बागबानी में आजकल एक नया खतरा मंडरा रहा है. फल बिना पके ही पेड़ से का साथ छोड़ रहे हैं. फलों के राजा आम के अलावा संतरा, अमरूद जैसे फल बगैर तैयार हुए, Fruits in Crisis  बिना पके ही पेड़ों से टपक रहे हैं. इससे फल उत्पादकों को लाखों रुपए का नुकसान हो रहा है.

क्यों हो रहा है यह बदलाव

वैज्ञानिकों के मुताबिक इंसानों की तरह पौधों में भी हार्मोन होते हैं और पौधों की वृद्धि तथा उत्पादन में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका होती है, जो फूल आने से लेकर फल विकास तक हर प्रक्रिया को नियंत्रित करते हैं और जब पेड़ तनाव में होता है तो यह हार्मोन असंतुलित हो जाते हैं. Fruits in Crisis ऐसे में पेड़ अपने अस्तित्व को प्राथमिकता देता है और फल गिरना शुरू हो जाता है.

शोध में पाया गया है कि तनाव के कारण कार्बोहाइड्रेट की आपूर्ति बाधित हो जाती है जो फल के विकास के लिए बहुत जरूरी है और मेटाबॉलिज्म क्रिया में बाधा उत्पन्न हो जाने के कारण बिना पके ही फल पेड़ से टपकने लगते हैं.

जलवायु परिवर्तन भी कारण

वैज्ञानिकों का दावा है कि जलवायु संकट इतना गंभीर है कि कई बार सिर्फ 0.1 फीसदी फल ही पूरी तरह परिपक्व हो पाते हैं.

बागवानों का है कहना

सीतापुर के किसान बागबान अखिल का कहना है कि जलवायु और पर्यावरण की प्रतिकूलता से आम के पेड़ों से फल डंठल छोड़ देते हैं और तापमान में बदलाव से बोर कमजोर हो जाता है, जिससे फल नहीं लगते हैं. कई बार फल लगते हैं, लेकिन सूखकर गिरने लग जाते हैं.

हरदोई के बागबान राम किशोर कहते हैं कि पहले आम के बार में कीड़े लग रहे थे. उचित प्रबंधन के बाद भी आम का संरक्षण कठिन होता जा रहा है.

दुलौहेडा ग्राम के ग्राम प्रधान बाल किशोर ने बताया कि कुछ वर्षों से जलवायु परिवर्तन के कारण या कोई अन्य हार्मोनल परिवर्तन के कारण आम की फसल के अलावा नीबू के पेड़ों पर भी बिना मौसम फल टपकने की समस्या देखी गई है.

इसके अलावा पेड़ में पोषण की कमी भी कभी-कभी फल टपकने का कारण होता है, इसलिए इसका समाधान भी जरूरी है.

कैसे हो समाधान

किसी भी पौधों के संतुलित पोषण के लिए 17 पोषण तत्वों की आवश्यकता पड़ती है. लेकिन जब इनमें कमी होती है तो पौधों की मेटाबॉलिक क्रिया प्रभावित हो जाती है, जिसके कारण पौधों के संतुलित विकास में रुकावट आती है.

बोरोन और जिंक की कमी से भी कभी-कभी पौधों से बिना पके फल टपकने लगते हैं, इसलिए फल वाले वृक्षों पर विशेष ध्यान रखने की जरूरत है. Fruits in Crisis  हार्मोन तथा पोषण तत्वों को समय पर फल वाले पौधों को उपलब्ध करा देंगे तो बागबान इस समस्या से काफी हद तक बच सकते हैं.

जलवायु परिवर्तन के कारण हो रहे बदलाव में सभी को सतर्क रहना है और इसके बचाव के लिए हर संभव कदम प्रत्येक नागरिक को उठाना है.

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