Super Seeder: आज किसान के सामने बड़ी चुनौती फसल अवशेष, खासकर पराली प्रबंधन की है. धान कटाई के बाद खेत में बची पराली को हटाने में समय, पैसा और मेहनत तीनों ज्यादा लगते हैं. इसी समस्या का आधुनिक समाधान है सुपर सीडर मशीन, जो किसानों को देती है इन सबका समाधान.

क्या है सुपर सीडर यंत्र

सुपर सीडर (Super Seeder) एक आधुनिक ट्रैक्टर (Tractor) चालित कृषि यंत्र है, जो पराली को हटाए बिना ही सीधे खेत में बीज बोने का काम करती है. यह मशीन पराली को काटकर मिट्टी में मिलाती है और उसी समय गेहूं जैसी फसल की बोआई भी कर देती है. इससे खेत में अधिक दिनों तक नमी बनी रहती है, जिससे कम पानी की जरूरत होती है साथ ही खेती में उर्वराशक्ति भी बढ़ती है. सुपर सीडर मशीन को चलाने के लिए आमतौर पर 45 HP से 65 HP क्षमता वाला ट्रैक्टर जरूरी होता है.

सुपर सीडर (Super Seeder) मशीन मुख्य रूप से गेहूं की बोआई के लिए सबसे ज्यादा उपयोगी मानी जाती है. इसके अलावा कुछ क्षेत्रों में जौ, चना सरसों की बोआई में भी इसका प्रयोग किया जाता है.

सुपर सीडर यंत्र कैसे करता है काम

    • रोटरी ब्लेड खेत में बची पराली को काटते हैं.
    • कटी हुई पराली मिट्टी में मिल जाती है जो बनती है खाद.
    • सीड ड्रिल बीज को सही गहराई में डालती है जिससे अंकुरण अच्छा होता है.
    • बोआई में समय की बचत.
    • मिट्टी की नमी बनी रहती है.
    • पराली जलाने से मिलता है छुटकारा, जिससे पर्यावरण खराब नहीं होता.
    • मिट्टी की उर्वरता बढ़ती है.
    • खरपतवार कम उगते हैं.
    • गेहूं की उपज में 10–20 प्रतिशत तक बढ़ोतरी.

सुपर सीडर यंत्र के इस्तेमाल में बरतें ये सावधानियां

    • सही समय पर करें इस्तेमाल मिलेगा ज्यादा फायदा.
    • धान कटाई के तुरंत बाद करें इस्तेमाल.
    • जब खेत में हल्की नमी हो तब करें बोआई का काम.
    • बहुत गीली या बहुत सूखी मिट्टी में न चलाएं.
    • गेहूं बोआई से पहले सबसे उपयुक्त.
    • सीडर यंत्र को ट्रैक्टर HP से कम क्षमता वाली मशीन न लगाएं. सुपर सीडर मशीन को चलाने के लिए आमतौर पर 45 से 65 HP क्षमता वाला ट्रैक्टर जरूरी होता है.
    • ब्लेड और बेयरिंग की नियमित जांच करें.
    • खेत में एक जैसी स्पीड रखें.

केंद्र और राज्य सरकारें पराली प्रबंधन को बढ़ावा देने के लिए सुपर सीडर मशीन पर 40 से 50 प्रतिशत तक सब्सिडी देती हैं. कुछ वर्ग के लिए यह छूट अधिक भी हो सकती है. इसके लिए अपने नजदीकी कृषि विभाग से जानकारी ले सकते हैं.

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