Animal Care. बछड़ों की देखभाल के जरूरी उपाय: दस्त रोकथाम, सही दूध मात्रा, पौष्टिक आहार, हरा चारा, सफाई और समय पर टीकाकरण की जानकारी.

दस्त की रोकथाम:

बच्चे पैदा होने के दूसरे दिन ही जमीन या दीवार चाटना शुरू कर देते हैं, जिस के कारण विषैले कीटाणु पेट और आंतडि़यों में पहुंच कर सोजिस पैदा कर देते हैं. आंतडि़यों में सोजिस आ जाने से दूध हजम नहीं होता और बदबूदार दस्त लग जाते हैं.

इस से बचाव के लिए 8-10 ग्राम होस्टासाइक्लीन या ओरयोमाइसीन पाउडर रोजाना एक महीने तक दें और डाक्टर को दिखाते रहें. मिट्टी चाटने से बचाने के लिए बच्चे के मुंह पर छिंका बांधें.

दूध की मात्रा:

पैदा होते समय बच्चे का वजन 25-30 किलोग्राम तक होता है. इसलिए एक महीने तक बच्चे को उस के वजन का 10वां भाग दूध 24 घंटे में पिलाएं. दूसरे महीने में वजन का 15वां भाग व तीसरे महीने में 20वां भाग तक दूध 24 घंटे में पिलाना चाहिए.

चारा देना:

10-15 दिन के बाद छोटे बच्चे नरम हरे चारे जैसे बरसीम, लोबिया, ज्वार, मक्का बडे़ चाव से खाना शुरू कर देते हैं, क्योंकि यह चारा पौष्टिक होने के साथ जायकेदार भी होता है. इस चारे के साथ 5-10 ग्राम तक नमक या मिनरल मिक्चर बच्चे के मुंह में सुबहशाम डालना चाहिए, ताकि हरा चारा आसानी से हजम हो जाए और शरीर में लवणों की मांग भी पूरी हो जाए.

आहार देना:

खली, मक्का, जौ, चोकर, चना और अनाजों के छिलके को पिसवा कर छोटे बच्चों के लिए बहुत बढि़या राशन बनाया जा सकता है. राशन खिलाने से दूध की मात्रा भी घटाई जा सकती है, जिस से दूध और कामों के लिए इस्तेमाल में लाया जा सके.

सफाई और देखभाल:

बच्चों को तंदुरुस्त और चुस्त रखने के लिए उन के रहने की जगह की सफाई रोजाना करनी चाहिए. अगर बच्चे के शरीर पर बाल काफी बडे़ हों, तो मशीन द्वारा बाल काट देने चाहिए. गरमी व सर्दी से बचाने के लिए पूरा इंतजाम करना चाहिए. सर्दी के मौसम में बैठने वाली जगह पर बिछावन का इस्तेमाल करना चाहिए. 5-6 महीने के बाद संक्रामक बीमारियों से बचाने लिए टीके भी लगवाते रहना चाहिए.

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