Lemon: तांबे की कमी से नीबू के पेड़ के नए हिस्से मर जाते हैं. इसे एक्जैंथीमा कहते हैं. छाल और लकड़ी के बीच गोंद की थैलियां बन जाती हैं और फलों से भूरे रंग का पदार्थ निकलता रहता है.
जस्ते की कमी से नीबू (Lemon) की पत्तियों पर असर पड़ता है. ऊपर की पत्तियां आकार में छोटी व पतली हो जाती हैं, जिन्हें लिटिल लीफ कहते हैं. फलकलियों का निर्माण बहुत कम हो जाता है और टहनियां मर जाती हैं.
बढ़वार न होने के खास कारण:
* खादों का कम व ज्यादा मात्रा में इस्तेमाल.
* नकदी फसलों में आवश्यकता से अधिक खाद का प्रयोग.
* खाद का गलत तरीके से इस्तेमाल.
* पानी सही मात्रा में न मिलना.
* फसलों में कीटों, रोगों और खरपतवारों की बढ़ती समस्या व समय से उन पर ध्यान न देना.
एकीकृत पोषक तत्त्व देखभाल व जैविक खाद
जैविक खाद विभिन्न प्रकार के सूक्ष्म जीवाणुओं का वह जीवित पदार्थ है, जो मिट्टी में मौजूद न होने वाले पोषक तत्त्वों को उपलब्ध कराने में खास भूमिका निभाता है और साथ ही साथ आबोहवा से नाइट्रोजन ले कर पौधों की जड़ों व मिट्टी को देता है. जैविक खादों में एजोटोबैक्टर, एजोस्पाइरीलम, पीएसएन या पीएसबी, वाम राइजोबियम खास?हैं.
एकीकृत पोषक तत्त्व इंतजाम हेतु सुझाव
* मिट्टी की जांच के आधार पर ही उर्वरकों का इस्तेमाल करना चाहिए.
* पिछली फसल में दिए गए उर्वरकों की मात्रा के आधार पर ही मौजूदा फसल को को और उर्वरक देने चाहिए.
* दलहनी फसलों में राइजोबियम कल्चर का प्रयोग अवश्य करें.
* ढैंचा का हरी खाद के रूप में इस्तेमाल करें.
* फसलचक्र में बदलाव करें.
* मौजूदगी के आधार पर गोबर, फसलअवशेषों और कूड़ाकरकट वगैरह के ज्यादा से ज्यादा इस्तेमाल से कंपोस्ट तैयार कर के इस्तेमाल में लाएं.
* विभिन्न फसलों हेतु जरूरत के मुताबिक उर्वरकों का इस्तेमाल करें.





