भारत में शतावर का उपयोग अनेक आयुर्वेदिक औषधियों में किया जाता है और इसकी खेती अन्य फसलों से कहीं ज्यादा मुनाफा भी देती है. जानिए कैसे कर सकते हैं शतावर (शतावरी) की खेती –

खेती के लिए कितना तापमान

शतावर की खेती के लिए मध्यम तापमान सब से उपयुक्त माना जाता है, जो तापमान 10 से 50 डिगरी सैल्सियस तक उपयुक्त माना जाता है. बोआई के लिए 30-35 डिगरी सैल्सियस व कटाई के लिए 20-25 डिगरी सैल्सियस तापमान अच्छा है.
ज्यादा ठंडे प्रदेशों को छोड़कर पूरे भारत की जलवायु इस की खेती के लिए उपयुक्त है. विशेष रूप से मध्य भारत के विभिन्न क्षेत्रों में यह पौधा काफी अच्छी तरह से पनपता है.

उपयुक्त मिट्टी

इसकी खेती में रेतीली भूमि की आवश्यकता होती है. रेतीली भूमि में इस की जड़ों को फैलने के लिए सुविधा प्राप्त हो जाती है. लाल दोमट से चिकनी मिट्टी व काली मिट्टी से लैटेराइट मिट्टी में शतावर उगाई जाती है. पौधे की वृद्धि के लिए मिट्टी का पीएच मान 6-8 उपयुक्त माना जाता है. शतावर की फसल एक उथली जड़ वाली होती है, इसलिए इस प्रकार की उथली और पठारी मृदा के तहत जिस में मृदा की गहराई 20-30 सैंटीमीटर की है, उसमें आसानी से उगाया जा सकता है.

शतावर की खेती के लिए नर्सरी

एक एकड़ भूमि में शतावर के खेती के लिए 100 वर्गफुट की नर्सरी पर्याप्त होती है. पौधशाला की भूमि की अच्छी प्रकार जुताई कर ढेले फोड़ कर समतल कर लेना चाहिए. फंफूदीजनित रोग से बचाव हेतु भूमि का शोधन फार्मेल्डीहाइड से अवश्य कर लेना चाहिए.

नर्सरी की सिंचाई

नर्सरी तैयार करने के लिए बीज बोने के बाद स्प्रिंकलर्स विधि द्वारा बीजों की हलकी सिंचाई कर देनी चाहिए. इनके बीजों का अंकुरण 10 से 15 दिनों में शुरू हो जाता है और 40 से 45 दिनों बाद इसके पौधों को पॉलीथीन की थैलियों में रखकर भी तैयार कर सकते हैं.

कैसे करें खेत की तैयारी

शतावर बहुवर्षीय पौधा है और इसकी खेती 2-3 साल की अवधि की होती है, इसलिए भूमि की तैयारी अच्छी प्रकार से करनी चाहिए. शुरुआत में देशी हल या कल्टीवेटर से 2-3 बार खेत की गहरी जुताई, वर्षा ऋतु में कर लेनी चाहिए. फिर 2-3 टन केंचुआ खाद या कंपोस्ट या 20-25 टन गोबर खाद उपलब्धता के अनुसार प्रति एकड़ जुते हुए खेत में बोआई के पहले डाल कर मिला देना चाहिए. इसके बाद नवंबर के शुरुआती दिनों में दूसरी जुताई कर देनी चाहिए.

खेत में पौधों की रोपाई कैसे करें

सुविधानुसार जुते हुए खेत में 10 मीटर की क्यारियां बनाकर इसमें 4 और 2 के अनुपात में मिट्टी व गोबर की खाद मिला कर डालनी चाहिए. इसके बाद 60-80 सैंटीमीटर की दूरी रखते हुए 9 इंच की मेंड़ को तैयार कर लें.जब नर्सरी में पौध 40 दिन के हो जाए और वह 4-5 इंच की ऊंचाई प्राप्त कर ले, नर्सरी से पौधों को सावधानीपूर्वक उखाड़ कर जुलाई से अगस्त के बीच रोपाई कर देनी चाहिए.

खरपतवार नियंत्रण कब है जरूरी

फसल के शुरुआती दिनों में काफी खरपतवार उग आते हैं जिन को खुरपी से निराई – गुड़ाई कर बाहर निकाल देना चाहिए. इससे एक तरफ जहां खरपतवार पर नियंत्रण होता है वहीं हाथ से निराई – गुड़ाई करने से मिट्टी भी नरम रहती है जिससे पौधों की जड़ों के प्रसार के लिए उपयुक्त वातावरण भी प्राप्त होता है. निराई – गुड़ाई करते समय ध्यान रखें कि पौधे व प्रारोह को कोई नुकसान न पहुंचे. 6 से 8 बार पूरी फसल में निराई – गुड़ाई करना बेहतर होता है.

सिंचाई और जल निकास प्रबंधन

शतावर के पौधों को सिंचाई की आवश्यकता कम होती है. फिर भी शुरुआती दिनों में एक माह में 4 से 6 दिन के अंतर पर सिंचाई करते रहें. इस के बाद हर माह में एक सिंचाई से ट्यूबर्स (जड़ों) का अच्छा विकास हो जाता है. सिंचाई के साथसाथ निकास की व्यवस्था इसमें अति आवश्यक है, जिससे जड़ों के पास जल भराव न हो सके जो कि पौधों की वृद्धि के लिए हनिकारक होता है. वैसे, कम पानी या बिना सिंचाई के यानी असिंचित फसल के रूप में भी शतावर की खेती की जा सकती है, लेकिन इससे उपज में कमी देखी गई है.

फसल पकने की अवधि

शतावर की जड़ें लगाने के 24-40 माह बाद परिपक्व हो जाती हैं किंतु बोआई के 24 माह बाद मृदा और मौसमी दशाओं को देखते हुए खुदाई कर लेना चाहिए जिससे अधिक गुणवत्ता वाली जड़ें प्राप्त होती हैं. कुछ किसान इस की खुदाई बोआई के 24 माह बाद भी करते हैं.

कटाई

शतावर की खुदाई का सही समय अप्रैल – मई है. 24 से 40 माह की फसल, जब पौधों पर लगे हुए फल पक जाएं, खुदाई योग्य हो जाती है. ऐसी स्थिति में कुदाली की सहायता से सावधानीपूर्वक जड़ों को खोद लिया जाता है. खुदाई से पहले यदि खेत में हलकी सिंचाई दे कर मिट्टी को थोड़ा नरम बना लिया जाए तो फसल को उखाड़ना आसान हो जाता है. जड़ों को उखाड़ने के बाद उसमें चीरा लगा कर ऊपर का छिलका उतार लिया जाता है.

कितना मिलता है लाभ

एक एकड़ खेत से 150-180 क्विंटल गीली शतावर प्राप्त होती है जो छीलने और सुखाने के बाद 15-18 क्विंटल प्राप्त होती है.

अधिक जानकारी के लिए क्लिक करें...