिन उपलब्धियों के साथसाथ चुनौतियों पर भी काम करना होगा. मेरा आह्वान है कि आगे की शोध की रूपरेखा चुनौतियों और उन के समाधान को ध्यान में रखते हुए तय कर, बढ़ते रहें और कृषि क्षेत्र में नई सफलताएं हासिल करते रहें.

Potato : आगरा में खुलेगा अंतर्राष्ट्रीय आलू केंद्र

Potato: केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण और ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने 24 जून, 2025 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल द्वारा उत्तर प्रदेश के आगरा जिले के सिंगरा में अंतर्राष्ट्रीय आलू (Potato) केंद्र के दक्षिण एशिया क्षेत्रीय केंद्र की स्थापना की मंजूरी को एक महत्वपूर्ण कदम बताया है.

पिछले दिनों दिल्ली में मीडिया से बातचीत में केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि गेहूं और चावल के बाद उपभोग के लिहाज से आलू का तीसरा स्थान है. चीन के बाद भारत आलू उत्पादन में दूसरे नंबर पर है. आलू प्रमुख फसल भी है और खाद्य सुरक्षा के लिहाज से भी बेहद जरूरी है, लेकिन भारत में ज्यादातर आलू की टेबल वैरायटी का उत्पादन होता है, जबकि निर्यात बाजार में प्रोसैस करने योग्य किस्मों की मांग अधिक होती है. इस में जर्म प्लाज्म का भंडार होगा, जिस का उपयोग कर के अधिक उत्पादकता वाले बीज तैयार किए जाएंगे.

उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार द्वारा ऐसी नई किस्मों के उत्पादन का कार्य किया जाएगा जो जलवायु अनुकूल हों और गर्मी, रोगों और कीटों जैसी अन्य विभिन्न समस्याओं से लड़ने में सक्षम हो. इस केंद्र के माध्यम से बायोफोर्टिफाईड किस्मों के विकास पर भी बल दिया जाएगा. साथ ही, आलू की ऐसी वैरायटी बनाने पर भी जोर होगा, जिसे मुधमेह के मरीज भी खा सके.

केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि वर्तमान में, आलू का ज्यादातर उत्पादन उत्तर भारतीय राज्यों में होता है और विंध्य पर्वत श्रृंखला के दक्षिण में उत्पादन बहुत कम है, इसलिए इस केंद्र के माध्यम से विभिन्न कृषि जलवायु क्षेत्रों के अनुसार आलू की किस्मों के विकास पर भी ध्यान दिया जाएगा. अभी देश में 34 फीसदी आलू का उत्पादन उत्तर प्रदेश में होता है, जिस में आगरा व आसपास के क्षेत्र प्रमुख है, इसलिए आगरा में इस केंद्र की स्थापना का निर्णय लिया गया है.

उन्होंने आगे यह भी बताया कि केवल आलू ही नहीं बल्कि, अन्य कंदीय फसलों जैसे शकरकंद उस के भी क्वालिटी से भरपूर उत्पादन की दिशा में कार्य किया जाएगा. इस के लिए एक समन्वय समिति का भी गठन किया जाएगा, जिस में भारत सरकार के कृषि सचिव व भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के महानिदेशक शामिल रहेंगे.

केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने बताया कि केंद्र के माध्यम से जो भी वैरायटी तैयार की जाएगी, उस पर भारत सरकार का अधिकार होगा. सभी वैरायटी पर हमारा नियंत्रण रहेगा.